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मैं विवादित होना चाहता हूं

Wed, 30 Jan 2013 11:23 PM IST
शरद उपाध्याय
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इन दिनों मैं विवादास्पद होना चाह रहा हूं। हो सकता है, आपकी निगाह में यह ठीक न हो, लेकिन मैं इसे बुरा नहीं मानता। विवादास्पद होना हमारे देश का फैशन है। जब तक कोई बड़ा आदमी विवाद में न पड़े, वह बड़ा आदमी नहीं माना जाता है। मेरा मन कर रहा है कि किसी को गाली दे डालूं, किसी जाति या धर्म को पूरी तरह कोसने बैठ जाऊं, किसी भी संवेदनशील घटना पर ऊलजुलूल बयान दे दूं या किसी राष्ट्रीय पुरुष पर जूता उछाल दूं या मौका लगे, तो पिटाई ही कर दूं।
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जी नहीं, आज के दौर में विवादास्पद होना उतना सरल नहीं रहा। पहले शाकाहारी भोजन करने वाला आमलेट खाता दिख जाता था, तो एक विवाद खड़ा हो जाता था। लेकिन अब विवादों का स्तर बढ़ गया है। आज विवाद ही व्यक्तित्व को निखारते और उसे नया स्वरूप प्रदान करते हैं।

समाज अनेक महापुरुषों की गरिमामयी उपस्थिति से भरा है। अतः यहां पहचान का संकट खड़ा हो गया है। विवाद इसमें मदद करते हैं। मसलन, जब लोग इकट्ठा होकर शर्माजी पर बहस करते हैं, तो सभी उन्हें पहचान नहीं पाते। तब मजबूरन विवादों का सहारा लेना पड़ता है। अरे, वह सीमेंट घोटाले वाले शर्माजी। लोग अब भी असमंजस की स्थिति में है। सीमेंट वाले तो ठीक हैं, पर कौन-से? पुल वाले, बिल्डिंग वाले या नहर के सीमेंट के घोटाले वाले, यह स्पष्टीकरण देना पड़ता है।
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विवादास्पद होने की व्याख्या का यह असामान्य तरीका है। पर मैं ठहरा सामान्य-सा व्यक्ति। मेरे अंतर्मन में भी इस तरह के महान कार्य करने की असीम आकांक्षा है। किंतु पहुंच के बाहर होने के कारण मैं ऐसा कर पाने में असमर्थ हूं। अतः विवादास्पद बनने के लिए बयानबाजी से अधिक मेरे हाथ में कुछ नहीं है।

इसमें आपको कुछ नहीं करना है, सिर्फ अलग हटकर ऐसा कुछ बोलना है, जो लोगों को बुरा लगे या उन्हें चोट पहुंचा सके। जब आपके बोले हुए पर बवाल मचना शुरू हो जाए, तो फिर आपके पास यह कहने की सुविधा है कि आपने यह कहा ही नहीं या आपकी बात का गलत अर्थ लगा लिया गया। फिर बात बढ़ जाए, तो लगे हाथ माफी भी मांग लो। सच कहूं, तो जब समूचा देश विवादास्पद होने की होड़ में लगा हुआ है, तब किसी से पीछे रहना ठीक नहीं है। इसलिए फिलहाल मैं विवादित होने के नुस्खे सोच रहा हूं। इस बारे में आपके पास अगर कोई आइडिया हो, तो प्लीज बताएं।
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