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भीतर के दुश्मन

Mon, 31 Oct 2016 07:01 PM IST
प्रशांत दीक्षित
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प्रशांत दीक्षित
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नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास के एक नियमित कर्मचारी महमूद अख्तर की गिरफ्तारी से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का मनहूस चेहरा सामने आया है। पहले आईएसआई इन नापाक गतिविधियों के लिए सीधे पाकिस्तानी उच्चायोग के इस्तेमाल से परहेज करता था। लेकिन इस घटना के बाद यह संदेह पैदा होता है कि पाकिस्तान के खुफिया जानकारी इकट्ठा करने की प्रक्रिया में रणनीतिक बदलाव आया है। मुखबिरों की निरंतर गिरफ्तारियां हमें बताती रही हैं कि किस तरह हमारे ही अपने लोग कुछ पैसों के लिए देश की सुरक्षा से जुड़ी गोपनीय और संवेदनशील जानकारियां बेचने में गुरेज नहीं करतीं। लेकिन महमूद अख्तर के खुलासे के बाद सपा के एक सांसद मुनव्वर सलीम के पीए फरहत का पकड़ा जाना बेहद चौंकाने वाला है। बताया जाता है कि आईएसआई के लिए पिछले कई वर्षों से जासूसी कर रहा फरहत कई सांसदों का निजी सहायक रह चुका है और राजनेताओं से नजदीकी बढ़ाने में उसे महारत हासिल है। अगर सुरक्षा बल से जुड़े लोग और जनप्रतिनिधियों के निजी सहायक आईएसआई के मुखबिर बन जाएं, तो अनुमान लगाया जा सकता है कि स्थिति कितनी खरतनाक हो चुकी है।
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इसी वर्ष मार्च में राज्यसभा में सरकार ने सूचित किया था कि 2013 से 2016 के बीच 46 पाकिस्तानी मुखबिर पकड़े गए। हालिया गिरफ्तारी के बाद यह संख्या बढ़कर 53 हो गई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अक्तूबर में बोधराज नामक एक जासूस पकड़ा गया, जिसके पास कई सिम एवं नक्शे थे, जिनमें कश्मीर में जवानों की तैनाती दर्शाई गई थी। पिछले साल मोहम्मद एजाज उर्फ मोहम्मद कलाम को मेरठ स्टेशन के पास से नवंबर में एसटीएफ की टीम ने गिरफ्तार किया था। इसी तरह कोलकाता से 51 वर्षीय ठेका मजदूर इरशाद अंसारी, उसके बेटे अशफाक अंसारी और दूसरे रिश्तेदार मोहम्मद जहांगीर को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इरशाद और जहांगीर, दोनों के रिश्तेदार कराची में रहते हैं। उन दोनों को आईएसआई ने तब जासूसी पर लगाया, जब वे पाकिस्तान गए थे। वे दस वर्षों से ज्यादा समय से आईएसआई एजेंट के रूप में काम कर रहे थे और उन्हें आईएसआई ने प्रशिक्षण भी दिया था।

जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में सेना के खुफिया निकाय में तैनात बीएसएफ के हेड कांस्टेबल अब्दुल रशीद को भी इसी आरोप में गिरफ्तार किया गया। राजौरी जिले के कफैतुल्ला खान उर्फ मास्टर राजा को भी गिरफ्तार किया गया। पिछले कोलकाता पुलिस के एसटीएफ ने आईएसआई के इशारे पर जासूसी करने के संदेह पर शेख बादल नामक एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। उसी महीने सेना के सेवानिवृत्त हवलदार मुन्नवर अहमद मीर को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया। सेना के एक राइफलमैन फरीद खान को पाकिस्तान से जुड़े जासूसी मामले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से गिरफ्तार किया। यह 26 नवंबर से छह दिसंबर के बीच पांचवीं गिरफ्तारी थी।
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विगत फरवरी में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा द्वारा वायुसेना के एक कर्मी रणजीत केके को कथित तौर पर गोपनीय दस्तावेज साझा करने के आरोप में पंजाब से गिरफ्तार किया गया। डाक विभाग के चार अधिकारियों को भी आईएसआई के जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। बताया गया कि वे सेना से संबंधित चिट्ठियां व अन्य दस्तावेज पाकिस्तानी एजेंट को देते थे। एक आईएसआई एजेंट को भोपाल क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। जासूसी के आरोप में इरशाद नामक एक भारतीय को पंजाब पुलिस द्वारा पठानकोट से गिरफ्तार किया गया। वह एक आईएसआई एजेंट था, तो पठानकोट केंटोनमेंट में अंडरकवर की नौकरी कर रहा था। एक और कथित पाकिस्तानी एजेंट को राजस्थान पुलिस द्वारा जैसलमेर से सूचनाओं के साथ गिरफ्तार किया गया। अक्तूबर, 2016 में गुजरात एटीएस ने आईएसआई के लिए कथित जासूसी के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया, दोनों को कच्छ जिले से गिरफ्तार किया गया, जो पाकिस्तान के साथ सीमा साझा करता है।

हाल ही में गिरफ्तार अख्तर ने सार्वजनिक तौर पर स्वीकार किया है कि वह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के एक कर्मचारी से सूचनाएं जुटाता था। अगर यह सच है, तो निश्चित रूप से चिंता का विषय है। हालांकि उस रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि उसे कैसी जानकारियां उपलब्ध कराई जाती थी, लेकिन हमें यह समझना होगा कि इसरो भारत के सभी अंतरिक्ष कार्यक्रमों का जनक है, जहां राष्ट्र से संबंधित बहुत-सी सूचनाएं होती हैं। इसके पोलर ऑर्बिटिंग सन सिंक्रोनस सैटेलाइट, जो संख्या में कई हैं, सैन्य योजनाओं से संबंधित उच्च गुणवत्ता वाली ताजा तस्वीरें मुहैया कराने में सक्षम हैं।

हमें यह समझना चाहिए कि पाकिस्तान के पास पृथ्वी की निगरानी करने वाला अपना उपयुक्त उपग्रह नहीं है और न ही इससे संबंधित आंकड़े उसे चीन से मिलने की संभावना है। कोई भी देश किसी दूसरे देश को ऐसी महत्वपूर्ण सूचनाएं नहीं देता है, चाहे वह कितना ही गहरा मित्र देश क्यों न हो। आम धारणा है कि इस तरह की जानकारियां कोई भी गूगल अर्थ से आसानी से प्राप्त कर सकता है, लेकिन वास्तव में यह गलत है, क्योंकि डाटा के समय की जानकारी पाना मुश्किल है।

आप देखते होंगे कि कुछ हद तक सीमा सुरक्षा बल पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया जाता है। लेकिन विभिन्न स्रोतों से संवेदनशील जानकारियां इकट्ठा करने के इस नापाक इरादे को नजरंदाज नहीं किया जा सकता है, क्योंकि बहुत संभव है कि इन जानकारियों के आधार पर आतंकवादियों के देश में देश में घुसपैठ के लिए एक आदर्श योजना बनाई जा सकती है। इसलिए अब समय आ गया है कि भारत की सीमा के भीतर पाकिस्तान के छिपे हुए खुफिया नेटवर्क पर ध्यान केंद्रित किया जाए और उसे उखाड़ फेंका जाए।
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-सामरिक मामलों के विशेषज्ञ
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