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विडंबना: स्वच्छता का सम्मान, पानी से मौत का अपमान

अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Fri, 02 Jan 2026 07:40 AM IST

सार

देश के सबसे स्वच्छ शहर के सम्मान से सम्मानित इंदौर में दूषित पानी से मौत की घटनाएं एक बड़ी विडंबना है। यह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं थी, बल्कि यह तो प्रशासनिक लापरवाही और बुनियादी सुविधाओं की घोर उपेक्षा का नतीजा है। 
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पानी से मौत का अपमान - फोटो : अमर उजाला


दरअसल, यहां नर्मदा नदी से आने वाली मुख्य जल आपूर्ति पाइपलाइन में लीकेज हो गया, जिसके ऊपर एक सार्वजनिक शौचालय बना हुआ था। इससे सीवेज का पानी सीधे पीने के पानी में मिल गया और नतीजा सामने है। दस से अधिक लोग मर चुके हैं और डेढ़ सौ से भी अधिक लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। शासन-प्रशासन को मृतकों की संख्या पर उलझे हुए देखना अफसोसनाक तो है ही, एक छह महीने के मासूम का इस त्रासदी का शिकार बनना और भी दुर्भाग्यपूर्ण है। यह उस शहर का हाल है, जिसे स्मार्ट सिटी बनाने में करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। 


यही नहीं, अमृत-1 और अमृत-2 जैसी योजनाओं में स्वच्छ पानी की व्यवस्थाओं में सुधार पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बावजूद अगर पेयजल की यह स्थिति है, तो इसका अर्थ ही है कि पैसे का खर्च केवल कागजों पर ही सीमित है। अगर स्थानीय शासन शिकायतों पर समय से ध्यान देता, तो पहले ही प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों से तत्काल साफ पानी की आपूर्ति, पानी उबालने की सार्वजनिक सलाह और क्लोरीनेशन जैसे कदम उठाए जा सकते थे। 


बात सिर्फ इंदौर की नहीं है। दरअसल, तेजी से बढ़ते शहरों में बुनियादी ढांचा जनसंख्या में हो रही वृद्धि के अनुरूप नहीं बढ़ पाया है। पुराने पाइप, अपर्याप्त शोधन क्षमता और रख-रखाव की कमी शहरों को स्वास्थ्य आपदाओं के मुहाने पर ले जाती है। ऐसे में, स्वच्छता रैंकिंग और स्मार्ट सिटी के दावे तभी सार्थक होंगे, जब नागरिकों को सुरक्षित पानी जैसी बुनियादी सुविधा हर दिन, हर जगह पूरे भरोसे के साथ मिले। जांच समिति के गठन और रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई करने के आश्वासन का दस्तूर बन गया है, लेकिन अगर ऐसे संकटों को ईमानदार सुधारों का अवसर नहीं बनाया गया, तो यह हादसा भी फाइलों में दर्ज एक और दुखद अध्याय बनकर रह जाएगा और शहर किसी अगली आपदा की ओर बढ़ते रहेंगे।
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