इस अंतहीन स्क्रॉलिंग, जिसे ‘डूमस्क्रॉलिंग’ कहते हैं, का हमारे ऊपर हावी होने लगना खतरनाक है। दुनिया में क्या घट रहा है, यह जानना महत्वपूर्ण है। जानकारी होने से बेहतर निर्णय लेने, अपने समुदायों से सार्थक रूप से जुड़ने और आसपास के लोगों को प्रभावित करने वाले परिवर्तनों पर प्रभावपूर्ण तरीके से प्रतिक्रिया देने में हमें मदद मिलती है। लेकिन स्वस्थ आहार की तरह खबरों के उपभोग को लेकर भी हमें होशियार रहने की जरूरत है, ताकि इसका सेहत पर विपरीत असर न पड़े। स्क्रॉलिंग की यह आदत हावी न हो, इसके कई तरीके भी हैं। शोध बताते हैं कि मोबाइल के उपयोग की सीमाएं निर्धारित करने से बहुत बड़ा फर्क पैदा हो सकता है।
यहां सवाल उठता है कि खुद को अपडेट रखना भी तो जरूरी होता है। फिर आप सही संतुलन कैसे बैठाएंगे? इस सवाल का जवाब एक दूसरा सवाल है। आप लगातार सूचनाओं को पाने के लिए खुद को बाध्य क्यों महसूस करते हैं? क्या हर जानकारी आपके लिए जरूरी है? अक्सर स्क्रॉल करते समय हम ध्यान ही नहीं रखते कि कौन-सी जानकारी कितनी महत्वपूर्ण है। शोध से पता चला है कि नकारात्मक खबरें आपकी नींद में खलल डालती हैं और चिंताएं बढ़ाती हैं। इसलिए कुछ तरीके अपनाकर सूचनाओं के इस मायाजाल से बच सकते हैं।
सोशल मीडिया एल्गोरिदम के तय करने के बजाय बेहतर यह होगा कि आप कुछ विश्वसनीय मीडिया संस्थानों के चुनींदा एप चुनें, जिससे संतुलित आहार की तरह हमारा दिमाग भी सही खबरें प्राप्त करे। कई बार शरीर को स्वस्थ रखने के लिए कुछ परहेज करने होते हैं, उसी तरह कोई चिंता या भावनात्मक संकट के लक्षण दिखें, तो बेवजह की सूचनाओं से ब्रेक लेना उचित होता है। समाचार या सोशल मीडिया के लिए निश्चित समय निर्धारित करें। विशेषकर सोने से एक-दो घंटे पहले, तो इनसे बिल्कुल दूरी बना लें। इसके अलावा, अब कई स्मार्टफोन यह सुविधा भी देते हैं कि आप उस पर अपना स्क्रीन टाइम सेट कर सकते हैं। जानकारी पाने का अभिप्राय यह नहीं है कि लगातार स्क्रीन से चिपके रहें।