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‘शिष्टाचार भेंट’ का संदेश

भास्कर साई
Updated Tue, 14 Nov 2017 05:05 PM IST
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एम भास्कर साई
ल के वर्षों में यह भारतीय राजनीति में गोपनीयता का चरम उदाहरण था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्रमुक के वयोवृद्ध और बीमार अध्यक्ष एम करुणानिधि से हाल-चाल पूछने उनके घर आ रहे थे, लेकिन इस बारे में सार्वजनिक तौर पर तब बताया गया, जब दिल्ली से प्रधानमंत्री के विमान को चेन्नई के लिए उड़ान भरने में सिर्फ एक घंटा रह गया था। जाहिर है, यह चकित करने वाला घटनाक्रम था, उनके लिए तो और भी, जो द्रमुक की राजनीति के करीब हैं और भाजपा, कांग्रेस, वाम पार्टियों और वीसीके  (विधुथलाई चिरुथइगल कटची) के विरोधी हैं। और तो और, तमिलनाडु में सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक को भी इस बारे में कुछ पता नहीं था, जिसके मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री क्रमशः ई के पलनीस्वामी और ओ पन्नीरसेलवम को भाजपा हाई कमान का नजदीकी बताया जाता है। 


मोदी ने द्रमुक नेताओं को भी हैरान कर दिया। उन्हें यह बताने में काफी मशक्कत करनी पड़ी कि इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। करुणानिधि से मोदी की यह मुलाकात शिष्टाचार भेंट है, क्योंकि देश के वरिष्ठतम नेताओं में से एक करुणानिधि पिछले एक साल से अस्वस्थ हैं। जबकि सच्चाई कुछ और ही थी, जो मोदी व करुणानिधि के छोटे बेटे स्टालिन के बीच दिखाई पड़ी नजदीकी से सामने भी आई। स्टालिन और उनकी सौतेली बहन कनिमोझी को प्रधानमंत्री के साथ हंसी-मजाक करते देखा गया।


मोदी की यह 'शिष्टाचार भेंट’ दोनों राजनीतिक पार्टियों के बीच जमी बर्फ को पिघलाने की कोशिश के तहत थी। सच्चाई यह है कि हाल के वर्षों में भाजपा और द्रमुक के बीच बेहतर रिश्ते नहीं हैं। हालांकि यहां यह याद दिलाना अप्रासंगिक नहीं होगा कि अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार का द्रमुक हिस्सा थी। राजनीतिक विश्लेषकों की ओर से यह भी दावा किया जा रहा है कि द्रमुक के लिए कांग्रेस के बजाय भाजपा से साझेदारी करना ज्यादा लाभदायक होगा, क्योंकि तब ‘कुछ मामलों में’ करुणानिधि की पार्टी को केंद्र की मदद मिल पाएगी। लेकिन भाजपा और द्रमुक, दोनों ने इस मुलाकात के तुरंत बाद स्पष्टीकरण दिया। स्टालिन ने सफाई दी, ‘प्रधानमंत्री ने थलईवर (द्रमुक नेता) के स्वास्थ्य के बारे में जानने के लिए उनसे मुलाकात की। न द्रमुक, और न ही भाजपा इस मुलाकात का राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल कर रही है।’ भाजपा के तमिलनाडु प्रभारी तमिलिसाई सौंदरराजन ने कहा, ‘कलईंगर (करुणानिधि) देश के वरिष्ठतम राजनेताओं में से हैं और मोदी जी की उनसे मुलाकात के पीछे कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं था।’


अलबत्ता ये ‘सफाइयां’ आलोचकों और राजनेताओं का मुंह बंद नहीं कर पाई हैं। तमिलनाडु की राजनीति पर पिछले ढाई दशक से पैनी निगाह रखने वाले प्रोफेसर एस रवितेज कहते हैं, ‘मोदी का चेन्नई दौरा असल में  तमिल अखबार दीना थांती के प्लेटिनम जुबली समारोह में शामिल होने के उद्देश्य से था। इसके अलावा वह प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्यरत एक आईएएस अधिकारी के विवाह समारोह में भाग लेने के लिए भी गए थे। लेकिन करुणानिधि से मुलाकात करने के लिए उन्होंने अपने आधिकारिक कार्यक्रम में बदलाव किया।


इसका यह राजनीतिक संदेश गया है कि प्रधानमंत्री की इस द्रविड़ पार्टी से कोई अरुचि नहीं है।’ वह यह भी कहते हैं कि करुणानिधि से मोदी की मुलाकात पर द्रमुक के सहयोगी दल तो स्तब्ध हुए ही हैं, यह राज्य की सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक को भी एक चेतावनी है कि अगर उन्होंने पार्टी का अंदरूनी झगड़ा खत्म नहीं किया, तो भाजपा राज्य में अपना गठबंधन सहयोगी बदल भी सकती है। थोड़े दिनों पहले तक भी यह शीशे की तरह साफ था कि 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा अन्नाद्रमुक के साथ अपना गठजोड़ बरकरार रखेगी। लेकिन अब ऐसा लगने लगा है कि अन्नाद्रमुक में नेतृत्व के झगड़े को देखते हुए भाजपा अपना मन बदल रही है। इसके भी ब्योरे हैं कि कुछ सर्वे तमिलनाडु में सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक के खिलाफ हैं, संभवतः इसलिए भी भाजपा अपना रुख बदल रही हो।


हालांकि मोदी-करुणानिधि मुलाकात से तत्काल कोई निष्कर्ष निकाल लेना जल्दबाजी है। हां, इससे दीर्घावधि में तमिलनाडु में राजनीतिक समीकरण बदलने का थोड़ा-बहुत आभास मिलता है। इस समय तो इसे एक संदेश मानना ही ठीक है। तमिलनाडु में अपनी जड़ जमाने को इच्छुक भाजपा अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए कुछ भी कर सकती है। जहां तक द्रमुक का सवाल है, तो इस समय वह बेहद कमजोर स्थिति में है। तमिलनाडु में वह विपक्षी पार्टी है, लेकिन लोकसभा में द्रमुक का एक भी सांसद नहीं है, और राज्यसभा में भी उसकी मौजूदगी नगण्य है। जबकि अन्नाद्रमुक संसद में भाजपा और कांग्रेस के बाद तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है। मोदी और करुणानिधि की मुलाकात को रजनीकांत और कमल हासन के लिए भी एक संदेश मानना चाहिए। तमिल सिनेमा के ये दोनों शीर्ष सुपर स्टार, जो राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखते हैं, भाजपा से दूरी बरतना चाहते हैं। कमल हासन जहां भाजपा पर खुला हमला कर रहे हैं, वहीं रजनीकांत ने भाजपा द्वारा डोरे डालने के बावजूद अपनी अलग राजनीतिक पार्टी बनाने की इच्छा जताई है।


इस मुलाकात ने राजनेताओं को ही नहीं, खुद करुणानिधि के परिवार तक को सकते में डाल दिया है। करुणानिधि के बड़े बेटे अझागिरी ने प्रधानमंत्री को एक चिट्ठी लिखकर उनका आभार प्रकट किया है, साथ ही लिखा है कि वह खुद प्रधानमंत्री का स्वागत नहीं कर सके, क्योंकि उन्हें इस बारे में पता नहीं था। कहते हैं कि इस बारे में खुद स्टालिन को भी जानकारी नहीं थी। जिस समय प्रधानमंत्रील कार्यालय का पत्र द्रमुक के दफ्तर में पहुंचा, उस समय स्टालिन शारजाह में थे। उन्हें आनन-फानन वहां से लौटना पड़ा।
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करुणानिधि से मुलाकात की वजह चाहे जो भी रही हो, लेकिन मोदी ने एक तीर से कई शिकार किए हैं, और उनका संदेश अन्नाद्रमुक, द्रमुक, कांग्रेस, पीएमके, एमडीएममके, वीसीके, कम्युनिस्टों और राज्य भाजपा-सबके लिए है।  
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