रिश्तों पर ध्यान दें
मनोचिकित्सक डॉ. रॉबर्ट वाल्डिंगर, जो खुशी पर लंबे समय से जारी अध्ययन की देखरेख करते हैं, का कहना है कि अगर आप लंबा और खुशहाल जीवन जीना चाहते हैं, तो अपने रिश्तों पर ध्यान दें। अध्ययन में पाया गया है कि मजबूत रिश्ते उम्र बढ़ने के साथ लोगों में खुशी फैलाने के सबसे बड़े कारकों में से एक है। डॉ. वाल्डिंगर ने कहा कि अपने परिचितों से बेहतर संबंध रखना कोई बहुत कठिन काम नहीं है।
वह करें, जो खुशी दे
मनोवैज्ञानिक केली मैकगोनिगल बचपन में सुधारात्मक शारीरिक शिक्षा की कक्षा में पढ़ती थीं। उन्होंने आनंदपूर्ण गतिविधियों के इर्द-गिर्द अपना कॅरिअर बनाया। वह बताती हैं कि व्यायाम हमें अधिक प्रेरित और आशावान महसूस करने में मदद कर सकता है, और यह ‘हमारे मस्तिष्क के रसायन विज्ञान को इस तरह से बदलता है, जिससे दूसरों से जुड़ना आसान हो जाता है।’ बस अपने शरीर को हिलाने के ऐसे तरीके खोजें, जो आनंददायक हों, बोझिल न हों। इसलिए इस पर विचार करें कि आपको कैसी गतिविधियां अच्छी लगती हैं। कुछ लोगों को दौड़ना चुनौतीपूर्ण लग सकता है, जो उस समय तो खराब लगता है, लेकिन बाद में मजबूती का एहसास करता है।
छोटे-छोटे क्षणों में खुशियां ढूंढें
बेस्टसेलर पुस्तक द बुक ऑफ अल्केमी की लेखिका सुलेका जौआद को बीस की उम्र में ल्यूकेमिया का पता चला था। पिछली गर्मियों में उन्हें फिर से बीमारी हुई, और कई लोगों ने सलाह दी कि हर दिन ऐसे जिएं, जैसे कि यह उनका आखिरी दिन हो। लेकिन हर बार ऐसा सुनकर उन्हें घबराहट होने लगती थी। उन्होंने कहा, ‘हर पारिवारिक डिनर को यथासंभव सार्थक बनाने की कोशिश करना थका देने वाला है, इसलिए मैंने ऐसा करना छोड़ दिया है। इसके बजाय, उन्होंने हर दिन को ऐसे जीने का विचार किया, जैसे कि यह जीवन का पहला दिन हो-जिज्ञासा, आश्चर्य और चंचलता की भावना के साथ।’ जौआद ने कहा, ‘ये हमेशा छोटे-छोटे क्षण होते हैं, जो खुशी देते हैं।’