एआई (AI) का दायरा दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। यह कम समय और कम लागत में वह काम कुशलतापूर्वक (skillfully) करता है, जो मनुष्य कर सकता है। एआई विभिन्न लक्षणों की निगरानी, आपातकालीन देखभाल (emergency care) में सहायता के माध्यम से बीमारियों का पता शुरुआती चरणों में ही लगाने में मदद करता है। रोबोट कठिन और आवश्यक सर्जरी में डॉक्टरों की मदद कर रहे हैं। रोबोटिक्स पुनर्वास केंद्रों में भी व्यायाम और उपचार के साथ व्यक्तियों की सहायता करते हैं। ट्रामा, ट्यूमर और संक्रमण की वजह से होने वाली हड्डी संबंधी बीमारी के इलाज में 3-डी प्रिटिंग (3D Printing) की वजह से क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिला है।
दरअसल, 3-डी प्रिटिंग के जरिये छिद्रयुक्त कस्टमाइज प्रत्यारोपण संभव होता है और इससे अंगों की सुरक्षा में मदद मिलती है। कई मामलों में अंग-विच्छेदन को रोका जा सकता है। जीनोम अनुक्रमण तकनीक की मदद से शुरुआती चरण में ट्यूमर का पता लगाया जा सकता है। गणितीय मॉडल के आधार पर सफलता/जटिलताओं आदि के बारे में भविष्यवाणी करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस/मशीन लर्निंग का अहम योगदान रहा है। मरीजों के लक्षणों के आधार पर गंभीर बीमारियों का पता लगाने के लिए एल्गोरिद्म के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल होता है।
इससे अलग-अलग इलाज के लिए बेहतर सलाह भी मिल पाती है। नई तकनीकों के जरिये डॉक्टर मरीज से दूर रहकर भी जरूरी सलाह दे सकते हैं। चिकित्सा शिक्षा संस्थानों में बड़े पैमाने पर सिमुलेशन प्रयोगशालाओं में सीखने की प्रक्रिया सामान्य कक्षाओं के मुकाबले ज्यादा दिलचस्प है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (एचपीसी), आईओटी सेंसर और 5जी जैसी आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से आबादी संबंधी डाटा का सटीक विश्लेषण किया जा सकेगा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में किए जाने वाले उपायों को ज्यादा प्रभावी, वास्तविक समय और लोगों की जरूरतों के हिसाब से सटीक बनाया जा सकेगा।
इस तरह ‘सभी के लिए स्वास्थ्य’ लक्ष्य पर बेहतर तरीके से अमल संभव हो सकेगा। जियोस्पेशल तकनीक, वीयरेबल तकनीक, माइक्रोब्लॉगिंग से जुड़ी निगरानी, 3डी प्रिटिंग, टेलीहेल्थ, क्लाउड आधारित इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य आधारभूत संरचना, ड्रोन तकनीक और इंटरनेट ऑफ मेडिकल थिंग्स जैसी आधुनिक तकनीक सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अहम है। रेडियोलॉजी चिकित्सा विज्ञान में आधुनिक तकनीकों का काफी ज्यादा प्रभाव देखने को मिल रहा है। इसके तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग एल्गोरिद्म की मदद से असामान्य तस्वीरों के बारे में सूचना हासिल की जा सकती है, ताकि गंभीर बीमारियों के बारे में जल्द से जल्द जानकारी हासिल की जा सके।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाले सॉफ्टवेयर कम रेडिएशन के साथ तस्वीर की गुणवत्ता बेहतर बनाने, बीमारी का सही-सही पता लगाने, कार्यबल क्षमता को बढ़ाने, रेडियोलॉजी विशेषज्ञों का बोझ कम करने, ज्यादा मरीजों पर नजर रखने और डॉक्टरों को उनके मोबाइल फोन पर अलर्ट भेजने में सहायक होते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमें बेहतर ढंग से बड़ी आबादी तक पहुंचने, बड़े पैमाने पर डाटा से निपटने और व्यक्तिगत स्तर पर चिकित्सा संबंधी उपाय सुझाने में मदद करता है। बहरहाल, प्राथमिक स्वास्थ्य की देखभाल करने वाले डॉक्टरों और मरीजों तक पहुंचने के लिए वैज्ञानिक संस्थानों द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि नीति-निर्माताओं को अब भी इस दिशा में काफी कुछ करने की जरूरत है, ताकि सीधे तौर पर जरूरतमंदों तक फायदा पहुंच सके। (-लेखक हिंदी विश्वकोष के पूर्व सहायक संपादक हैं।)