घर में काम करने वाली एक लड़की को प्रेम निवेदन ठुकराने के कारण सरेआम इतनी बार चाकू मारे गए कि वह मर गई। दूसरी को लोगों की भीड़ के बीच सड़क किनारे बाईस बार कैंची घोंपी गई और उसने दम तोड़ दिया। तीसरी को गोली मारी गई, मगर गले के लॉकेट ने उसे बचा लिया, और चौथी को तीसरी मंजिल से फेंक दिया गया। ये चारों घटनाएं दिल्ली में दो दिन के भीतर घटीं। पूरे देश में ऐसी और भी कई घटनाएं हुई होंगी, जो हम तक नहीं पहुंचीं।
इन घटनाओं को उन लड़कों ने अंजाम दिया, जिनके प्रेम निवेदन या शादी के प्रस्ताव को इन लड़कियों ने ठुकरा दिया था। कोई लड़की किसी के प्रेम को ठुकरा सकती है, यह आज के दौर में भी लोगों को मंजूर नहीं। यह लगभग राजशाही का मामला है, जहां किसी लड़की, यहां तक कि किसी विवाहिता पर भी नजर पड़ गई और पसंद आ गई, तो समझिए कि वह राजा की हो गई। उसे हर हाल में हासिल करना है। उसके लिए कितने भी युद्ध, खून-खराबा, मारपीट और हिंसा जायज है। यह एक ऐसी सामंती मनोवृत्ति है, जो किसी लड़की के न कहने को अपने अहंकार पर चोट मानती है। किसी लड़की की यह मजाल कि वह जबर्दस्ती के किसी आशिक के प्रस्ताव को ठुकरा दे! अब यह आशिक चाहे विवाहित हो, चार बच्चों का बाप हो, वह इस नकार का बदला लेकर ही रहेगा। तेजाब फेंकेगा, लांछन लगाएगा, बदनाम करेगा, लड़की के झूठे-सच्चे वीडियो अपलोड कर देगा और हो सका, तो जान से भी मार देगा। तूने मेरी बात नहीं मानी, तो तुझे जिंदा रहने का अधिकार भी नहीं। मर्दों का यह अहंकार जैसे उनके जीन में है। जिन वैज्ञानिकों ने मनुष्य के पूरे जीनोम का नक्शा तैयार किया है, क्या वे उस जीन को ठीक कर सकते हैं, जो लड़कियों से मामूली बातों पर भी बदला लेने के लिए प्रेरित करता है?
आज ये घटनाएं जल्दी प्रकाश में आ जाती हैं। हिंदी भाषी क्षेत्रों में तो हंसने वाली लड़की को बहुत अपमानजनक ढंग से परिभाषित किया जाता रहा है। आंख मारना, रास्ते चलते छेड़ना, दुपट्टा खींचकर भाग जाना, सीटी बजाना, फब्ती कसना, यारों-दोस्तों को प्रेमपत्र पढ़वाकर लड़की के घर या स्कूल में भेजना, उसके खिलाफ मनगढ़ंत पर्चे छपवाना, उसकी कथित चरित्रहीनता के मनचाहे किस्से गढ़ना, लोगों का प्यारा शगल रहा है। और लड़की के बारे में सबसे बदनाम आदमी भी अगर कुछ खराब बात कह रहा है, तो अक्सर उसे सच माना जाता रहा है।
जो लड़कियां दो दिन के भीतर मारी गईं, हत्यारे उनका काफी समय से पीछा कर रहे थे। लड़कियों ने अपने परिजनों और पुलिस से शिकायत भी की थी। जब नए दुष्कर्म कानून के तहत किसी का पीछा करना दंडनीय अपराध है, तब भी इन लड़कियों की सुनवाई कहीं नहीं हुई। हत्याओं के इन सनसनीखेज मामलों में क्या होगा, नहीं कहा जा सकता, पर अपराधी हमारे यहां की लचर कानूनी प्रक्रिया का नाजायज फायदा उठाते हैं। इन सिरफिरे प्रेमियों को समझना होगा कि लड़कियां उनकी जागीर नहीं हैं कि जिन पर वे अपनी गंदी नजर डाल दें, वे बस उनकी तरफ खिंची चली आएंगी। लड़कियों की न इन सिरफिरे अपराधियों के हजार चाकुओं पर भारी है।