नीतीश जी ने यहां चैन छपरा, लाला टोला में जेपी मेमोरियल हॉल, लाइब्रेरी आदि बनाने की घोषणा की। छपरा डीएम को पांच एकड़ जमीन अधिग्रहण को कहा। 2013-14 में पांच एकड़ तीन डिसमिल जमीन का अधिग्रहण हुआ। बड़ी लाइब्रेरी बनाने एवं जेपी की प्रतिमा लगाने की घोषणा हुई। वर्मा जी के घर को भी जेपी स्मृति से जोड़ने का प्रयास उसी समय हुआ। उस वक्त कहीं चर्चा नहीं थी कि जेपी का जन्म यहां हुआ है ? 2014 में राज्यसभा जाना हुआ। इसी जगह एक बड़ा समारोह हम सबने आयोजित किया। नीतीश जी आये। इस दौरान खवासपुर (सिताबदियारा का एक क्षेत्र, आरा जिला में, गंगा किनारे स्थित) के मुखिया समेत सैकड़ों लोग महुली घाट (गंगा) पर पीपा पुल की मांग के साथ आए। नीतीश जी ने तत्काल वहीं पीपा पुल बनाने की घोषणा कर दी। गांव में सड़क संपर्क को बेहतर करने का आदेश दिया। 2011 में बिजली भी आ गयी।
2015 जून में केंद्र सरकार ने भी यहीं जेपी म्यूजियम कॉम्पलेक्स बनवाने की घोषणा की। हमारे लिए जेपी के नाम पर बन रही इन संस्थाओं से प्रसन्नता थी कि जेपी की स्मृति-योगदान को देश सराह रहा है। पर समय क्रम में अब कुछ लोग जेपी के जन्मस्थान को लेकर गलत विवाद पैदा कर रहे हैं। ऐसे गलत तथ्य, जेपी के प्रति घोर अनादर है। इतिहास से छल है। जेपी जैसे महापुरुष की स्मृति के साथ अन्याय है।
सार्वजनिक कोष या जन सहयोग से बने इन जेपी केंद्रों पर क्या होना चाहिए ? जो गांव-समाज- देश के विकास के अनुरूप हों। उपयोगी हों। इन केंद्रों या ट्रस्टों से जुड़े सभी पक्षों को एक साथ बैठना चाहिए। निजी अहं, आग्रह व दुराग्रह छोड़कर।
जब 48 घंटे में बदला अस्पताल का नाम
उप्र में योगी आदित्यनाथ जी मुख्यमंत्री बने, तो सबसे उल्लेखनीय काम प्रभावती जी के नाम पर 102 बेड के अस्पताल का निर्माण हुआ। यहां दो कमरे का अस्पताल बनवाया था। लोगों से चंदा लेकर। जेपी के नाम पर एक स्कूल भी। विनोबा जी ने नींव रखी थी। प्रभावती जी नहीं रहीं, तो जेपी ने द्वाबा के तत्कालीन विधायक मैनेजर सिंह (जहां जेपी का घर है) को पत्र लिखा (1973) कि इस दो कमरे के अस्पताल में एक कमरे का नाम प्रभावती जी पर हो सकता है क्या? प्रभावती जी, गांधीवादी थीं। आजादी की लड़ाई में उनका बड़ा योगदान रहा। गांधी जी उन्हें अपनी पुत्री मानते थे। उत्तर प्रदेश की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने यह प्रस्ताव नहीं माना।
4 वर्ष पहले मुख्यमंत्री योगी को जेपी का यह पत्र दिया। 48 घंटे के अंदर नाम बदला। एक माह बाद ही खुद पहल कर योगी जी इस गांव आये। बड़ा अस्पताल बनाने की नींव रखी। आज सिताबदियारा का यह अस्पताल 100 बेड से अधिक का है। गांव वालों ने कहा एक बंगाली संत ने इसकी नींव रखी, उनका नाम भी रहना चाहिए। योगी जी ने तत्काल उनकी मूर्ति-विवरण लगाने का भी आदेश दिया। योगी जी आये, तो इस अंचल के लिए लगभग 3500 करोड़ से अधिक की योजनाओं का सौगात भी लाये और 2014 के बाद केंद्र सरकार की पहल पर इस क्षेत्र में आवागमन क्रांति की बुनियाद पड़ी।
ट्रस्ट की जायदाद महत्वपूर्ण, जेपी नेपथ्य में
जयप्रकाश जी का पहला सबसे पुराना ट्रस्ट है चंद्रशेखर का बनवाया, खुद जेपी के पिताजी ने यहां अपना बसेरा बनाया था, यह पहले 'डेरा' था, अपने पिताजी द्वारा बनवाये पुराने घर की स्थिति खराब हुई, तो जेपी ने इसकी पुनः मरम्मत करवाई। इसी पुराने घर को जेपी ने जगदीश बाबू को कह कर 1952 में बनवाया। चंद्रशेखर के कहने पर, जेपी के अनन्य सहयोगी जगदीश बाबू ने जेपी के इसी घर को ट्रस्ट बनाने में जीवन लगाया। इस ट्रस्ट में जेपी के घरवाले हैं। जेपी से जुड़ी पुरानी चीजें, कपड़े, फर्नीचर वगैरह सब यहीं हैं, पर यह न पुराने स्वरूप में है, न वह गरिमा है। ट्रस्ट की जायदाद यहां महत्वपूर्ण है, जेपी नेपथ्य में हैं। यह जेपी के संदर्भ में असक्रियता का केंद्र बन रहा।
दूसरा केंद्र 2010 फरवरी की गांव यात्रा के बाद नीतीश कुमार ने सिताबदियारा (बिहार) क्षेत्र में जेपी स्मृति स्मारक बनवाया चैन छपरा में, लगभग पांच एकड़ जमीन पर, यहां लाइब्रेरी, हॉल वगैरह बने, जो टोला, बिहार क्षेत्र में पुनः बसा, वहीं पास में यह बना। नीतीश जी का मकसद था कि जेपी को नयी पीढ़ी जाने-पढ़े, सीखे व अपनाये। लाइब्रेरी बनवाई गई। साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना कदमकुंआ स्थित जेपी घर को सुंदर कराया, यहां प्रभावती जी की स्मृति है।
तीसरा केंद्र लाला टोला (बिहार) में कमला चरण वर्मा ने नीतीश जी के गांव आने पर अपना घर जेपी स्मृति के लिए दिया। 2010 में। वहां भी जेपी याद किये जाते हैं। याद रखें यह सब 2010 के बाद हुआ। आज इस जगह को जेपी से जुड़ा बताया जाता है। कुछ पुरानी चीजें रखकर कहा जाता है कि ये जेपी से जुड़ी पुरानी स्मृति स्मृतियां हैं। यह सरासर गलत व भ्रामक है। इसका एक पक्ष अच्छा है। जेपी की स्मृति में कोई अपना घर देकर, उसे विकसित करे, तो इसका स्वागत होना चाहिए। उनका कद ऐसा था। पर इतिहास व तथ्यों को इरादतन गलत बनाने का प्रयास, देश समाज और भावी पीढ़ियों के साथ पाप है।
चौथा केंद्र है, केंद्र सरकार द्वारा विकसित जेपी स्मारक, यहां पिछले कुछेक वर्षों (2015 में बना) से जेपी जन्मदिन पर याद किये जाते हैं। यहां गृह मंत्री अमित शाह जी आ चुके हैं। देश के उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन जी भी हो आये हैं। कई अन्य गणमान्य लोग भी। हमारी समझ में केंद्र सरकार द्वारा बनवाये गए इस ट्रस्ट का मकसद है, जेपी के विचारों या रचनात्मक कामों के जीवंत केंद्र के रूप में यह विकसित हो। जेपी के आदशों के प्रति केंद्र सरकार के आदर की देन है, यह नयी जेपी संस्था। यह स्पष्ट है कि यह न जेपी का जन्म स्थान है, न जेपी से जुड़ी यहां कोई स्मृति है।