योहान क्रुएफ की पिछले दिनों फेफड़े के कैंसर से मौत हो गई
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मेसी, रोनाल्डो, नेमार और सुआरेज के खेल को अचरज से निहारने वाली नई पीढ़ी योहान क्रुएफ को संभवतः न पहचानें, जिनकी पिछले दिनों फेफड़े के कैंसर से मौत हो गई। जबकि पिछले ही महीने एक अखबार में उन्होंने टिप्पणी की थी कि कैंसर के खिलाफ युद्ध में मैं 2-0 से आगे चल रहा हूं! योहान क्रुएफ का विश्व फुटबॉल में एक खिलाड़ी और कोच के तौर पर जितना योगदान है, वह प्लातिनी, पेले और मैराडोना से कतई कम नहीं है। बल्कि क्रुएफ अपने खेल में इन सभी से अलग थे। वह पहली बार विश्व फुटबॉल में टोटल फुटबॉल की अवधारणा के साथ आए, जिसमें कोई खिलाड़ी किसी भी पोजिशन पर खेल सकता है। अपने गोलकीपर के शॉट पर गेंद को अपने किसी साथी को बढ़ाते, फिर अगले ही कुछ मिनटों में विपक्षी गोलपोस्ट के ऐन सामने गोलकीपर को चकमा देकर गोल करने का कौशल सिर्फ क्रुएफ दिखा सकते थे। टोटल फुटबॉल ने विश्व फुटबॉल में हॉलैंड को एक ताकतवर देश के रूप में तो साबित किया ही, खासकर यूरोपीय फुटबॉल ने उत्साह के साथ इस शैली को अपनाया।
क्रुएफ ने बहुत आसानी से टोटल फुटबॉल को परिभाषित करते हुए कहा था, आक्रमण करने वाले रक्षात्मक ढंग से खेलें और रक्षात्मक खेलने वाले आक्रामक रणनीति अपनाएं-यानी बैक, फॉरवर्ड आदि की कोई जगह तय नहीं होगी। वह कहते थे-एक फुटबॉलर का काम एक ही जगह खड़े होकर गेंद के साथ कलाबाजी करना नहीं है; वह काम तो सर्कस का कोई कलाकार भी कर सकता है। कुल नब्बे मिनट में आपके पैर में गेंद बमुश्किल तीन मिनट आती है। बाकी सत्तासी मिनट आप मैदान में क्या करते हैं, यही असल फुटबॉल है। क्रुएफ के टोटल फुटबॉल में स्पेस का सबसे अधिक महत्व है। वह उन दो खिलाड़ियों के बीच भी किक मारने की जगह बना लेते थे, जहां खेलना किसी बड़े फुटबॉलर के लिए भी अकल्पनीय होता था।
टोटल फुटबॉल के आविष्कार के करीब चार-पांच दशक बाद इसके सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के रूप में सिर्फ और सिर्फ क्रुएफ का ही नाम आता है। इसकी एक वजह फुटबॉल खेलने की उनकी शैली थी। पेले और गरिंचा, मैराडना और मेसी महानतम फुटबॉलर हैं। लेकिन अकल्पनीय ऐंगल से गोल करने, अपने शरीर को किसी सधे हुए जिमनास्ट की तरह लचकाने और मरोड़ने, कभी एक पैर से आधे मैदान तक गेंद को ले जाने, तो कभी गले तक ऊंची कराटे किक मारने वाले क्रूएफ दूसरे ग्रह से आया हुआ कोई प्राणी लगते थे। अचानक 180 डिग्री टर्न लेने की उनकी क्षमता से ही फुटबॉल के शब्दकोश में 'क्रुएफ टर्न' जैसी शब्दावली आई! वह फुटबॉल के पाइथोगोरस थे, जिनके दिमाग में फुटबॉल मैदान की समूची ज्यामिति होती थी, तो कभी फुटबॉल के मैदान में वह ऐसे जादूगर की तरह मालूम होते थे, जिन पर गुरुत्वाकर्षण का नियम काम नहीं करता था।
1974 के फुटबॉल विश्व कप में दुनिया ने क्रुएफ का जादू देखा था, जब स्वीडन के खिलाफ लीग मैच में उन्होंने विपक्षी डिफेंडरों को छकाते हुए अपने टर्न का जादू दिखाया था। फाइनल में तत्कालीन पश्चिम जर्मनी के खिलाफ खेलते हुए हॉलैंड ने पहला गोल तब किया था, जब विपक्षी टीम गेंद को छू भी नहीं पाई थी! इसके बावजूद क्रुएफ के हॉलैंड ने वह फाइनल 2-1 से हारा था। अर्जेंटीना में आयोजित अगले विश्व कप में क्रुएफ फिट न होने के कारण नहीं गए थे। लेकिन फुटबॉल के जानकारों का मानना है कि अजेंर्टीना में डच टीम को क्रुएफ का साथ मिलता, तो शायद वह विश्व कप जीत सकती थी। डच टीम के अलावा बर्सिलोना में क्रुएफ ने वर्षों तक अपने खेल का जादू बिखेरा। विशेषज्ञ उन्हें बर्सिलोना का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी आंकते हैं। एक कोच के तौर पर वर्षों तक उन्होंने खिलाड़ियों को फुटबॉल खेलना सिखाया। कोच के रूप में उन्होंने जो सफलता हासिल की, उसकी तुलना बाद के दिनों में सिर्फ बैकनबाउर से की जा सकती है। मौजूदा खिलाड़ियों में सिर्फ मेसी के खेल की तुलना कुछ-कुछ क्रुएफ से की जा सकती है। अजीब संयोग है कि क्रुएफ की तरह मेसी भी अपने मुल्क के लिए अब तक विश्व कप नहीं जीत पाए हैं।