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सुपर वायरस का खतरा तो नहीं

सृजनपाल सिंह Published by: Raman Singh Updated Sun, 23 Feb 2020 06:31 PM IST
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सृजनपाल सिंह - फोटो : a

मानवता को खतरा परमाणु बम या मिसाइल से नहीं, वायरस से है। पिछली शताब्दी का सबसे खतरनाक वायरस स्पेनिश फ्लू था। 1918 में पृथ्वी पर हर तीसरा व्यक्ति इस वायरस से ग्रस्त था और एक साल में उसने पांच से दस करोड़ लोगों की जान ली थी। इस समय कोरोना वायरस का दुनिया भर में खौफ है। इससे अब तक करीब 2,200 जानें जा चुकी हैं। अब इस वायरस का फैलाव तेजी से दूसरे देशों में हो रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी देते हुए कहा है कि कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने की संभावनाएं कम होती जा रही हैं। इसीलिए उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तेजी से कदम उठाने का आह्वान किया है, जिनमें वित्तपोषण भी शामिल है। कोरोना के एक घातक सुपर वायरस बनने की आशंका भी जताई जा रही है। जंगली पशु-पक्षियों में करीब 16 लाख भिन्न प्रकार के वायरस हैं, जिनमें से हम मात्र 3,000 के बारे में जानते हैं। यानी 99.8 प्रतिशत वायरसों के बारे में हमारी जानकारी नगण्य है। इनमें से कोई भी सुपर वायरस बन सकता है।



स्वाइन फ्लू का वायरस किसी पक्षी के इनफ्लुएंजा वायरस और मानव इनफ्लुएंजा वायरस के मिलने से बना था। दोनों वायरस पक्षी और मानव, दोनों के संपर्क में आने वाले किसी सूअर के अंदर एक साथ पहुंचे और मिल गए। फिर यह नया वायरस मानव शरीर में पहुंचा। चूंकि हमारे शरीर की इम्युनिटी इस नए वायरस का मुकाबला करने के लिए सक्षम नहीं थी। ऐसे में, एक से दूसरे मनुष्य को संक्रमित करते हुए इस वायरस ने 2009 में दो लाख लोगों की जान ले ली।


किसी वायरस के सुपर वायरस बनने के लिए तीन चीजें जरूरी हैं, म्यूटेशन यानी उत्परिवर्तन। इसका एक हिस्सा किसी अनजान जंगल में पनपने वाले वायरस का हो और दूसरा हिस्सा मानव को संक्रमित करने वाले किसी साधारण वायरस का। ऐसा करने से वह हमारे इम्युनिटी तंत्र को निष्क्रिय कर सकता है। दूसरी चीज है संक्रमण क्षमता। यदि सुपर वायरस ऐसी जगह मौजूद हो, जहां भारी संख्या में लोग इकट्ठा होते हैं और लंबी यात्राएं करते हैं, तो वायरस के फैलने की आशंका काफी बढ़ जाती है। और तीसरी चीज है, दवाओं की प्रतिरोधक क्षमता बना लेना। कोई वायरस दवाओं का प्रतिरोध बना ले, तो इलाज के लिए नई दवा ईजाद करनी होगी। इसमें लंबा समय लगता है और वायरस को फैलने का अवसर मिल जाता है।


सुपर वायरस से निपटने के लिए एक बहुआयामी स्वास्थ्य प्रणाली और प्रोटोकॉल तैयार रखना होगा, जिसके तहत तेजी से किसी बीमारी के स्कैन करने के यंत्र, अस्पतालों में मरीजों को अलग रखने की क्षमता, किसी भी संक्रमण के बारे में तेजी से जानकारी साझा करना और जनता को जागरूक करना आदि शामिल हैं। मांस-मछली बाजारों पर कड़ी नजर रखने और जंगली जानवरों का मांस बेचने पर प्रतिबंध जरूरी है। ग्लोबल वॉर्मिंग से करोड़ों वर्ष पुरानी बर्फ पिघल रही है। ऐसे में, लंबे समय से दबे हुए वायरसों के सक्रिय होने की आशंका है। जंगलों की कटाई और खनिजों के दोहन के दौरान जंगली जानवरों के संपर्क में आने के कारण मनुष्य में संक्रमण की आशंका बढ़ रही है।


बिल गेट्स ने दो साल पहले सुपर वायरस के असर का एक कंप्यूटर मॉडल तैयार किया था। उनके मुताबिक, एक सुपर वायरस छह महीने में तीन करोड़ जान ले सकता है और अधिकतर देश इसे नियंत्रित करने में सक्षम नहीं होंगे। कोरोना वायरस ऐसे ही एक सुपर वायरस के आने का संकेत भी हो सकता है। मानवता को ऐसी किसी भी चुनौती से निपटने के लिए तैयार रहना होगा।

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