फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

Economy: महंगाई घटने से विकास को मिली गति; कृषि-होटल उद्योग और निर्माण क्षेत्र का जीडीपी की बेहतरी में योगदान

सतीश सिंह
Updated Mon, 19 Jun 2023 06:02 AM IST

सार

अप्रैल में औद्योगिक उत्पादन 4.2 प्रतिशत रहा, जबकि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) 6.7 प्रतिशत बढ़ा है। एनएसओ के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल महीने में विनिर्माण क्षेत्र में 4.9 प्रतिशत और खनन में 5.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं, बिजली उत्पादन में 1.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन
आरबीआई - फोटो : पीटीआई


अप्रैल में औद्योगिक उत्पादन 4.2 प्रतिशत रहा, जबकि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) 6.7 प्रतिशत बढ़ा है। एनएसओ के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल महीने में विनिर्माण क्षेत्र में 4.9 प्रतिशत और खनन में 5.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं, बिजली उत्पादन में 1.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।


महंगाई में नरमी आने से केंद्रीय बैंक ने ताजा मौद्रिक समीक्षा में रेपो दर को 6.50 प्रतिशत पर यथावत रखा है, जबकि पिछले साल के मई महीने से अब तक रिजर्व बैंक ने रेपो दर में 250 आधार अंकों की बढ़ोतरी की। रिजर्व बैंक के इस फैसले को अप्रत्याशित माना जा रहा है, क्योंकि हाल में दुनिया के तमाम केंद्रीय बैंकों ने नीतिगत ब्याज दरों में इजाफा किया था। रेपो दर को यथावत रखने से जहां कर्जदारों को राहत मिलेगी, वहीं विकास की रफ्तार तेज होगी। रिजर्व बैंक चाहता है कि अर्थव्यवस्था की रिकवरी में और भी तेजी आए। रेपो दर में इजाफा न होने से बैंकों के शेयर में भी तेजी देखी गई है। डॉलर के मुकाबले रुपये में मामूली गिरावट दर्ज की गई है, पर अर्थव्यवस्था पर उसका नकारात्मक प्रभाव लगभग न के बराबर पड़ेगा। अभी रिजर्व बैंक का लक्ष्य विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाना है, ताकि आम आदमी को परेशानी न हो और विकास की रफ्तार में भी तेजी आए। रिजर्व बैंक के गवर्नर के अनुसार, कोरोना महामारी, भू-राजनीतिक संकट, महंगाई, वैश्विक अर्थव्यवस्था में नरमी के बावजूद बैंकिंग और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान भारत में मजबूत बने हुए हैं।


बीते महीनों में महंगाई में उल्लेखनीय कमी आने से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 6.1 प्रतिशत रही, जबकि दिसंबर, 2022 में मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने वित्त वर्ष 2022-23 की अंतिम तिमाही में जीडीपी के 4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था। वित्त वर्ष 2022-23 की चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर में बेहतरी होने से पूरे वित्त वर्ष की वृद्धि दर में सुधार दर्ज किया गया। पहले वित्त वर्ष 2022-23 में एमपीसी ने जीडीपी के 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था, जो हकीकत में 7.2 प्रतिशत रही।


कृषि, होटल उद्योग और निर्माण क्षेत्र ने जीडीपी की वृद्धि दर को बेहतर करने में विशेष योगदान दिया है। जीडीपी में वृद्धि के साथ-साथ निवेश और खपत में भी तेजी देखी जा रही है। वर्ष 2023 की पहली तिमाही में निवेश दर में 18.3 प्रतिशत और खपत में 13.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। निवेश में वृद्धि का मुख्य कारण सरकार की 'उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन' (पीएलआई) योजना है। इसकी वजह से कोरोना काल में कारोबारियों को मुश्किल दौर से बाहर निकलने में विशेष मदद मिली थी।


साफ है कि महंगाई की वजह से जीडीपी वृद्धि दर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। बीते वर्षों में महंगाई लगातार उच्च स्तर पर बनी हुई थी, पर अब उसमें गिरावट आ रही है। लिहाजा, उम्मीद की जानी चाहिए कि आगामी महीनों में भारत की विकास दर में और भी तेजी आएगी और अर्थव्यवस्था भी क्रमशः मजबूत होती जाएगी।

 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next