सबसे पहले एक अच्छी खबर! हम इस बात पर खुश हो सकते हैं कि भारत अगले दो दशकों में जनसंख्या वृद्धि में तेजी से गिरावट के लिए तैयार है। और यह कि आबादी बहुल हिंदी प्रदेश में बहुत कम बच्चे पैदा हो रहे हैं। यह एक आशाजनक संकेत है। वर्तमान रुझानों के अनुसार, अगले दो दशकों में छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में जनसंख्या वृद्धि दर आधी फीसदी हो सकती है, सिर्फ बिहार में ही जनसंख्या वृद्धि दर एक फीसदी रहने की संभावना है।
लेकिन जैसा कि आर्थिक सर्वेक्षण-2019 हमें बता रहा है, झारखंड के साथ ये राज्य अब भी 2021-41 के बीच भारत की जनसंख्या वृद्धि में दो-तिहाई के हिस्सेदार होंगे, सिर्फ उत्तर प्रदेश और बिहार ही जनसंख्या वृद्धि में 40 फीसदी से ज्यादा के लिए जिम्मेदार होगा। जनसांख्यिकीय लाभांश, जिसकी हम इतनी चर्चा करते हैं, वास्तव में कामकाजी उम्र श्रेणी में जनसंख्या का उभार है। हिंदी प्रदेश लगातार जितने लोगों को रोजगार दे सकते हैं, उसकी तुलना में ज्यादा रोजगार तलाशने वालों को पैदा करते रहेंगे।