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लीथल स्पाइस

Sun, 16 Nov 2014 07:29 PM IST
ओम गुप्ता
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एक आधुनिक उपन्यास है ‘लीथल स्पाइस' यानी जानलेवा मसाला। इसमें सब कुछ समकालीन है। अमीर और दबंग लोगों द्वारा बोली जाने वाली अंग्रेजी। चुटीले संवाद। सनसनीखेज कथानक। हिलाकर रख देने वाला क्लाइमेक्स। कुलीन वर्ग का परिवेश। पांच सितारा पकवान बनाने की प्रतिद्वंद्विता। रोंगटे खड़े कर देने वाला अपराध-मूलक रहस्य और रोमांच। कहानी शिमला की वादियों में बिखरी हुई है। इसकी नायिका है शिमला की पुलिस सुपरिंटेंडेंट निकी मारवाह और उनके निष्ठावान सहयोगी पुलिस अफसर।
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हर गढ़े हुए किस्से की खासियत होती है- एक घोषित लक्ष्य। यहां गुत्थी थी टेलीविजन दर्शकों में बेहद लोकप्रिय चेहरा-माला जोसफ। मसला था, उसके हत्यारे को ढूंढने का। उसकी हत्या खचाखच भरे हॉल में स्टेज पर हो जाती है। किसी पिस्तौल की गोली, पेन या चाकू से नहीं। बल्कि, एक ऐसे पकवान को चखने के कारण, जिसमें सायनाइड मिलाया गया। यह कैमिकल वैज्ञानिक जगत में सबसे खतरनाक माना जाता है। ऐसा सिद्ध हो चुका है कि इसे सूंघते ही प्राण-पखेरू उड़ जाते हैं।

पकवानों के इस मुकाबले में तीन निर्णायकों की टीम में सबसे ज्यादा नामी-गिरामी सदस्य थीं- माला। इस मुकाबले में छह सुप्रसिद्ध और सिद्धहस्त पाक-विशेषज्ञ भाग ले रहे थे। यह परिदृश्य शिमला के अक्तूबर महीने में गुलाबी ठंड का था। हवा में एक तरह की सिहरन थी। प्रतियोगिता आन और बान की थी। इसे 'हॉट शेफ' का टाइटल दिया गया था। प्रतियोगिता का पकवान दर्शकों के सामने बनना था। यह आयोजन शिमला के ऐतिहासिक गेटी थियेटर में हो रहा था। मसाले पीसे जा चुके थे। आग सुलग चुकी थी। चाक सान पर चढ़ाए जा चुके थे और तभी रायता डरावने ढंग से फैलने लगा।
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एसपी मारवाह के सामने पहेली पहाड़ बन चुकी थी। वह सबूतों और छिपे इरादों के मकड़जाल में कुछ रोशनी की किरणें तलाश कर रही थीं, जो उन्हें हत्यारे का सुराग बता सके। कुल मिलाकर यह हैरतअंगेज उपन्यास कसा हुआ था, चाक-चौबंद और मजेदार कशिश में लिपटा हुआ था। इसे लोकप्रिय उपन्यासकार स्वाति कौशल ने परवान चढ़ाया था। वे अपनी पिछली कृतियों 'पीस ऑफ केक' और 'ए गर्ल लाइक मी' की बदौलत अंग्रेजी साहित्य की दुनिया में खासा नाम कमा चुकी हैं।

इस उपन्यास में शामिल हर खंड से पहले सार्थक कहावतों का इस्तेमाल सूत्रधार की भूमिका अदा करता नजर आता है। नमूना पढ़िए - ‘ये चार कभी संतुष्ट नहीं होते, इनकी तसल्ली कभी नहीं हुई- भेड़िए का मुंह, पतंग की उड़ान, बंदर के हाथ और आदमी की आंखें। (-रूडयार्ड किपलिंग, जंगल बुक) 'लीथल स्पाइस' का सबसे उत्कृष्ट हिस्सा वह प्रत्यक्षदर्शी विवरण है जब गेटी थिएटर में पकवान प्रतियोगिता के दौरान यह अफवाह फैल गई कि वहां एक जहरीली गैस फैला दी गई है, जो मिनटों में किसी की भी जान ले सकती है। इससे पकवान आयोजन अस्त-व्यस्त हो गया। लोग घबराकर हॉल से बाहर भागे। कूदते-फांदते। गिरते-पड़ते। हांफते-कराहते।

फौरन पुलिस चीफ निकी मारवाह को खबर दी गई। वे सिर पर पांव रखकर दौड़ीं और पूरी स्थिति को अपने हाथ में लेकर शांति बहाल की। पहले माला जोसफ की मौत और फिर जहरीली गैस की अफवाह। ये दोनों घटनाएं आपस में जुड़ी हुई थीं। जाहिर है कोई तो था इन दोनों के पीछे, जो उस कंपीटिशन को तहस-नहस करना चाहता था। मारवाह को यह समझते देर नहीं लगी कि कहीं न कहीं, कोई है जिसका कोई घिनौना स्वार्थ इस षडयंत्र के पीछे काम कर रहा था। कोई खुराफाती दिमाग जो किसी से बदला लेना चाहता था। लेकिन सबसे अहम सवाल था कि माला ने किसी का क्या बिगाड़ा था। उसकी जान क्यों ली गई। किसी का पहला शक माला के पति पर गया, पर खोजबीन के बाद वह बेबुनियाद पाया गया। वह बेचारी तो धोखे से मारी गई।

वास्तव में वह साइनाइड गलती से उसके पकवान में मिला दिया गया। अंततः यह पूरा मामला दो ऐसे व्यापारियों की पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही अदावत का था, जिनके रेस्तरां देश भर में फैले हुए थे। उनके बाप-दादा कभी साथ काम करते थे। पर वक्त के थपेड़ों में वे अलग-थलग पड़ गए। उनके बच्चे बड़े हुए उसी धंधे में। एक बार फिर आमने-सामने। एक बार फिर खून के प्यासे, पर किसी मारवाह की चौकस निगाहों ने वक्त पर असली अपराधी को पकड़ लिया।
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(लेखक वरिष्ठ पत्रकार, मीडिया विश्लेषक और संस्कृतिकर्मी हैं।)
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