कोई दो महीने पहले जब मैं चुनाव का हाल देखने लखनऊ गई थी, तो मेरे एक दोस्त ने कहा टुंडे कबाब खाने हों, तो पुरानी दुकान में जाना, नई वाली में नहीं। मेरा दोस्त लखनवी है, सो एक शाम मैं टुंडे कबाब की पुरानी दुकान ढूंढने निकली। कई गंदी नालियां पार कर मुझे अंदरूनी शहर की कई तंग गलियों से निकलना पड़ा। टुंडे कबाब की दुकान तक जब मैं पहुंची, तो उसका हाल देखकर कबाब खाने का मन नहीं हुआ । स्वच्छ भारत का असर न दुकान में दिखा और न ही दुकान के आसपास। मैं जानती हूं कि उत्तर प्रदेश में जहां भी बूचड़खाने हैं, वहां स्वच्छ भारत का सपना भी नहीं देखा जा सकता। मैं यह भी जानती हूं कि अनेक अवैध बूचड़खाने रिहायशी इलाकों में हैं, जहां लोग रोज परेशान होते हैं।
सो योगी आदित्यनाथ की मुहिम का मैं समर्थन करती हूं। तकलीफ मुझे है, तो सिर्फ इतनी कि उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री ने इस काम में संवेदनशीलता नहीं दिखाई। सो इस मुहिम से संदेश यही गया है कि योगी आदित्यनाथ के आने के बाद उत्तर प्रदेश के मुसलमानों को खबरदार होना पड़ेगा। बूचड़खाने अक्सर मुसलमान चलाते हैं। जो हिंदू इस कारोबार से जुड़े हुए हैं, वे अक्सर पिछड़ी जातियों से आते हैं। हम सब यह भी जानते हैं कि बेरोजगारी की समस्या सबसे ज्यादा पिछड़ी हिंदू जातियों और मुसलमानों में है। इसलिए मुख्यमंत्री योगी ने संवेदनशीलता से यह कदम उठाया होता, तो शायद उन्हें संभवतः आलोचना का सामना न करना पड़ता। वह पहले यह घोषणा करते कि अवैध बूचड़खाने बंद किए जाएंगे, सो जिनके पास लाइसेंस नही है, वे लाइसेंस हासिल करने की कोशिश में लग जाएं। वह यह भी घोषणा करते कि जहां जानवरों को बर्बरता से मारा जा रहा हो और जो लोग गंदगी फैलाने का काम कर रहे हों, उन्हें लाइसेंस नहीं मिलेगा। ऐसा करने के बदले उन्होंने पद संभालते ही पुलिस द्वारा बूचड़खाना बंद करने का जो काम करवाया, तो सारे राज्य में ऐसा भय फैल गया कि मछली और चिकन के कारोबारियों ने भी हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया।
अपने पूर्व के कई वक्तव्यों के कारण योगी आदित्यनाथ की छवि भी ऐसी बनी हुई है कि उनको मुसलमानों से दुश्मनी है, सो इस छवि को उनके इस काम ने और मजबूत किया है।
योगी ने जो दूसरी मुहिम चलाई, वह एंटी रोमियो दस्ते की है। यानी महिलाओं को सताने वालों के खिलाफ पुलिस अब सख्ती कर ही है। लेकिन पुलिस ने उन लड़के-लड़कियों को भी पकड़ना शुरू कर दिया, जो दोस्त थे और अपनी मर्जी से कहीं मिल रहे थे। लड़कियों से ऐसे सवाल किए महिला पुलिस ने, जैसे तालिबान के दौर में अफगानिस्तान मे किए जाते थे। महिला पुलिस को अपने काम पर इतना गर्व था कि टीवी कैमरों के सामने भी इस तरह के सवाल पूछे गए और कैमरे पर ही रोती हुई लड़कियों की तस्वीरें देश भर में दिखीं। योगी लव जेहाद आंदोलन से जुड़े रहे हैं। सो कहने का मतलब मेरा यह है कि उत्तर प्रदेश के नए मुख्यमंत्री ने स्वयं अपनी छवि बिगाड़ने का काम किया है यह भूलकर कि अगर उनका नाम भाजपा ने चुनाव से पहले घोषित किया होता, तो संभव है कि पार्टी को इतना शानदार बहुमत नहीं मिलता।
प्रदेश के लोगों ने परिवर्तन और विकास की आशा से मोदी के नाम पर वोट डाला था, योगी के नाम पर नहीं। ऐसा लगने लगा है कि योगी इस बात को बिल्कुल भूलकर आगे बढ़ रहे हैं। जिस तेजी से उन्होंने अपनी पहली दो मुहिम चलाई हैं, उस तेजी से विकास और परिवर्तन भी लाकर दिखाएं, तो बात बने।