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कलापारखी वैज्ञानिक-के. राधाकृष्णन

Fri, 08 Nov 2013 08:28 PM IST
अभिषेक सक्सेना
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केरल के त्रिशूर जिले के एक छोटे से स्कूल में अपने सहपाठी इनोसेंट थेक्केथला के साथ, जो बाद में मलयालम फिल्मों का मशहूर स्टार बना, कला और संगीत पर बाल सुलभ चर्चा करने वाला सामान्य-सा बालक एक दिन भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम में सर्वाधिक महत्वाकांक्षी माने जाने वाले मंगल मिशन को यथार्थ के धरातल पर उतारेगा, यह किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा। लेकिन यह के. राधाकृष्णन की मेधा ही थी, जिसकी बदौलत उन्होंने केरल यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक होने से लेकर इसरो के अध्यक्ष और फिर देश के पहले मंगल मिशन की शुरुआत करने तक की यात्रा पूरी की। लेकिन इस राह में उन्हें आलोचनाओं से भी दो-चार होना पड़ा।
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यह कहा गया कि ‘मिसाइल मैन’ कलाम और ‘मून मैन’ जी. माधवन नायर के बाद यह ‘मार्स मैन’ बनने की राधाकृष्णन की महत्वाकांक्षा ही थी, जिस कारण भीतरी अंतरिक्ष अभियानों के लिए उपयुक्त समझे जाने वाले प्रक्षेपण यान जीएसएलवी के पूरी तरह तैयार न होने के बावजूद हड़बड़ी में पीएसएलवी के जरिये इस मंगल मिशन को अंजाम दिया गया। लेकिन राधाकृष्णन को निकट से जानने वाले जानते हैं कि जल्दबाजी उनके स्वभाव में नहीं है। वह एक परफेक्शनिस्ट हैं, जो कोई भी कदम उठाने से पहले दिमाग की पूरी कसरत करते हैं। उनके मातहत भी इसकी तस्दीक करते हैं कि अगर इतनी शीघ्रता नहीं दिखाई गई होती, तो शायद इस अभियान को कुछ वर्षों का इंतजार और करना पड़ता, जब मंगल फिर पृथ्वी के नजदीक आता। इसलिए राधाकृष्णन पर उंगली उठाना उनकी उस प्रतिबद्धता को कमतर करके देखना है, जिसके जरिये वह पूरी दुनिया को दिखाना चाहते हैं कि भारत अंतर्ग्रहीय अनुसंधानों के लिए कमर कस चुका है।

कम लोग जानते होंगे कि राधाकृष्णन कर्नाटक संगीत और कथकली नृत्य के शौकीन हैं। पढ़ाई के दौरान वह कई बार स्टेज पर अपनी गायन प्रतिभा का भी प्रदर्शन भी कर चुके हैं। वह स्वभाव से बेहद धार्मिक हैं। यही वजह है कि मंगलयान के प्रक्षेपण से पहले तिरुपति में भगवान वेंकटेश्वर के दरबार में मत्था टेकना वह नहीं भूले। युवा इंजीनियरों के प्रेरणास्रोत राधाकृष्णन अपने इस आचरण से बेशक कुछ लोगों की आलोचना का पात्र बन रहे हों, पर इससे यही पता चलता है कि विज्ञान धर्म का आलोचक नहीं होता।
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अभिषेक सक्सेना
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