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विरासत: हिंसक दौर में महात्मा के संदेशों से मिलेगी शक्ति, बनेगी शांति की राह

भारत डोगरा
Updated Mon, 02 Oct 2023 07:04 AM IST

सार

हम एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं, जब दुनिया और देश, दोनों स्तरों पर अमन-शांति की बहुत जरूरत है। विभिन्न धर्मों की आपसी सद्भावना और उस पर आधारित एकता की भी देश को बहुत जरूरत है। ऐसे समय में महात्मा गांधी के विचारों के प्रसार के एक प्रमुख केंद्र पर बुलडोजर कार्रवाई निश्चय ही अनुचित है।
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महात्मा गांधी - फोटो : facebook


हम एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं, जब दुनिया और देश, दोनों स्तरों पर अमन-शांति की बहुत जरूरत है। विभिन्न धर्मों की आपसी सद्भावना और उस पर आधारित एकता की भी देश को बहुत जरूरत है। ऐसे समय में महात्मा गांधी के विचारों के प्रसार के एक प्रमुख केंद्र पर बुलडोजर कार्रवाई निश्चय ही अनुचित है। आखिर 60 वर्षों से तो यह केंद्र उसी स्थान पर स्थित था और इसमें देश-विदेश के अति प्रतिष्ठित, अमन-शांति के लिए समर्पित लोग आते रहे हैं और अध्ययन व विमर्श करते रहे हैं। तो फिर अचानक उसके विरुद्ध बुलडोजर कार्रवाई क्यों की गई? गांधीवादी कार्यकर्ताओं और केंद्रों से बहुत से लोगों की उम्मीदें जुड़ी हैं और अन्याय, भेदभाव या शोषण से त्रस्त लोग वहां से न्याय की उम्मीद रखते हैं। ऐसे में, गांधीवादी विचारों के इस प्रमुख केंद्र के विरुद्ध ऐसी कार्रवाई निश्चय ही उनकी उम्मीदों को तोड़ने का कार्य करती है।


दूसरी ओर, इसमें कोई संदेह नहीं कि महात्मा गांधी की सोच के जो कुछ मूल सिद्धांत थे, उनका महत्व और बढ़ रहा है। अन्याय व शोषण के विरुद्ध अहिंसा और सत्य की राह पर चलते हुए व्यापक जन-भागीदारी से संघर्ष होना चाहिए, यह उनका जीवन-संदेश था, जिसे उन्होंने जीकर दिखाया। गांधी जी ने अहिंसा व अमन-शांति आधारित प्रयास जीवन-भर किए, जिनमें हर तरह के भेदभाव और संकीर्ण सोच को दूर करना बहुत जरूरी माना गया है। विभिन्न धर्मों का एक-दूसरे के प्रति सम्मान और इस पर आधारित एकता व सद्भावना को उनके विचारों में बहुत महत्व दिया गया। धर्म, जाति या ऐसी किसी पहचान के आधार पर कभी किसी व्यक्ति को किसी हिंसा व भेदभाव का शिकार न बनना पड़े, यह गांधी जी की सोच में सदा महत्वपूर्ण रहा। यह उनके लिए इतना महत्वपूर्ण था कि इसके लिए उन्होंने कई बार लंबे उपवास तक किए।


आज की चिंताजनक स्थितियों में हमें गांधी जी के मूल संदेशों और सिद्धांतों को याद रखना बहुत जरूरी है। यदि हम एक बेहतर देश व समाज बनाना चाहते हैं और हिंसा व युद्ध से त्रस्त दुनिया को नई राह दिखाना चाहते हैं, तो महात्मा गांधी के मूल संदेशों से ही सबसे अधिक बल मिलेगा। महात्मा गांधी की यह अहिंसक सोच विषमता को दूर करने से भी नजदीकी तौर पर जुड़ी है। बढ़ती विषमता और शोषण किसी समाज में व्याप्त हिंसा को ही बढ़ाते हैं। दूसरी ओर, समता और सादगी ऐसी बुनियाद हैं, जो समाज को टिकाऊ तौर पर अहिंसक बनाने में बहुत सहायक हैं। अहिंसा और न्याय इन दोनों के लिए गहरी प्रतिबद्धता की सोच हमें गांधी जी की सोच से मिलती है।


इसमें कोई संदेह नहीं कि वाराणसी में ‘सर्व सेवा संघ’ के परिसर पर बुलडोजर चलाने से गांधी जी के विचारों के प्रसार को भारी क्षति हुई है, पर गांधीवादी सोच के लोगों को इससे निराश नहीं होना है, अपितु इसे चुनौती मानकर महात्मा गांधी की मूल सोच को समाज में ले जाने के लिए अपने प्रयास और बढ़ाने चाहिए। ऐसे प्रयास, जो हर तरह के भेदभाव को समाप्त करते हैं, एकता बढ़ाते हैं व न्याय तथा अहिंसा की राह पर आगे बढ़ाते हैं। महत्वपूर्ण यह है कि कठिन परिस्थितियों में गांधी जी की मूल सोच को ही आगे ले जाया जाए, सुविधा के लिए उससे कोई छेड़छाड़ या खिलवाड़ न किया जाए। सद्भावना व एकता के मुद्दों पर कोई भेदभाव न होने देने व अहिंसा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर महात्मा गांधी के सिद्धांतों और सोच पर बने रहना बहुत जरूरी है। 

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