फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

अफ्रीकी देशों से बढ़ते रिश्ते

सुरेंद्र कुमार Updated Wed, 01 Aug 2018 06:32 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
युगांडा में मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पड़ोसी प्रथम की नीति के बावजूद भारत का अपने निकटतम पड़ोसी देशों के साथ रिश्ता मिले-जुले प्रभाव वाला रहा है। बांग्लादेश और श्रीलंका के साथ जहां हमारे रिश्तों में सुधार आया है, वहीं मालदीव, नेपाल और पाकिस्तान के साथ हमारे रिश्ते खराब हुए हैं।



लेकिन वह अफ्रीका की अपनी स्पष्ट, सक्रिय और परिवर्तनकारी यात्रा के लिए प्रशंसा के काबिल हैं। अफ्रीकी उपमहाद्वीप के साथ भारत के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक रिश्ते सदियों पुराने हैं। आज भी कई अफ्रीकी देश गांधी, नेहरू और इंदिरा गांधी को उनके साम्राज्यवाद विरोधी, उपनिवेश-विरोधी और रंगभेद विरोधी संघर्ष के लिए याद करते हैं। आईटीईसीएच कार्यक्रम के तहत अफ्रीकी छात्रों को भारत सरकार की छात्रवृत्ति और आईटी केंद्र स्थापित करने, पूरे अफ्रीका में ई-नेटवर्क और एचआईवी व एड्स से मुकाबले के लिए मदद के निर्णय की अफ्रीकी लोग प्रशंसा करते हैं। लेकिन जाहिर है, भारत अपने लिए अनुकूल परिस्थितियों का पूरी तरह से लाभ उठाने में विफल रहा है। शीर्ष भारतीय नेताओं ने कुछ अफ्रीकी देशों की यात्रा की, लेकिन ये यात्राएं कम और काफी अंतराल में हुईं। कई अफ्रीकी देशों ने तो दशकों से किसी भारतीय नेता को नहीं देखा।


इसी तरह अफ्रीकी देशों का भारत में द्विपक्षीय दौरा बहुत कम रहा। अफ्रीकी नेताओं के स्वागत का उत्साह भले नकारात्मक न रहा हो, पर उथला जरूर था। कई अफ्रीकी देशों की राजधानियों में हमें यही सुनने को मिलता है कि भारत को हमारी याद तभी आती है, जब संयुक्त राष्ट्र या उसकी एजेंसियों में उसे अपने प्रत्याशियों को जिताने के लिए वोट की जरूरत होती है।

 

सौभाग्य से इस मानसिकता में परिवर्तन आया है। अक्तूबर, 2015 में हुए तीसरे भारत-अफ्रीका फोरम समिट में 54 अफ्रीकी देशों का प्रतिनिधित्व देखा गया, जिनमें से 43 देशों/सरकारों के प्रमुख स्तर के लोग थे। पिछले साढ़े चार वर्षों में भारत के राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने 25 अफ्रीकी देशों की यात्रा की और 32 अफ्रीकी देशों/सरकारों के प्रमुख ने भारत का दौरा किया। भारतीय कंपनियों ने वहां 54 अरब डॉलर का निवेश किया और अफ्रीका के साथ भारत का व्यापार 74 अरब डॉलर का हो गया।

 

मोदी की हालिया सफल यात्रा के दौरान रवांडा और युगांडा में कई समझौते पर हस्ताक्षर हुए। क्रेडिट लाइन और सॉफ्ट लोन, दोनों को करीब 20 करोड़ डॉलर तक बढ़ाया गया। रवांडा की यात्रा करने वाले मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री है, जो तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन रहा है और कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में व्यापार और निवेश का अवसर प्रदान करता है। पॉल कागामे के प्रमुख गिरिन्का कार्यक्रम का समर्थन करने के लिए 200 स्थानीय गाय उपहार देना एक स्मार्ट, अभिनव और कम लागत में उच्च रिटर्न हासिल करने वाला कूटनीतिक कदम था।

 

मोदी पिछले 22 वर्षों में युगांडा की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं और युगांडा की संसद को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री भी। उन्होंने आश्वासन दिया कि भारत कृषि और स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रशिक्षण, बुनियादी ढांचे और ऊर्जा, सरकार में क्षमता निर्माण और रक्षा प्रशिक्षण के क्षेत्र में युगांडा का समर्थन जारी रखेगा। उन्होंने अफ्रीका के साथ भारत की चल रही भागीदारी का जिक्र किया, जिसमें 40 देशों में 11 अरब डॉलर के 180 क्रेडिट लाइन (कर्ज) शामिल थे।

 

उन्होंने जिन्जा में गांधी विरासत केंद्र की स्थापना की घोषणा की। भारत-अफ्रीका संबंधों का मार्गदर्शन करने वाले दस बुनियादी सिद्धांतों की उनकी घोषणा सकारात्मक प्रभाव डालेगी।
विज्ञापन

        

1-गहन, निरंतर और नियमित जुड़ाव के साथ अफ्रीका भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है। 2-भारत की विकास भागीदारी अफ्रीकी प्रतिभा और कौशल पर निर्भर अफ्रीकी प्राथमिकता से निर्देशित होगी। 3-अफ्रीकी उत्पादों के लिए भारतीय बाजारों में खुली और आसान पहुंच और अफ्रीका में उद्योग के निवेश के लिए समर्थन। 4-भारत के डिजिटल अनुभव के साथ अफ्रीका में डिजिटल क्रांति का समर्थन: वितरण सेवाओं में सुधार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, डिजिटल साक्षरता और वित्तीय समावेश को प्रोत्साहन और हाशिए के तबकों को मुख्यधारा में लाना। 5-अफ्रीका की कृषि में सुधार। 6-जैव विविधता की रक्षा और स्वच्छ व प्रभावी ऊर्जा स्रोतों को अपनाने के लिए केवल अंतरराष्ट्रीय जलवायु व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए अफ्रीका के साथ सहयोग। 7-साइबर अपराध समेत आतंकवाद से मुकाबले के लिए परस्पर सहयोग। 8-सभी देशों के लाभ के लिए महासागरों को खुला और मुक्त रखना। 9-यह सुनिश्चित करना कि अफ्रीका फिर से प्रतिद्वंद्वी महत्वाकांक्षाओं का रंगमंच न बने और अफ्रीकी युवाओं को उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने में मदद करना। 10-केवल प्रतिनिधि, लोकतांत्रिक, वैश्विक व्यवस्था बनाने में मदद के लिए मिलकर काम करेंगे, जिसमें अफ्रीका की आवाज और भूमिका है।


जोहान्सबर्ग में जुलाई में हुए दसवें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण विश्व आर्थिक मंच और युगांडा की संसद में हाल ही में दिए गए उनके भाषण की पुनरावृत्ति थी। वैश्वीकरण, मुक्त बाजार, बहुध्रुवीय दुनिया और कानून आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रणाली के संबंध में उनके विचार चीनी राष्ट्रपति के विचारों के समान संयुक्त घोषणा पत्र में शामिल किए गए। नई प्रौद्योगिकी, शिक्षा, कौशल उन्नयन, और मानव मूल्य पर उनके जोर को व्यापक समर्थन मिला।

 

शुरू में वित्तीय, आर्थिक, व्यापार और निवेश संबंधी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने वाला ब्रिक्स अब क्षेत्रीय व वैश्विक रणनीतिक मुद्दों पर ज्यादा समय खर्च करता है। यह कई गैर-ब्रिक्स देशों को सहकारी भागीदार के रूप में जोड़ता है। जोहान्सबर्ग घोषणापत्र की प्रतिबद्धता अधिक प्रतिनिधित्व, लोकतंत्र को प्रोत्साहन, न्यायसंगत, निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय राजनीति व आर्थिक व्यवस्था, बहुपक्षवाद को बरकरार रखने, अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान और अनिवार्य रूप से सतत विकास लक्ष्य को बढ़ावा देने के प्रति है। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next