प्राकृतिक गैस की कीमत बढ़ाने के सरकारी फैसले की चौतरफा आलोचना हो रही है। इस मुद्दे के साथ ही सरकार की समग्र ऊर्जा नीति पर पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली से प्रियंवदा सहाय ने बात की-
-घरेलू प्राकृतिक गैस के दाम बढ़ाने के फैसले को लेकर कहा जा रहा है कि कुछ कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
ऐसी आलोचनाओं का जवाब देने के बजाय देश में गैस की खोज बढ़ाना हमारा मकसद है। सच्चाई यह है कि तेल एवं गैस की घरेलू जरूरतों का 80 फीसदी अब भी आयात से पूरा होता है। यही नहीं, गैस क्षेत्र में निवेश भी कम हो रहा है, जिसे बढ़ाना जरूरी है। इसके लिए कीमतों में बढ़ोतरी करनी ही पड़ेगी। जो लोग कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगा रहे हैं, उन्हें गैस उपलब्ध कराने का रास्ता भी बताना चाहिए। सभी मंत्रालयों से परामर्श कर घरेलू गैस के दाम बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
-गैस के दाम बढ़ने से बिजली और उवर्रक क्षेत्र पर क्या नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा?
आपको बता दूं कि देश में करीब 30 फीसदी गैस आधारित बिजली परियोजनाएं गैस के अभाव में बंद हैं। दूसरी ओर, उवर्रकों का बड़े पैमाने पर आयात किया जा रहा है। ऐसे में, गैस की उपलब्धता अगर देश में नहीं बढ़ाई गई, तो कई परियोजनाएं ठप पड़ जाएंगी।
-केजी बेसिन से गैस उत्पादन कम होने के कारण सरकार क्या ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई करने के बारे में सोच रही है?
किसकी गलती से गैस उत्पादन में गिरावट आई है, यह जांच का विषय है। अगर गैस उपलब्ध नहीं है, तो कोई क्या कर सकता है? कहा यह भी जा रहा है कि केजी बेसिन गैस रिजर्व का सही-सही अनुमान नहीं लगाया गया था। वहां से गैस उत्पादन पिछले अनुमानों से काफी कम हो रहा है। देश में गैस की उपलब्धता की जानकारी अनुमानित सर्वे के आधार पर दी जाती है, लेकिन वैज्ञानिक तरीके से गैस रिजर्व और उपलब्धता की सही जानकारी हासिल करने के लिए अब नेशनल रिपॉजिटरी डाटा बनाया जाएगा।
-क्या बाजार मूल्य से कम कीमत पर डीजल या गैस की बिक्री के कारण तेल कंपनियों की बढ़ती अंडर रिकवरी को कम करने के लिए सरकार कोई उपाय सोच रही है?
फिलहाल डीजल से चलने वाली लक्जरी गाड़ियों पर अतिरिक्त कर लगाकर सब्सिडी भरपाई की कोई योजना नहीं है। पुराने निर्णय के मुताबिक डीजल की अंडर रिकवरी कम करने के लिए 45-50 पैसा प्रति लीटर दाम ही आगे भी बढ़ाए जाएंगे। हालांकि वित्त मंत्रालय की ओर से अंडर रिकवरी कम करने के लिए कहा जा रहा है। लेकिन पेट्रोलियम मंत्रालय किरीट पारिख समिति के सुझावों को ध्यान में रखते हुए अंडर रिकवरी कम करने के उपाय सार्वजनिक करेगा। फिलहाल एलपीजी को आंशिक नियंत्रण मुक्त करने की मंत्रालय की कोई योजना नहीं है।
-तेल एवं गैस आयात निर्भरता कम करने के लिए आपका रोडमैप क्या है?
अगर रोडमैप को साहस के साथ लागू किया गया, तो अगले तीन से चार साल में तेल व गैस के पचास फीसदी आयात को कम किया जा सकता है। वर्ष 2025 तक 75 फीसदी और 2030 तक हम ऊर्जा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता पूरी तरह खत्म कर सकते हैं। इससे देश आर्थिक रूप से मजबूत होगा। हालांकि कुछ लोग आयात पर निर्भरता कम करने के पक्ष में नहीं हैं। उन्हें देश में गैस की खोज के बजाय बाहर से आयात करना बेहतर लग रहा है। इसलिए यह एक बड़ी चुनौती है। अगले बीस-पच्चीस दिनों में नई शेल गैस नीति को कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा, जो वैकल्पिक ईंधन की खोज के लिए मील का पत्थर साबित होगी।