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प्यार के हजार दुश्मन

Sun, 29 Sep 2013 05:20 PM IST
सहीराम
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लव तो रहना ही चाहिए जी, फिर जेहाद चाहे रहे न रहे। पर लगता है जी कि जेहाद ही रहेगा, लव के रहने का कोई चांस नजर नहीं आता। लगता है, वह दुनिया में बचेगा ही नहीं। उसके किस्से-कहानियां तो मिलेंगे। उसके गीत तो मिलेंगे। उसकी याद तो रहेगी। उसकी तड़प बनी रहेगी। पर वह नहीं रहेगा। जबकि जेहाद के खत्म होने का कोई चांस अभी तो नजर नहीं आ रहा। यह दिन दूनी और रात चौगुनी गति से फल-फूल रहा है। गरीब की गरीबी की तरह, बेरोजगारों की फौज ही तरह, बीमारियों-महामारियों की तरह, अमेरिका के तेल की भूख की तरह।
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फिर भी लव तो रहना ही चाहिए। जेहाद चाहे रहे, न रहे। पर लव कैसे रहेगा! धर्म उसके खिलाफ उठ खड़ा हुआ है। फिर चाहे वह तालिबान का धर्म हो या तालिबान बनने की तड़प पाले बैठे लोगों का धर्म। जातियां उसके खिलाफ उठ खड़ी हुई हैं। गोत्र उसके खिलाफ उठ खड़े हुए हैं। खाप पंचायतें उसके खिलाफ उठ खड़ी हुई हैं। गुंडे-बदमाश और विलेन टाइप के लोग तो पहले भी उसके खिलाफ थे, लेकिन अब तो लवर ही लव के खिलाफ हो गया। इश्क कमीना हो गया। अब तो आशिक माशूक से चक्कू की नोक पर लव मांग रहे हैं, कट्टा दिखाकर लव मांग रहे हैं, एमएमएस बनाकर लव मांग रहे हैं, फेसबुक पर अश्लीलता बिखेर कर लव मांग रहे हैं। मांगने से नहीं मिलता, तो चक्कू चल जाता है, कट्टा चल जाता है।

पुराने फिल्मी गानों में लव का एक ही दुश्मन होता था जमाना। पर जमाना बदला, तो लव के हजार दुश्मन पैदा हो गए। फिर भी लव तो रहना ही चाहिए। चाहे जेहाद रहे, न रहे। बताते हैं कि लव और जेहाद दो ध्रुव हैं। वे कभी मिलते नहीं। पर इधर लोगों ने जब से उन्हें मिलाकर लव जेहाद बनाया है, तब से लव के खिलाफ जेहाद और मारक हो गया है। आमतौर पर लव जिसके साथ मिलता है, उसे और बेहतर बना देता है। बंदे को खुदा बना देता है। पर जेहाद के साथ मिलकर तो इसने जेहाद को और घातक बना दिया है। अब तो वह दंगे करवा रहा है। लोगों को बेघरबार कर रहा है, इंसानों को मरवा रहा है। उसने धर्म के ठेकेदारों को हथियार मुहैया करा दिए हैं। उसने तालिबान बनने की तड़प रखनेवालों को विश्वास दिला दिया है कि अब वे पीछे नहीं रहेंगे। उन्हें पिछड़ने का अफसोस नहीं होगा। आपका जेहाद भी जीतेगा, उनका जेहाद भी जीतगा। नहीं रहेगा, तो बस लव ही नहीं रहेगा, जेहाद तो रहेगा।
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