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गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव का दांव

कुलदीप तलवार
Updated Sun, 24 May 2020 09:15 AM IST
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter

पाकिस्तान में बड़ी तेजी से फैल रहे कोरोना संक्रमण की संख्या 52,000 से भी ज्यादा हो गई है और मरने वालों की भी संख्या 1,100 से अधिक है। पाक सरकार इस महामारी को रोकने व अपने नागरिकों को बचाने के लिए बिल्कुल संजीदा दिखाई नहीं दे रही। इसके बजाय वह सर्वोच्च न्यायालय के हाल ही के फैसले के तहत गिलगित-बाल्टिस्तान में आम चुनाव कराकर कठपुतली अंतरिम सरकार कायम करने में जुट गई है, जहां पीएमएल (एन) पार्टी के प्रधानमंत्री हफीजुर रहमान फिलहाल सरकार का कामकाज देख रहे हैं। भारत ने इस फैसले पर कड़ा विरोध जताया है।



गिलगित-बाल्टिस्तान के राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने भी न्यायालय के इस फैसले को अवैध करार दिया है। इंस्टीट्यूट फॉर गिलगित-बाल्टिस्तान के अध्यक्ष ने इस फैसले को यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि यह अवैध फैसला है, क्योंकि यह पाकिस्तानी संविधान का हिस्सा नहीं है और पाक का इस पर नाजायज कब्जा है। इसलिए पाकिस्तान को मीरपुर, मुजफ्फराबाद और गिलगित-बाल्टिस्तान से तुरंत हट जाना चाहिए।


काबिल-ए-गौर है कि संयुक्त राष्ट्र ने 1947 में पाक से गिलगित-बाल्टिस्तान में स्थानीय सरकार कायम करने के लिए कहा था। साथ ही, यह भी कहा था कि वह इस क्षेत्र में भौगोलिक परिवर्तन नहीं करेगा, क्योंकि इस क्षेत्र में पाक सैनिकों की उपस्थिति संयुक्त राष्ट्र के आदेश का उल्लंघन करती है। पाक सरकार के नापाक इरादों को देखते हुए हाल ही में हमारे मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर के बाकी हिस्से, जैसे मुजफ्फराबाद और गिलगित-बाल्टिस्तान को अपने क्षेत्र की सूची में शामिल कर लिया है और इस क्षेत्र के मौसम की जानकारी भी देनी शुरू कर दी है। इससे पाक सरकार परेशान है। सच तो यह है कि मौसम विभाग का यह कदम पाक अधिकृत कश्मीर पर भारत के दावे को मजबूती भी प्रदान करता है।


सवाल यह है कि पाकिस्तान वहां चुनाव क्यों करा रहा है। दरअसल उस पर अपने घनिष्ठ मित्र चीन का दबाव है। गिलगित-बाल्टिस्तान का 634 किलोमीटर का हिस्सा चीन ने घेर रखा है और पाक-चीन आर्थिक गलियारा यहीं से होकर गुजरता है। चूंकि भारत इस हिस्से पर अपना दावा जताता है, इसलिए चीन किसी भी तरह के विवाद से बचना चाहता है। पाकिस्तान वहां आम चुनाव कराकर अपने हितों की पूर्ति के लिए इस क्षेत्र को वैधता प्रदान कराना चाहता है व चीन को हर कीमत पर खुश रखना चाहता है। वैसे भी यह इलाका पाकिस्तान और चीन के लिए सामरिक दृष्टि से काफी महत्वूपर्ण है।


उल्लेखनीय है कि 2017 में पाकिस्तान गिलगित-बाल्टिस्तान को अपना पांचवां प्रांत बनाना चाहता था। लेकिन उसे वहां की जनता के रोष के कारण सफलता नहीं मिली। इस बार भी स्थानीय जनता का कड़ा विरोध शुरू हो गया है। इस क्षेत्र के लोग पहले ही पाकिस्तान से तंग आए हुए हैं और उसके चंगुल से निकलना चाहते हैं। इस क्षेत्र की आबादी लगभग 30 लाख है और क्षेत्रफल 28,174 वर्ग किलोमीटर है। यहां मुख्यतया शिया, सुन्नी और नूराबक्शी मुसलमान रहते हैं। शियों की आबादी यहां सबसे ज्यादा है। जब भी शिया पाकिस्तान के शिकंजे में निकलने के लिए आंदोलन करते हैं, वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई सुन्नी मुसलमानों को उनके खिलाफ भड़काकर आंदोलन दबा देती है। शिया मुसलमानों को शिकायत है कि इस्लाम धर्म की पुस्तकों में जो सामग्री पढ़ने को दी जाती है, उनमें शिया उसूलों को नजरअंदाज कर दिया जाता है।


यहां के लोगों की एक शिकायत यह भी है कि इस क्षेत्र में पंजाबियों और पठानों को लाकर बसा दिया गया है, ताकि यहां के स्थानीय लोग अल्पसंख्यक हो जाएं। जबकि कानून के अनुसार इस क्षेत्र में कोई भी बाहरी व्यक्ति आकर बस नहीं सकता और न ही मकान-जायदाद वगैरह खरीद सकता है। इसके बावजूद पठानों, पंजाबियों और चीनियों ने स्थानीय व्यापार के अधिकांश भाग पर अपना नियंत्रण कर लिया है।


यहां पर चार-पांच हजार चीनी नागरिक आकर बस गए हैं। उन्होंने यहां के नागरिकों के लिए समस्याएं खड़ी कर दी हैं। कुछ अरसा पहले गिलगित-बाल्टिस्तान नेशनल कांग्रेस के एक नेता भारत आए थे और उन्होंने वहां के लोगों पर ढाए जा रहे जुल्म की दास्तान बयान की थी। उन्होंने बताया था कि इस क्षेत्र के लोगों को विभिन्न सुविधाओं से दूर रखा जाता है और शिक्षा का बुरा हाल है। जो विद्यार्थी अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं, उन्हें जेल में डाल दिया जाता है। अनुमान के अनुसार, यहां के 90 फीसदी लोग भारत के साथ रहना चाहते हैं।
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भारत की जनता भी मोदी सरकार से उम्मीद कर रही है कि वह पाक अधिकृत कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान को पाकिस्तान के कब्जे से छुड़ाने के लिए ठोस कदम उठाएगी। संसद में भी इस बारे में प्रस्ताव पारित हो चुके हैं। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाते समय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पाक अधिकृत कश्मीर और गिलगित-बाल्टिस्तान को भारत का हिस्सा बताते हुए वहां तिरंगा फहराने का संकल्प लिया था।


अब भारतीय मौसम विभाग की अधिकारिक वेबसाइट पर गिलगित-बाल्टिस्तान के मौसम का जिक्र करके भारत ने पाकिस्तान को सचेत कर दिया है कि वह इस कब्जाए हुए क्षेत्र को तुरंत मुक्त करे। जाहिर है, भारत को बदलते हालात का फायदा उठाना होगा और पाक अधिकृत कश्मीर व गिलगित-बाल्टिस्तान के सारे क्षेत्र को पाकिस्तान के चंगुल से निकालकर जम्मू-कश्मीर में शामिल कर अखंड भारत का सपना पूरा करना होगा। इसका समय अब आ गया है।

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