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यह तो ईश्वर के अधिकार में दखल है

Mon, 04 Jan 2016 07:40 PM IST
काका कालेलकर
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गांधी जी उन दिनों दक्षिण अफ्रीका में थे। दुबले-पतले बापू में बाहरी तौर पर कोई आकर्षण नहीं था। पर उनके विश्वासों और जीवन पद्धति से कई लोग प्रभावित थे। एक अंग्रेज अधिकारी कैनल बैक उनके पास आए, तो उनके व्यक्तित्व से काफी प्रभावित हुए। दोनों में अच्छी मित्रता हो गई और निकटता इतनी बढ़ी कि साथ रहने लगे। गांधी जी की कुछ बातें लोगों को अप्रिय भी लगती थीं। कई लोग उन्हें नुकसान पहुंचाने की योजना भी बनाने लगे।
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कैनल बैक को लगा कि ऐसे लोग कभी गांधी जी पर हमला कर सकते हैं। उन्होंने उनकी हिफाजत के लिए रिवाल्वर की व्यवस्था कर ली। गांधीजी जी के साथ कैनल बैक को जब कहीं जाना होता, तो वह अपने कोट की जेब में रिवाल्वर छिपाकर ले जाते। गांधी जी को इसकी जानकारी नहीं थी। कैनल बैक मित्र की भूमिका निभा रहे थे।

एक दिन अचानक गांधी जी की दृष्टि कैनल बैक के कोट पर पड़ी, जिसकी जेब भारी थी और वजन के कारण एक ओर लटक गई थी। उन्होंने जेब में हाथ डाला, तो रिवाल्वर! उन्होंने पूछा, यह रिवाल्वर आप अपनी जेब में क्यों रखते हैं?
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उन्होंने संकोच करते हुए कहा, कुछ नहीं, बस ऐसे ही।

गांधी जी ने हंसते हुए कहा, रस्किन और टॉलस्टॉय की पुस्तकों का अध्ययन तो मैंने भी किया है, क्या उसमें कहीं लिखा है कि अकारण रिवाल्वर जेब में रखा जाए। कैनल ने कहा, मुझे पता चला है कि कुछ लोग आप पर हमला कर सकते हैं, इसलिए। गांधी जी बोले, अच्छा! तो आप मेरी रक्षा करना चाहते हैं। मेरी रक्षा का दायित्व अब तक ईश्वर के हाथ में था और अब आप उसे अपने हाथों में ले रहे हैं। आपने ईश्वर के अधिकार को भी छीन लिया। यह सुन कैनल बैक ने रिवाल्वर फेंक दिया।
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