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विश्लेषण: उत्तर और दक्षिण भारत का अंतराल, मानव विकास में निवेश एक प्रमुख कारक

पत्रलेखा चटर्जी
Updated Tue, 16 May 2023 07:46 AM IST

सार

यह स्पष्ट है कि औसतन दक्षिणी भारतीय राज्य स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक अवसरों के मामले में देश के बाकी हिस्सों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। एक प्रमुख कारक मानव विकास में निवेश है, जो किसी भी समाज की आधारशिला बनाता है। मानव विकास में निवेश प्रतिस्पर्धा के इस युग में पहले से कहीं ज्यादा मायने रखता है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : istock


साढ़े छह करोड़ से अधिक लोगों के घर और भारत के प्रसिद्ध टेक्नोलॉजी केंद्र कर्नाटक में भाजपा की हार के कारणों के बारे में काफी कुछ पहले ही लिखा और बोला जा चुका है। और आने वाले दिनों में और भी काफी कुछ लिखे-बोले जाएंगे। कई टिप्पणीकारों ने स्थानीय मुद्दों को भाजपा की हार का प्रमुख कारण बताया है। हालांकि विधानसभा चुनाव के इस नतीजे के कई कारण हैं और कर्नाटक के चुनाव को एक साधारण आख्यान में नहीं समेटा जा सकता है। लेकिन देश भर में दक्षिण भारत पर सार्वजननिक विमर्श को देखते हुए इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं ध्यान देने योग्य हैं, जो दक्षिण को उत्तर भारत से अलग करती हैं।


यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग प्रोत्साहन योग्य कार्य होते हैं और एक राज्य के भीतर भी लोग उस पर अलग-अलग प्रतिक्रिया देते हैं। इसका कारण स्पष्ट है कि संदर्भ भिन्न होते हैं। देश के कुछ हिस्सों में गैस सिलिंडर या शौचालय के प्रति काफी आकर्षण हो सकता है, लेकिन देश के दूसरे हिस्से में उसका उतना आकर्षण नहीं होगा। इसलिए फिर दक्षिण की तरफ लौटते हैं कि वहां क्या पता चलता है? सरकार के ही आंकड़ों को देखें, तो यह बिल्कुल स्पष्ट है कि औसतन दक्षिणी भारतीय राज्य स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक अवसरों के मामले में देश के बाकी हिस्सों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।


डाटा वैज्ञानिक आर एस नीलकंठन ने अपनी किताब, साउथ वर्सेज नॉर्थ :  इंडियाज ग्रेट डिवाइड में कुछ ऐसे कारण गिनाए हैं, जिनकी वजह से दक्षिणी राज्य देश के बाकी हिस्सों से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। एक प्रमुख कारक मानव विकास में निवेश है, जो किसी भी समाज की आधारशिला बनाता है। जिन राज्यों या देशों ने ऐतिहासिक रूप से अपने नागरिकों पर निवेश किया है, वे उनकी तुलना में बेहतर हैं, जिन्होंने निवेश नहीं किया है।


नीलकंठन ने सितंबर, 2022 में बीबीसी में लिखे एक लेख में बताया, 'भारत में पैदा हुई एक बच्ची के बारे में विचार करें। सबसे पहले, दक्षिण भारत में जनसंख्या वृद्धि की कम दर को देखते हुए इस बच्चे के उत्तर भारत की तुलना में दक्षिण भारत में पैदा होने की संभावना बहुत कम है। मगर मान लीजिए कि उसका जन्म दक्षिण भारत में हुआ है। ऐसी स्थिति में, देश के बाकी हिस्सों की तुलना में दक्षिण भारत में शिशु मृत्यु दर कम होने के कारण उसके जीवन के पहले वर्ष में मरने की आशंका बहुत कम है।


उसके टीकाकरण की संभावना अधिक होती है, बच्चे के जन्म के दौरान उसकी मां के मरने की आशंका कम होती है, बाल सेवाओं तक पहुंच की संभावना अधिक होती है और बचपन में उसे बेहतर पोषण प्राप्त होता है। उसके अपना पांचवां जन्मदिन मनाने, बीमार पड़ने पर अस्पताल या डॉक्टर खोजने में सहूलियत होने और अंत में थोड़ा लंबा जीवन जीने की भी अधिक संभावना है।


वह स्कूल में पढ़ाई करेगी और स्कूल में लंबे समय तक रहेगी-इसी तरह उसके कॉलेज जाने की संभावना भी अधिक होगी। आर्थिक भरण-पोषण के लिए उसके कृषि कार्यों में संलिप्त होने की संभावना कम है और उसे ऐसा काम मिलने की अधिक संभावना है, जो उसे अधिक वेतन देता हो। वह आगे चलकर कम बच्चों की मां बनेगी, जो उसके मुकाबले ज्यादा स्वस्थ और ज्यादा शिक्षित होंगे। और उसका अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व भी होगा और एक मतदाता के रूप में वह चुनावों पर अधिक प्रभाव डालेगी।'
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राज्यवार स्कूल छोड़ने वालों की दर पर विचार कीजिए। सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि बड़े राज्यों में, भारत के कई अन्य राज्यों की तुलना में तमिलनाडु में ड्रॉपआउट दर अपेक्षाकृत कम है, केवल लगभग 0.4 प्रतिशत छात्र प्राथमिक स्कूल छोड़ते हैं और 0.5 प्रतिशत छात्र माध्यमिक स्कूल छोड़ते हैं।


केरल में लगभग 0.1 प्रतिशत छात्र प्राथमिक स्कूल छोड़ देते हैं और 0.4 प्रतिशत माध्यमिक स्कूल छोड़ देते हैं। इसके विपरीत, असम में माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर 20.3 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। शिक्षा के सभी स्तरों पर लड़कों की तुलना में लड़कियों की दर भी अधिक है। बिहार में माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर 20.5 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत से भी अधिक है। उत्तर प्रदेश में विशेष रूप से लड़कियों के स्कूल छोड़ने की दर बहुत ज्यादा है।


ये आंकड़े मायने रखते हैं, क्योंकि ये अपने नागरिकों की कुशलता को बढ़ाने की राज्य की क्षमता को दर्शाते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि उत्तर भारत में कहीं कुछ अच्छा नहीं हो रहा है, और दक्षिण भारत में कोई समस्या ही नहीं है। विंध्य पर्वत शृंखला (उत्तरी और दक्षिणी भारत के बीच पारंपरिक भौगोलिक सीमा) के पार मानव पूंजी की गुणवत्ता में सुधार के लिए कई पहलें की जा रही हैं।


लेकिन व्यापक संदेश स्पष्ट है-जो लोग बेहतर ढंग से शिक्षित, ज्यादा स्वस्थ और फलस्वरूप बेहतर स्थिति में हैं, वे सामान्यतः उन लोगों से अलग अपेक्षाएं रखते हैं, जो समान रूप से सुसज्जित नहीं हैं। यकीनन हर जगह अपवाद मौजूद हैं। राज्य चुनावों से परे दक्षिण से संदेश यह है कि मानव विकास में निवेश इस गलाकाट प्रतिस्पर्धा के युग में पहले से कहीं ज्यादा मायने रखता है।

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