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भारत के असाधारण नेता : राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक मोर्चे पर कैसा है प्रधानमंत्री मोदी की सरकार का प्रदर्शन

सार

स्वदेशी रक्षा निर्माण पर गहन ध्यान देश के सहयोगियों के लिए एक मजबूत संकेत है कि आत्मनिर्भर भारत हमारे देश के ताने-बाने का अभिन्न हिस्सा है। सुधारों के दायरे ने चौंका दिया है। नोटबंदी ने काले धन से जुड़े वर्ग की कमर तोड़ दी है, और परिणामस्वरूप आयकर संग्रह में भारी वृद्धि हुई है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। - फोटो : PTI (फाइल फोटो)


इसी अवधि में प्रति व्यक्ति जीडीपी 80,388 रुपये से दोगुना बढ़कर 1,72,913 रुपये हो गया जो कि उल्लेखनीय वृद्धि है। यह उम्मीद की जा रही है कि वित्त वर्ष 2023 में जीडीपी का आकार 258 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा। भारत आज अपने पूर्व औपनिवेशिक शासक ब्रिटेन को पीछे छोड़कर दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। इस अवधि में वृहद पैमाने पर रोजगार का भी सृजन हुआ, जैसा कि कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ), कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआई) और राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) के आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है। 


सितंबर, 2017 से जून, 2022 के दौरान 5.6 करोड़ नए उपभोक्ता ईपीएफ से जुड़े हैं। इसी अवधि में ईएसआई से 6.9 करोड़ नए कर्मचारी जुड़े वहीं केंद्र सरकार, राज्य सरकार और कॉरपोरेट योजनाओं के जरिये 36.5 लाख कर्मचारी एनपीएस में शामिल हुए। सामाजिक सूचकांकों पर भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। भारतीय इतिहास में पहली बार, जैसा कि एनएफएचएस-5 (राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण) के सर्वे ने दिखाया है, महिलाओं ने पुरुषों को पीछे छोड़ दिया है और अब प्रति हजार पुरुषों के पीछे 1,020 महिलाएं हैं। 


इसी सर्वे ने दिखाया कि जन्म के समय लैंगिक अनुपात 2015-16 में 919 महिलाएं से बढ़कर 2019-21 में 929 महिलाएं प्रति हजार पुरुष हो गया है। इसी अवधि में शिशु मृत्यु दर प्रति हजार जन्म में 40.7 से गिरकर 35.2 हो गई। गर्भवती माताओं की स्वास्थ्य देखभाल पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जिससे मातृ मृत्यु दर 2014-16 में 130 से गिरकर 2017-19 में 103 रह गई है। लड़कियों और महिलाओं के कल्याण की ओर भारत अब पहले से अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है, नतीजतन 2021 में 13.74 करोड़ लड़कियों ने स्कूलों में दाखिला लिया, जो कि कुल पंजीयन का 52 फीसदी है। 


इसी तरह से 1.88 करोड़ महिलाओं ने उच्च शिक्षा के लिए पंजीयन करवाया, जो कि कुल पंजीयन का 49 फीसदी है। उसी वर्ष उच्च शिक्षा में महिलाओं का सकल पंजीयन अनुपात (जीईआर) 27.3 फीसदी था, जो कि पुरुषों के 26.9 फीसदी जीईआर से अधिक है और उन्होंने 2018-19 में पहली बार पुरुषों के जीईआर को पीछे छोड़ा। स्वतंत्र भारत के इतिहास में किसी और प्रधानमंत्री ने नरेंद्र मोदी से ज्यादा वंचितों और गरीबों के लिए कुछ नहीं किया। आंकड़े खुद बोलते हैं। सितंबर, 2022 के मध्य तक प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण (डीबीटी) के जरिये 25 लाख करोड़ रुपयों की मदद दी गई। 


वंचित लाभार्थियों के बैंक खातों में बड़े पैमाने पर प्रसार करने के लिए प्रौद्योगिकी प्लेटफार्मों के उपयोग ने आय सहायता के वितरण में क्रांति ला दी है। 46 करोड़ ऐसे लाभार्थियों के पास अब जन-धन योजना के जरिये मोबाइल फोन से जुड़ा बैंक खाता है, जिनके पास पहले बैंक में कोई खाता नहीं था। 2014 के बाद से 2.5 करोड़ आवासों का निर्माण किया गया है, जिनमें से अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। 9.15 करोड़ घरों में अब नल का पानी आ रहा है, वहीं 11.6 करोड़ घरों में अब शौचालय है। 


2014 में जहां 12 करोड़ रसोई गैस कनेक्शन थे, जो बढ़कर 2019 में 29 करोड़ हो गए और उनमें से भी 9.3 करोड़ का वितरण ग्रामीण महिलाओं में बिना किसी लागत के किया गया है, ताकि उनके फेफड़ों की रक्षा हो सके और वे धुएं के बिना खाना पका सकें। यही नहीं, 1.81 लाख ग्राम पंचायतें फाइबर ऑप्टिक केबल से जुड़ चुकी हैं। आधारभूत ढांचे में असाधारण निवेश किया गया है। अप्रैल, 2014 में जहां नेशनल हाई-वे की कुल लंबाई 91,287 किलोमीटर थी, जो दिसंबर, 2021 में बढ़कर 1,40,937 किलोमीटर हो गई। 
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डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर नेटवर्क के विकास से माल की ढुलाई की गति में भारी वृद्धि होगी, जिससे यात्रियों के लिए मौजूदा रेलवे नेटवर्क मुक्त हो जाएगा। हवाई अड्डों की संख्या 2014 में 64 से बढ़कर 2022 में 118 हो गई है, 2025 तक 220 का लक्ष्य रखा गया है। भू-राजनीतिक व्यवस्था में भारत की स्थिति स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर है। 2014 में हमारा देश दसवीं बड़ी अर्थव्यवस्था था, जो कि 2022 में पांचवी बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। भारत क्वाड का एक अभिन्न सदस्य है, और विभिन्न वैश्विक साझेदारियों और मंचों के भीतर इसका प्रभाव बढ़ रहा है। 


स्वदेशी रक्षा निर्माण पर गहन ध्यान देश के सहयोगियों के लिए एक मजबूत संकेत है कि आत्मनिर्भर भारत हमारे देश के ताने-बाने का अभिन्न हिस्सा है। सुधारों के दायरे ने चौंका दिया है। नोटबंदी ने काले धन से जुड़े वर्ग की कमर तोड़ दी है, और परिणामस्वरूप आयकर संग्रह में भारी वृद्धि हुई है। एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ने अर्थव्यवस्था को 17 करों की जगह एक कर की व्यवस्था में बदल दिया है। प्राचीन काल में फोन बैंकिंग के कारण भारत का 15 लाख करोड़ रुपये का एनपीए संकट आखिरकार हल हो गया है। 


नई दिल्ली में भ्रष्टाचार का खात्मा कर दिया गया है। भारत आज 17 सितंबर, 2022 को प्रधानमंत्री मोदी का 72वां जन्मदिन मना रहा है, ऐसे में उनके द्वारा किए गए सुधारों का जायजा लेना खुशी की बात है। उन्होंने मानव गतिविधि के सभी क्षेत्रों में मौलिक नेतृत्व का प्रदर्शन किया है और एक अनुकरणीय प्रधानमंत्री के रूप में काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी की असाधारण उपलब्धियां भारत के लोगों के प्रति उनके समर्पण की गवाही देती हैं। (-टीवी मोहनदास पई एरिअन कैपिटल पार्टनर्स के चेयरमैन हैं और निशा होला सी-कैंप में टेक्लोलॉजी फेलो हैं।)

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