क्या आपने कभी अपने अंतिम संस्कार की कल्पना की है! कुछ दक्षिण कोरियाई लोग इस बारे में इतने उत्सुक होते हैं कि वे अपनी मृत्यु तक इंतजार नहीं करना चाहते, क्योंकि उस संस्कार को वे अपनी आंखों से नहीं देख पाएंगे। ऐसे में, हाल के वर्षों में दक्षिण कोरिया में नकली अंतिम संस्कार का चलन बढ़ा है, जिसके पीछे अपने जीवन को सकारात्मक ढंग से देखने की धारणा है।
सियोल स्थित ह्योवोन हीलिंग सेंटर एक फ्यूनरल सर्विस कंपनी की वित्तीय मदद से नकली अंतिम संस्कार से संबंधित कार्यक्रम करता है। इस कार्यक्रम में पहले एक सूचनापरक भाषण होता है, जिसमें प्रतिभागियों को कुछ निर्देश दिए जाते हैं और उन्हें वीडियो दिखाया जाता है। उसके बाद शामिल हुए लोगों को एक ऐसे कमरे में ले जाया जाता है, जो गुलदाउदी के फूल से सजा होता है और जहां हल्की रोशनी होती है। वहां बैठकर लोग अपनी वसीयत लिखते हैं। फिर उन्हें ताबूत में लिटा दिया जाता है। काले कपड़े पहना एक कठोर-सा दिखता आदमी ताबूतों को बंद करता है और प्रतिभागियों को दस मिनट ताबूतों में बिताने पड़ते हैं। हाल में अपने नकली अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल हुए एक प्रतिभागी ने अपने ब्लॉग में लिखा, 'ताबूत के अंदर रोशनी की एक भी किरण नहीं आ रही थी, और दस मिनट तक उस अंधेरे, दम घुटने वाले माहौल में बिताते हुए मुझे रोना आ रहा था।'
ह्योवोन हीलिंग सेंटर के निदेशक जियोंग यंग-मुन के मुताबिक, 2012 से अब तक करीब पंद्रह हजार लोग इस कार्यक्रम में भाग ले चुके हैं। यह कार्यक्रम निःशुल्क है। इसमें शामिल होने वाले कुछ लोगों को गंभीर बीमारियां थीं और अपने अंतिम समय के लिए मानसिक रूप से तैयार हो रहे थे, तो कुछ लोगों में आत्महत्या करने की प्रवृत्ति थी। एक प्रतिभागी ने अपने ब्लॉग में लिखा कि ताबूत के अंदर मेरा दिल धड़क रहा था। वह आत्महत्या करने के बारे में सोच रही थी, लेकिन ताबूत में जाने के बाद उसने इस दिशा में सोचना बंद कर दिया था। खुद निर्देशक जियोंग भी ऐसे लोगों पर खास नजर रखते हैं, जिनमें आत्महत्या करने की प्रवृत्ति है। कार्यक्रम के बाद वह प्रतिभागियों से कहते हैं कि अब आपके जीवन का पुराना आवरण उतर गया है। यह आप लोगों का पुनर्जन्म है, इसलिए इसे नए सिरे से जिएं। अनेक लोगों ने कहा कि इस कार्यक्रम में भाग लेने के बाद वे तरोताजा महसूस कर रहे हैं, और अब जीवन को देखने का एक नया नजरिया उनके पास है। ढाई घंटे के इस कार्यक्रम की समाप्ति के बाद प्रतिभागियों को सहज होने में थोड़ा समय लगता है, लेकिन जल्दी ही वे हंसने, बात करने और अपने ताबूत के साथ सेल्फी लेने लगते हैं।