धर्मग्रंथों में कहा गया है कि मन को वश में रखने वाला व्यक्ति ही वास्तव में विजेता है। ऐसा मानव जितेंद्रीय कहलाता है। इसी से जुड़ा एक प्रसंग विश्वविजेता सिकंदर से संबंधित है। एक बार वह कहीं से लौट रहा था। उसने रास्ते में एक वृक्ष के नीचे एक फटेहाल फकीर को बैठे देखा। फकीर मस्ती भरी तान में कुछ गा रहा था।
सिकंदर रुका और उसने पूछा, तुम कौन हो? फकीर ने उत्तर दिया, तू मुझे नहीं जानता। मैं दुनिया का बादशाह हूं। यह सुनकर सिकंदर मन ही मन हंसा और सोचने लगा कि असली बादशाह तो वह खुद है, जबकि यह नंगा फकीर खुद को बादशाह समझने का भ्रम पाले हुए है।
सिकंदर ने उससे पूछा, भैया, बादशाह की क्या पहचान होती है। फकीर ने जवाब दिया, क्या तुम यह नहीं जानते कि 'मन जीते जग जीते' के अनुसार, असली विजेता (असली बादशाह) मन को जीत लेने वाला होता है। जिसने मन को जीत लिया, वही बादशाह होता है। मैंने मन को जीत रखा है, इसलिए खुद को बादशाह मानकर मस्ती से जीवन बीताता हूं। सिकंदर उस मस्त फकीर के, जो अब उसकी नजर में असली बादशाह था, चरणों में नतमस्तक हो उठा।