पिछले दिनों मैं नागपुर में थी। मुझे पक्षियों की खरीद-फरोख्त करने वाले एक गैरकानूनी बाजार के बारे में बताया गया था। एक रविवार की सुबह मैं वहां गई। मैंने वहां सैंकड़ों की संख्या में छोटे-छोटे पिंजरे देखे, जिनमें बंद बजरीगार (चहचहाने वाला छोटा पंछी) और कबूतर बेचे जा रहे थे।
पीपल फॉर एनिमल की टीम ने वहां आकर इन पंछियों को मुक्त कराया और उन्हें लेकर पुलिस स्टेशन पहुंची। पुलिस ने उनकी मदद की। यह वही पुलिस थी, जो हर सप्ताह लगने वाले इस बाजार को न जाने कितने समय से मूकदर्शक की तरह देखती रही थी।
वन विभाग के लोगों का रवैया इस मामले में वैसा ही था, जैसा हमेशा से होता आया है। कम पढ़े-लिखे और अक्सर स्वभाव से थोड़े शातिर वन विभाग के लोगों ने उन पंछियों को लेने से यह कहकर इनकार कर दिया कि वह पंछी विदेशी हैं। इससे यह तो जाहिर ही है कि उन्हें उस नियम की जानकारी ही नहीं है कि लवबर्ड्स या बजरीगार जैसे पंछियों की खरीद-फरोख्त करना गैरकानूनी है।
लवबर्ड्स और बजरीगार मूल रूप से ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका के पंछी हैं। पिछले कुछ समय से इन्हें कोलकाता में लाकर गैरकानूनी तरीके से प्रजनन करवाकर रेलवे के जरिए गुपचुप तरीके से पूरे देश में भेजा जाता है। ट्रेन में इन्हें कार्डबोर्ड बॉक्स में रखा जाता है, जिसमें हवा आने के लिए छोटे-छोटे छेद होते हैं। सफर के दौरान कई बार ऑक्सीजन की कमी के चलते कई पंछी मर जाते हैं।
लवबर्ड्स स्वभाव से काफी सामाजिक होते हैं। इन्हें भरपूर प्यार चाहिए। प्रकृति के बीच ये छोटे-छोटे समूहों में रहते हैं। ये जीवनभर एक साथी के लिए वफादार होते हैं। अलग होने पर उसकी याद में तड़पते हैं। प्रकृति के बीच रहने पर ये 15 साल तक जीवित रहते हैं, लेकिन पिंजरे में रखने पर ये 1-2 साल से ज्यादा जिंदा नहीं रहते।
लेकिन बेचने वाले और खरीदार दोनों में से किसी को भी इनसे जुड़ी यह बातें मालूम ही नहीं होतीं। जानकारी के ही अभाव में लोग अक्सर नर-मादा के बजाय एक लिंग वाले पंछी खरीद लेते हैं। ये आपस में न बात कर सकते हैं और न ही प्रजनन। अकेलेपन से ये जल्दी ही मर जाते हैं।
लवबर्ड का लिंग जानना भी काफी मुश्किल है। एक साल की होने पर मादा लवबर्ड पेपर फाड़ती है और नर लवबर्ड उल्टी करते हैं। यह भी सुनी-सुनाई बात है। लिंग जानने का निश्चित तरीका डीएनए टेस्ट ही है। पंछी बेचने वालों को इन चिड़ियों के बारे में जानकारी कम ही होती है और बेचने के लिए ये चिड़ियों के बारे में कुछ भी बता देते हैं।
इन्हें खरीदने वाले लोगों को तो कोई जानकारी होती ही नहीं है, वह उनके बारे में जानने की कोई कोशिश भी नहीं करते। उन्हें सिर्फ एक चहचहाने वाली सुंदर सी चिड़िया चाहिए होती है, जिससे उनके बच्चे खुश रहें, जब तक कि वह मर नहीं जाती। लवबर्ड्स शाकाहारी होती हैं।
बीज, अनाज और सूखे मेवों का मिश्रण जैसे बाजरा, जई, कुसुम, कच्चे चावल, ब्रेड,फल, दालें, सब्जी, मटर, बीन्स, गोभी की पत्तियां, सरसों के बीज उन्हें हर रोज मिलने चाहिए। लेकिन लवबर्ड्स पालने वाले अधिकतर लोग इस तरह का भोजन दे ही नहीं पाते। ज्यादातर लवबर्ड्स कुपोषण के कारण ही मर जाती हैं।
ऑस्ट्रेलिया के अपने प्राकृतिक आवास में रहने वाले बजरीगार या लवबर्ड्स ब्रीडिंग के बाद दिखने वाले बजरीगार से आकार में काफी छोटे होते हैं। उनके शरीर को ज्यादा मोटा और पंखों को ज्यादा बड़ा बनाने के लिए ही ब्रीडिंग की जाती है। इतने बड़े आकार को संभाल पाना उनके छोटे-छोटे पैरों के लिए काफी मुश्किल होता है।
इसी वजह से उनकी आंखें और चोंच कई बार पंखों से पूरी तरह ढंक जाती हैं। अपने प्राकृतिक आवास में वे 20 साल जीते हैं। पिंजरे में रखने पर यदि उन्हें समय से भोजन-पानी और बेहतर परिस्थितियां दी जाएं तो वे 2 से 4 साल तक जीवित रहते हैं।
अगर आप इन्हें खुला छोड़ देते हैं तो इन पंछियों को चील और दूसरे बड़े परभक्षी खा लेते हैं, इसलिए उन्हें कैद में जिंदगी बिताने की सजा दी जाती है। कृपा करके लवबर्ड्स या बजरीगार को न खरीदें और मुझे ऐसे बाजारों और दुकानों के बारे में बताएं जहां इन्हें बेचा जाता है।