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आईटी क्षेत्र की बढ़ती चुनौतियां

Tue, 12 Jul 2016 08:21 PM IST
जयंतीलाल भंडारी
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जयंतीलाल भंडारी
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इन दिनों भारतीय आईटी उद्योग के परिदृश्य पर दो तरह की बड़ी चिंताएं उभरती दिखाई दे रही हैं। एक, अमेरिका से आउटसोर्स हो रही आईटी नौकरियों को कड़ाई से रोकने के लिए अमेरिकी संसद की प्रतिनिधि सभा में विधेयक प्रस्तुत होना, और दो, नई तकनीक के कारण आईटी कंपनियों में नौकरियों में भारी कमी आना। अमेरिकी संसद में जो विधेयक पेश किया गया है, उसके अनुसार, जिन भारतीय आईटी कंपनियों में 50 से ज्यादा कर्मचारी हैं और उनमें से आधे से ज्यादा कर्मचारी एच-1बी और एल-1 वीजाधारी हैं, तो वे कंपनियां और ज्यादा एच-1बी वीजाधारी कर्मियों को नियुक्त नहीं कर पाएंगी। अधिकतर बड़ी भारतीय आईटी कंपनियां थोड़े से अमेरिकी आईटी पेशवरों को छोड़कर एच-1बी और एल-1 वीजाधारी पेशेवरों से काम कराती हैं। यदि यह नया वीजा मसौदा पारित हो जाता है, तो इसका सबसे प्रतिकूल प्रभाव अमेरिका में कार्यरत भारतीय आईटी कंपनियों पर पड़ेगा और उनका लाभ भी काफी कम हो जाएगा।
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यही नहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव के मद्देनजर प्रत्याशियों द्वारा जिस तरह आउटसोर्सिंग और व्यापार संरक्षण संबंधी नए एलान किए जा रहे हैं, उससे विश्व व्यापार को बढ़ाने के लिए कार्य कर रहे विश्व व्यापार संगठन की चिंताएं और बढ़ गई हैं। पिछले कुछ वर्षों में मंदी के प्रभाव से निपटने के लिए विभिन्न देशों की सरकारों ने वैश्विक व्यापार के रास्ते में बाधाएं खड़ी की हैं। जी-20 के सदस्य देशों ने करीब 550 वस्तुओं पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। कभी डब्ल्यूटीओ की ओर आशा भरी निगाहों से देखने वाले विकासशील देश अब खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।

नई तकनीक के कारण आईटी कंपनियों में रोजगार के घटते अवसरों पर भी ध्यान दिया जाना जरूरी है। हाल ही में एक चर्चित अमेरिकी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय आईटी सेवा उद्योग में 6.4 लाख निम्न कौशल वाले लोगों की नौकरियां अगले पांच वर्षों में ऑटोमेशन रोबोटिक्स और कृत्रिम खुफिया व्यवस्था बढ़ने से जा सकती हैं। वर्ष 2021 तक वैश्विक स्तर पर आईटी नौकरियों में नौ प्रतिशत कमी आने की बात है। घटती नौकरियों में आईटी से संबद्ध ज्ञान क्षेत्र के कर्मचारियों के साथ औद्योगिक व सेवा क्षेत्र के कर्मचारी भी दिखाई देंगे। भारत में आई बीपीएम कर्मचारियों की संख्या मौजूदा वित्त वर्ष में 15 लाख तक पहुंच गई है। नई तकनीक, जैसे ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और कृत्रिम खुफिया व्यवस्था बढ़ने के साथ भारत की आईटी कंपनियों में निचले और मझोले स्तर पर नौकरियों का अकाल पड़ गया है।
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निस्संदेह आईटी क्षेत्र में नौकरियां बचाने के लिए अमेरिका के आईटी से संबंधित विधेयक को पारित होने से रोकने के लिए भारत की ओर से हरसंभव प्रयास होते दिखाई दे रहे हैं। चूंकि प्रस्तावित विधेयक का मसौदा विश्व व्यापार संगठन के नियमों के खिलाफ है, इसलिए भारत द्वारा वैश्विक मंचों पर अमेरिका के आउटसोर्सिंग को हतोत्साहित करने वाले कदमों और नए वीजा विधेयक के मसौदे के मौजूदा स्वरूप पर कड़ी आपत्ति व्यक्त की जानी चाहिए। नई तकनीकें बड़ी संख्या में आईटी कर्मचारियों को बेकार बना रही हैं, ऐसे में आईटी कंपनियों द्वारा डिजिटल तकनीक और डिजाइन थिंकिंग जैसे नए तकनीकी प्रशिक्षण पर जोर दिया जाना चाहिए, ताकि आईटी उद्योग पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
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