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लक्ष्य: आसान नहीं विकसित राष्ट्र की डगर... लगातार 7 से 10 फीसदी की विकास दर चाहिए तभी 2047 तक सपना पूरा होगा

जयंतीलाल भंडारी
Updated Tue, 06 Aug 2024 07:41 AM IST

सार

विश्व बैंक की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लिए लगातार 7 से 10 फीसदी की विकास दर चाहिए।
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विकसित भारत का लक्ष्य पाने के लिए तेज और निरंतर विकास जरूरी (प्रतीकात्मक) - फोटो : एएनआई


इन दिनों भारत को विकसित बनाने पर मंथन चल रहा है। 27 जुलाई को नीति आयोग के शासी निकाय की बैठक में भी इस रणनीति पर विचार-विमर्श हुआ। वहीं 30 जुलाई को लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पर चर्चा के जवाब में कहा कि यह बजट विकसित भारत के लिए है। इसी परिप्रेक्ष्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय उद्योग परिसंघ के सम्मेलन में कहा था कि अब विकसित भारत के लिए उद्योगों की अहम भूमिका है। ऐसे में अब सरकार से विकसित भारत के स्पष्ट रोडमैप की अपेक्षा की जा रही है। नीति आयोग की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विकसित देश बनाने के लिए कई अनुकूलताएं भारत के पास हैं। चूंकि यह दशक तकनीक और भू-राजनीतिक बदलाव का है, अतएव भारत को इस मौके का पूरा फायदा उठाना होगा और ऐसी नीतियां बनानी होंगी, जिससे ज्यादा से ज्यादा विदेशी निवेश भारत में आए। प्रधानमंत्री ने गांवों से गरीबी खत्म करने का लक्ष्य तय करने और जिलों को विकास के वाहक बनाने का आह्वान किया है।


नीति आयोग के दृष्टिपत्र में कहा गया है कि 'जनसांख्यिकी, लोकतंत्र और विविधता' के तीन स्तंभों पर विकसित भारत बनाने का लक्ष्य रखा गया है। कहा गया है कि पिछले 70 वर्षों में मुश्किल से एक दर्जन मध्यम आय वाले देश ही उच्च आय वाले विकसित देश बन पाए हैं। ऐसे में कई बड़े लक्ष्य की चुनौतियों के बीच भारत को विकसित देश बनाने की डगर पर आगे बढ़ा जाएगा। भारत को एक विकसित देश बनने के लिए 18,000 अमेरिकी डॉलर की प्रति व्यक्ति वार्षिक आय के साथ 2047 तक करीब 30 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की आवश्यकता है। विकसित भारत के लिए देश में प्रत्येक नागरिक के पास गुणवत्तापूर्ण आवास, 24 घंटे शुद्ध पेयजल और बिजली आपूर्ति, हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड और बैंकिंग सुविधाओं सहित उच्च गुणवत्ता वाली सेवाओं तक सार्वभौमिक पहुंच जरूरी होगी। इसमें कोई दो मत नहीं है कि विकसित भारत के सपने को पूरा करने के लिए वर्ष 2024-25 का आम बजट महत्वपूर्ण है। वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों मूडीज, एसएंडपी, फिच आदि ने वित्त वर्ष 2024-25 के भारत के बजट की सराहना करते हुए कहा कि इस बजट में राजस्व घाटा एवं राजकोषीय घाटा कम करने की प्रतिबद्धता दिखाई गई है।


अगले 23 वर्षों में भारत को विकसित बनाने का लक्ष्य चुनौतीपूर्ण है, लेकिन असंभव नहीं है। 2047 तक 18,000 डॉलर वार्षिक प्रति व्यक्ति आय के लक्ष्य को हकीकत में बदलने के लिए दो अंकों की वृद्धि लगातार बरकरार रखनी होगी। इस परिप्रेक्ष्य में हम दुनिया के कई देशों को सामने रख सकते हैं। सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, जापान, जर्मनी जैसे देशों ने दशकों तक ऊंची विकास दर से विकसित देश के तमगे हासिल किए गए है। इन देशों के विकसित देश बनने में संस्थागत और सामाजिक बदलावों से भी बड़ी मदद मिली है। सिंगापुर ने अफसरशाही में सुधार किया, कोरिया ने अभिनव निजी-सार्वजनिक भागीदारी विकसित की है, तो जापान ने अपने सार्वजनिक क्षेत्र में नियमन और न्यायपालिका में पूरी तरह पश्चिमी उदारवादी मॉडल अपनाने की रणनीति अपनाई।


भारत को भी ऐसे संस्थागत और सामाजिक बदलाव के आधार पर उच्च वृद्धि हासिल करनी होगी, देश में ऊर्जा क्षेत्र की मुश्किलें दूर करनी होगी। औद्योगिक प्रतिस्पर्धा बढ़ानी होगी। ग्रामीण व शहरी  असमानता दूर करनी होगी। इन सबके साथ-साथ इस बात पर भी ध्यान देना होगा कि देश में इस समय जिस तरह पुरातन व्यवस्थाओं और सख्त अफसरशाही ढांचे की वजह से निर्णय प्रक्रिया में देरी होती है, उसमें व्यापक सुधार लाया जाए। विकसित भारत के लिए जरूरी होगा कि कृषि के अतिरिक्त श्रम बल के लिए उद्योग और सेवा क्षेत्र में रोजगार सृजित किए जाएं। देश में न्यायिक प्रक्रिया और कानून के प्रवर्तन में सुधार और सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी। महिलाओं को श्रम शक्ति में अधिक भागीदारी देने और अन्य सामाजिक बदलावों को लागू करने जैसे अभियानों के लिए प्रबल राजनीतिक और सामाजिक सहमति बनानी होगी। हम उम्मीद करें कि सरकार 2047 तक देश को विकसित देश बनाने के संकल्प के मद्देनजर अधिक स्पष्ट रोडमैप के साथ कदम आगे बढ़ाएगी और देशवासी भी अपना हरसंभव योगदान देते हुए दिखाई देंगे।

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