2000 के दशक के अंत तक एटीएम कार्ड का विकास हो चुका था, जिसे अब हम डेबिट कार्ड के रूप में जानते हैं, जिससे उपयोगकर्ता क्रेडिट कार्ड की तरह भुगतान कर सकते हैं। डेबिट कार्ड क्रांति के चलते खाताधारकों को अधिकांश बैंकिंग कार्यों के लिए बैंक शाखा जाने की जरूरत नहीं रह गई। उन्नत प्रौद्योगिकी के कारण अब कोई व्यक्ति एक बैंक द्वारा जारी डेबिट कार्ड का उपयोग दूसरे बैंक के एटीएम में भी कर सकता है। हालांकि, विशिष्ट लेनदेन पर कुछ शुल्क लागू होते हैं, लेकिन कुल मिलाकर, एटीएम और डेबिट कार्ड ने पैसे खर्च करने के हमारे तरीके को बदल दिया है। इसके अलावा, एटीएम एवं डेबिट कार्ड से प्रीपेड मोबाइल फोन को रिचार्ज भी किया जा सकता है तथा अन्य सेवाओं के लिए भी आग्रह किया जा सकता है।
हालांकि, हाल के वर्षों में बैंकों ने भारतीय रिजर्व बैंक के साथ मिलकर डेबिट कार्ड की सुविधा, विशेष रूप से एटीएम में उनके उपयोग पर जुर्माना लगाना शुरू कर दिया है, जिसके तहत विशिष्ट प्रकार के और एक निश्चित संख्या से अधिक लेनदेन पर शुल्क लगाया जाता है। इस साल मई से, रिजर्व बैंक ने उन खाताधारकों के लिए एटीएम निकासी शुल्क में संशोधन किया है, जिन्होंने अपनी मुफ्त मासिक सीमा समाप्त कर ली है। नतीजतन, खाताधारकों को अब अपने मुफ्त लेनदेन का उपयोग करने के बाद एटीएम पर प्रति लेनदेन 23 रुपये का भुगतान करना होगा। आम तौर पर, ज्यादातर बैंक हर महीने अपने एटीएम पर पांच मुफ्त एटीएम लेनदेन की सुविधा प्रदान करते हैं।
खाताधारक मेट्रो शहरों में अन्य बैंक के एटीएम पर अधिकतम तीन बार तथा गैर-मेट्रो शहरों में अन्य बैंक के एटीएम पर अधिकतम पांच बार मुफ्त लेनदेन कर सकते हैं। बारीक अक्षरों में लिखा है कि ये तीन मुफ्त लेनदेन प्रति कार्ड पांच मुफ्त लेनदेन की सीमा में शामिल हैं, चाहे किसी भी एटीएम का उपयोग किया गया हो। इसके अलावा, लेनदेन सिर्फ धन निकासी तक सीमित नहीं है, बल्कि बैलेंस चेक करने को भी लेनदेन में गिना जाएगा। बहुत से खाताधारकों के लिए एटीएम पर डेबिट कार्ड का इस्तेमाल सावधानी से करने की जरूरत है और इस पर नियंत्रण होना चाहिए। यह उन लोगों की ओर से एक महत्वपूर्ण अनुरोध है, जो अपनी नकदी की जांच करने के साथ-साथ सुरक्षा उद्देश्यों के लिए एटीएम और डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं।
रिजर्व बैंक ने जो कारण बताया है, वह यह है कि एटीएम के इस्तेमाल से बैंकों को नुकसान हो रहा है, लेकिन यह सही नहीं है। एटीएम के प्रसार का मुख्य कारण बैंक शाखाओं की संख्या, इन शाखाओं में नकदी निकासी और जमा जैसे बुनियादी लेनदेन संभालने के लिए काम करने वाले लोगों की संख्या को कम करना था। रिजर्व बैंक द्वारा अब इन शुल्कों को लागू करना उन खाताधारकों को दंडित करना है, जिन्होंने समय के साथ इन सेवाओं का लाभ उठाया है। प्रति अतिरिक्त लेनदेन 23 रुपये का शुल्क लगाने से बैंकों के लिए खाताधारकों से पैसे कमाने का एक नया तरीका खुल जाता है। खाते में न्यूनतम धनराशि न रखने के लिए खाताधारकों से बैंकों द्वारा वसूले जाने वाले पैसे के बारे में बताया गया कि पिछले पांच वर्षों में यह औसतन हर साल 1,700 करोड़ रुपये रहा है। हालांकि, कुछ बैंक अब खाताधारकों पर जुर्माना नहीं लगाते हैं, लेकिन कई बैंक अब भी जुर्माना लगाते हैं। जिन खाताधारकों के खाते में न्यूनतम धनराशि नहीं है, उनसे बैंक शुल्क वसूल रहे हैं, जो खाताधारकों के अधिकारों के बिल्कुल खिलाफ है। रिजर्व बैंक, बैंकों को दंडित करने के बजाय उन्हें ग्राहकों से शुल्क लेने की अनुमति दे रहा है।
इसी तरह रिजर्व बैंक ने हाल ही में गोल्ड लोन पर मसौदा दिशा-निर्देश पेश किए हैं, जिनके जनवरी 2026 में लागू होने की संभावना है। मसौदा नियम ऋण-से-मूल्य (एलटीवी) अनुपात को 75 फीसदी तक सीमित करता है। हालांकि, उधारकर्ताओं के लिए मुख्य समस्या कागजी कार्रवाई है, विशेष रूप से स्वामित्व का प्रमाण, जो उन्हें ऋण सुरक्षित करने के लिए पेश करना होगा, जो अपने वर्तमान स्वरूप में अधिक उदार है। मसौदे में दिए गए सुझावों में उधारकर्ताओं से यह अपेक्षा की गई है कि वे उन गहनों के लिए दस्तावेज उपलब्ध कराएं, जिन्हें वे जमानत के रूप में इस्तेमाल करना चाहते हैं, चाहे ऋण राशि कुछ भी हो। भारत में उधारकर्ताओं द्वारा मुख्य रूप से अंतिम विकल्प के रूप में सोने को लिया जाता है, और ऐसे ऋणों का मूल्य कम होता है। यह ऋणदाता के लिए भी सुरक्षित है, क्योंकि ऐसे ऋणों में एनपीए कम होता है। आखिरकार, जमानत पूर्णतः सोना ही होता है।
वित्त मंत्रालय ने रिजर्व बैंक से गोल्ड लोन के लिए सुझाए गए सख्त नियमों पर पुनर्विचार करने को कहा है, खास तौर पर दो लाख रुपये से कम मूल्य वाले लोन के लिए। गोल्ड लोन के क्षेत्र में विनियमित और अनियमित, दोनों तरह की संस्थाएं काम करती हैं, लेकिन ये नियम केवल रिजर्व बैंक के दायरे में आने वाली संस्थाओं पर ही लागू होते हैं। यदि रिजर्व बैंक का मसौदा अत्यधिक सख्त रहता है, तो यह अनियमित क्षेत्र को फलने-फूलने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है, जिससे उधारकर्ता उनसे बहुत अधिक ब्याज दरों पर ऋण लेने को मजबूर हो जाएंगे। यह स्थिति उधारकर्ताओं को मुश्किल में डाल सकती है और इसके चलते वे जिस सोने के बदले में उधार ले रहे हैं, उसे जब्त किया जा सकता है। रिजर्व बैंक ऐसे कानून ला रहा है, जो बुनियादी बैंकिंग सुविधाएं खोजने और कठिन समय में सोने के बदले ऋण लेने वाले आम आदमी के बिल्कुल खिलाफ हैं।