हिन्दुस्तान के लिए अब चंदा मामा दूर के नहीं रहे। इसरो के वैज्ञानिकों और उनके सत्रह हजार सहयोगियों ने सोमवार को जिस पल अपने दूसरे चंद्रयान को छोड़ा, तो उनके लिए उस एहसास को शब्दों में बयान करना कठिन था। करीब तीन लाख 84 हजार किलोमीटर का फासला तय करके सितंबर के पहले हफ्ते में जब इस यान का चांद से संपर्क होगा, भारतीय तिरंगे की शान और बढ़ जाएगी।
वैज्ञानिक कयास लगाते आए हैं कि किसी समय चक्र में यहां जीवन था और जीव-जंतु विचरण करते थे, लेकिन ज्वालामुखी के फटने से विनाश हो गया। जीवाश्म याने फॉसिल्स इन्हीं जीव-जंतुओं की मौजूदगी को सुनिश्चित करते हैं। इसके अलावा वहां मैग्नीशियम - कैल्शियम खनिजों और लोहा धातु की उपस्थिति के बारे में चंद्रयान दो जांच कार्य में सहायता कर सकता है।