तय कर लिया है इस बार मैं भी अपना जन्मदिन नहीं मनाऊंगी। प्राकृतिक आपदाओं के लिए मैं अपना व्यक्तिगत पैसा बचाऊंगी। महीने की ज्वेलरी, साड़ी तथा ब्यूटी पार्लर पर पैसा न बहाऊंगी। न डीजे पर थिरकूंगी, न ही मूवी देखने जाऊंगी। बस मां के चरणों में माथा टेककर आऊंगी। न पिज्जा, न बर्गर, न कोल्ड ड्रिंक्स मंगवाऊंगी, बस मां का आशीर्वाद तथा उनके हाथ से लड्डू खाकर काम चलाऊंगी। अपनी सभी सुख-सुविधाओं को छोड़कर सेवा ही लक्ष्य बनाऊंगी। बचाए पैसों से गरीबों, भूखों, लाचारों को भोजन कराऊंगी। उन पर बेइंतहा प्रेम दर्शाऊंगी। फिर अखबार तथा टीवी चैनलों तक अपने त्याग की खबर येन-केन प्रकारेण पहुंचाऊंगी।
जब चैनल वाले पूछेंगे कि मैडम, आज के स्वार्थी युग में इतनी दयालुता आप में कहां से आई, तब मैं झट से मोदी जी का नाम बताऊंगी और क्षण भर में उनकी समकक्षी बन जाऊंगी। हर अखबार, हर चैनल पर बस मैं ही नजर आऊंगी। मोदी जी का अनुकरण करके मैं भी महान बन जाऊंगी। हालांकि बड़े-बड़े हारों, उपहारों से वंचित रह जाऊंगी। बीते साल की मौज-मस्ती, शोर-शराबा याद कर बहुत पछताऊंगी। बड़े ही कशमकश में यह खास दिन काट पाऊंगी। फिर भी बनावटी हंसी के साथ मंद-मंद मुस्काऊंगी।
लोगों के सामने नतमस्तक होकर उच्च शिखर पर चढ़ जाऊंगी। अपने नाम के पर्चे पूरे देश में बटवाऊंगी और अपनी महानता से सभी का परिचय करवाऊंगी। क्या गरीब, क्या अमीर सभी के दिलों में अमिट छाप छोड़ जाऊंगी। छात्र-छात्राओं की शुभचिंतक, बेटियों की सहायक तथा गरीबों की मसीहा बन जाऊंगी। जनता के दिल-दिमाग में घुल-मिल जाऊंगी। नकली ही सही, पर त्याग की देवी कहलाऊंगी। अपनी चतुरता पर मैं मन ही मन इठलाऊंगी। अपनी मीठी, मधुर, रसमयी वाणी से सभी को लुभाऊंगी। दिलों में क्या, देश में मैं अपना ही परचम लहराऊंगी। देख लेना दोस्तो, अगली बार प्रधानमंत्री पद के लिए मैं ही चुनी जाऊंगी। इस बार मैं अपना जन्मदिन नहीं मनाऊंगी।