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कमला हैरिस के व्यक्तित्व में भारतीयता कितनी है? बता रहे हैं बलबीर पुंज

बलबीर पुंज
Updated Sat, 22 Aug 2020 05:23 AM IST
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कमला हैरिस (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

अमेरिकी उप-राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेटिक उम्मीदवार कमला हैरिस के 'भारतीय मूल' को लेकर भारतीय समाज और मीडिया का एक वर्ग उत्साहित है। ऐसे में यह जानना आवश्यक है कि कमला के व्यक्तित्व में भारतीयता कितनी है? इस प्रश्न का उत्तर कमला अमेरिकी जनगणना के समय पहले ही दे चुकी है। तब उन्होंने अपनी पहचान 'अफ्रीकी अमेरिकी' के रूप में दर्ज कराई थी।



स्पष्ट है कि वह अपनी मां से मिली भारतीय पहचान के प्रति उदासीन थीं। यही कारण है कि प्रत्याशी घोषित होने के बाद बहन माया हैरिस और अमेरिकी मीडिया ने कमला को इस पद के लिए 'पहली अश्वेत महिला' उम्मीदवार के रूप में प्रस्तुत किया।


कमला हैरिस के समर्थक उन्हें मानवाधिकार की रक्षक के रूप में प्रचारित कर रहे है। इन दावों में कितनी सच्चाई है? बतौर अधिवक्ता, चाहे वह सैन फ्रांसिस्को की जिला अटॉर्नी जनरल हों या फिर कैलिफोर्निया की अटॉर्नी जनरल, उन्होंने बाल यौन शोषण के कई मामले में पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने का प्रयास तो किया, किंतु जब इसकी लपटें कैथोलिक चर्च तक पहुंचीं, तब उन्होंने एक सच्चे ईसाई की भांति और चर्च के प्रति अपनी निष्ठा रखते हुए मामले को दबाने पर अधिक जोर दिया।


जब वर्ष 2004 में कमला हैरिस सैन फ्रांसिस्को की जिला अटॉर्नी जनरल बनीं, तब उन्होंने कैथोलिक चर्च के पादरी द्वारा यौन उत्पीड़न के शिकार लोगों को न्याय दिलाने के स्थान पर चर्च के साथ मिलकर पीड़ित और आरोपी पादरियों से जुड़े दस्तावेजों को अपने कब्जे में लिया। वह उनसे पहले जिला अटॉर्नी जनरल रहे टेरेंस हॉलिनन के नेतृत्व में तैयार किया गया था, जिसमें तत्कालीन स्थानीय पादरियों के एक दशक पुराने यौन दुराचारों का विवरण था।


इस दस्तावेज को सार्वजनिक किया जाना था, किंतु कमला उस पर कुंडली मारकर बैठ गईं। एक पादरी के यौन उत्पीड़न के शिकार जॉय पिशिटेली का कहना था, 'हॉलिनन के समय मामला तीव्र गति से आगे बढ़ रहा था, किंतु कमला हैरिस ने इसे बहुत पीछे धकेल दिया।' ऐसे ही, स्थानीय पादरी द्वारा 12 वर्ष की आयु में दुष्कर्म का शिकार हुए डॉमिनिक डी लुक्का का कहना था कि वह इस मामले में कमला हैरिस के  आचरण से स्तब्ध था।


यह विडंबना ही है कि पादरियों द्वारा अनैतिक यौनाचार के पीड़ितों के मानवाधिकारों पर सुविधाजनक चुप्पी साधने वाली कमला हैरिस एक नेता रूप में कश्मीर में चयनात्मक मानवाधिकारों की बात करती हैं। उनकी सहानुभूति उस वर्ग के प्रति अधिक है, जिसकी मानसिकता ने 1947 में भारत का रक्तरंजित विभाजन कर पाकिस्तान को जन्म दिया, फिर 1980-90 के दशक में पांच लाख कश्मीरी पंडितों को घाटी से पलायन और अपने ही देश में विस्थापितों की भांति जीवन-यापन के लिए मजबूर कर दिया।


हिटलर के शासन के बाद विश्व में सबसे अधिक मजहबी अत्याचार पाकिस्तान, बांग्लादेश और खंडित भारत के कश्मीर में हुआ है। यहां दशकों से हिंदू, सिख और बौद्ध अनुयायियों को उनकी उपासना पद्धति के कारण प्रताड़ित किया जा रहा है। किंतु तथाकथित मानवाधिकार रक्षक भारतवंशी कमला हैरिस के स्वर कश्मीर मामले पर पाकिस्तानी भाषा और  चिंतन से अधिक मेल खाते हैं। अनुच्छेद 370 के सांविधानिक क्षरण सहित कश्मीर में भारत सरकार की नीतियों का विरोध इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।
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अमेरिकी उप-राष्ट्रपति की प्रत्याशी बनने के बाद कमला हैरिस अपने भाषणों में गांधी जी का उल्लेख करते हुए सहिष्णुता, बहुलतावाद और विविधता जैसे मूल्यों पर बात कर रही हैं। सच तो यह है कि गांधी जी को ये सभी मूल्य वैदिक सूत्र 'एकं सद् विप्राः बहुधा वदंति' के दर्शन से प्राप्त हुए।


इसलिए उन्होंने जीवन भर मिशनरियों के भय, लालच और लोभ के बल मतांतरण करने का विरोध किया। गाय को भारतीय संस्कृति का प्रतीक माना, उसकी रक्षा हेतु कृत-संकल्पित रहे। यही नहीं, गांधी जी ने दलितों के साथ हुए घोर अन्यायों के परिमार्जन करने के साथ उन्हें हिंदू समाज का अभिन्न अंग माना। अब यदि कमला हैरिस वाकई गांधी जी का आदर करती हैं, तो उन्हें गांधी जी के गौरक्षा, मतांतरण और दलितों पर प्रकट विचारों का भी सम्मान करना चाहिए।


यह हास्यास्पद है कि कमला हैरिस ने चुनावी भाषण में अपनी भारतीय पहचान स्थापित करने हेतु दक्षिण भारत के प्रसिद्ध व्यंजन इडली का जिक्र किया। अब यदि आज के दौर में भोजन से राष्ट्रीय पहचान सुनिश्चित होती, तो असंख्य भारतीयों को, जो पिज्जा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज, पास्ता, स्पगैटी और चाउमीन आदि खाने का शौक रखते हैंै, इसी आधार पर अमेरिकी, इतावली, फ्रांसीसी या फिर चीनी संस्कृति का वाहक मान लिया जाना चाहिए।


सच तो यह है कि कमला हैरिस की कवायद विशुद्ध रूप से राजनीतिक है। उनकी दृष्टि अमेरिका में बसे लगभग 40 लाख भारतीय मूल के नागरिकों या भारतवंशियों, जिसमें से 44 प्रतिशत अर्थात 18 लाख वोट देने का अधिकार रखते है, पर है। भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मान्यताओं और मूल्यों से जुड़े होने के कारण हिंदू अमेरिका के सबसे संपन्न, समृद्ध और शिक्षित वर्ग में गिने जाते हैं। प्रति वर्ष एक लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक अर्जित करने वालों में जहां 44 प्रतिशत यहूदी हैं, वहीं हिंदुओं का अनुपात 36 प्रतिशत है। यही नहीं, 77 प्रतिशत से अधिक हिंदुओं के पास कॉलेज की डिग्रियां हैं।


कमला हैरिस की दिवंगत मां श्यामला गोपालन का जन्म औपनिवेशिक भारत में वर्ष 1938 में हुआ। उन्होंने 1958 से अमेरिका में बसने और अफ्रीकी ईसाई मूल के डोनाल्ड हैरिस से अल्पायु में विवाह के पश्चात अपने जीवन के शेष 51 वर्ष अमेरिका में बिताए। कैलिफोर्निया में जन्मी कमला का पालन-पोषण कैथोलिक चर्च के सान्निध्य में हुआ, इसलिए उन्हें अपनी भारतीय पहचान पर चुनाव से पहले गर्व नहीं हुआ। इस पृष्ठभूमि में उनका व्यक्तित्व कितना भारतीय या विशुद्ध अमेरिकी ईसाई है, इसका निर्णय पाठक स्वयं करेंगे। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार और राज्यसभा सांसद हैं।)

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