साधो, उत्तर प्रदेश के खेतों में लैपटॉप उग रहे हैं। कृषि वैज्ञानिक परेशान हैं। वे समझ नहीं पा रहे कि लैपटॉप की यह पौध कहां से आई। किसान हैरान और हलकान! उनके खेतों को क्या हो गया है, जो उन्होंने अन्न की जगह लैपटॉप उगाना शुरू कर दिया है! वे अब रोटी कहां से खाएंगे? उनके बीवी-बच्चे सुबह-शाम अब क्या लैपटॉप भकोसेंगे? उदर तो अनाज से ही भरता है, लैपटॉप तो खाए-पिए-अघाए पेट की चीज हैं।
किसान सिर पर हाथ धरे सोच रहा है कि लैपटॉप हल-बैल की जगह इस्तेमाल हो पाता, तो कितना अच्छा होता। आगे-आगे लैपटॉप, पीछे उसमें जुता हल। क्या ऐसे लैपटॉप नहीं बनाए जा सकते, जिनसे खेत जोते जा सकें। वैज्ञानिकों को क्या पता था कि सरकारें ये लैपटॉप कभी किसानों के बेटों को मुफ्त में बांटेंगी।
लैपटॉप पाकर किसान बेटे का मन बल्लियों उछल रहा है। वह पढ़ाई छोड़कर लैपटॉप में उलझा है। अब वह खेतों और मेड़ों की तरफ नहीं देखता। देखने और निहारने के लिए अब उसके पास एक अदद लैपटॉप है। वह छप्पर में सो रहा है, तो उसके सिरहाने लैपटॉप रखा है। बाप उस डिब्बे को उठाकर आले में रख देता है। जगने पर बेटा बाप को डपटता है, तुम इसकी अहमियत नहीं जानते। ठेठ किसान ठहरे।
तुम इन हाथों से गोबर तो उठा सकते हो, लेकिन लैपटॉप नहीं चला सकते। तो क्या लैपटॉप रोटी देगा, बाप सवाल कर देता है। बेटा जवाब देता है, जब लैपटॉप है, तो रोटी की जरूरत क्या है। बाप की सांसों में रोटी का सौंधा स्वाद तैर जाता है। उसे अपने खेतों की मिट्टी और पकी फसल याद आती है।
वह लैपटॉपी बेटे के सामने रोटी की महिमा का बखान करना चाहता है, पर चुप मार जाता है। बेटा लैपटॉप पर करीना कपूर की तंदूरी मुर्गी देखने में व्यस्त है। अब उसे रोटी की क्या गरज! नॉनवेज के सामने रोटी को कौन पूछे। बाप हल उठाकर खेत पर जाने की तैयारी कर रहा है। पहले बेटा मदद कर देता था। अब वह बाप की तरफ पीठ करके बैठा है। सोचता है कि बाप खेत पर जाए, तो वह 'लुटेरा’ देखना शुरू करे।
लैपटॉप चलाकर तू क्या बनेगा, उस रोज बाप ने पूछ दिया। बेटा गरज कर बोला, लैपटॉप से मैं जिंदगी में टॉप करूंगा। यह सुनकर बाप ने एक पल लैपटॉप को निहारा और दूसरे ही क्षण बेटे की जिंदगी को, जो इन दिनों लैपटॉपमय हो गई है। बाप को क्या पता कि बेटा इन दिनों 'दिल बदतमीज’ होने की राह पर है।