सपनों की रातें तो कई होती हैं। मगर भारत के ज्यादातर लोगों के लिए सपनों का शहर एक ही है, ‘मुंबई’। अपने गांव-कस्बों की हंसती-खेलती दुनिया छोड़कर हजारों की तादाद में लोग इस शहर में एक खास हंसी और खुशी की तलाश में आते हैं।
हर आने वाले की एक अलग कहानी होती है और आने के बाद एक और अलग कहानी बन जाती है। ऐसी ही कहानियों का आईना है वरिष्ठ कहानीकार सूरज प्रकाश का कथा संग्रह‘मर्द नहीं रोते’। इस संग्रह में सूरज की लिखी पहली कहानी ‘अल्बर्ट’ को भी शामिल किया गया है।
बेहद अलग शैली और सरल भाषा में लिखी यह कहानी पढ़कर ही इस कथाकार की लेखनी की झलक मिल जाती है। संग्रह में शामिल अन्य कहानियां ‘नेम प्लेट’, ‘खो जाते हैं घर’, ‘छोटे नवाब बड़े नवाब’, ‘मेरे हिस्से का घर’ और ‘मर्द नहीं रोते’ भी परत दर परत इस स्वप्न नगरी के कई पहलुओं से रू-ब-रू करवाती हैं।
मर्द नहीं रोते-सूरज प्रकाश
प्रकाशक-भारतीय ज्ञानपीठ
नई दिल्ली
मूल्य-१७० रुपये