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कैसे लौटेगी पटरी पर रेल

Thu, 19 Feb 2015 07:59 PM IST
जयंतीलाल भंडारी
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आगामी 26 फरवरी को रेल बजट पेश करते हुए रेल मंत्री सुरेश प्रभु एक ओर रेल का मानवीय चेहरा कायम रखने, यात्रियों की सुविधाओं तथा सुरक्षा पर ध्यान देने के लिए प्रावधान करते हुए दिखाई दे सकते हैं, दूसरी ओर, वह भारतीय रेलवे को आधुनिकीकरण की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए कदम उठाते हुए भी दिखाई दे सकते हैं। मोदी सरकार का यह रेल बजट लोकप्रिय होगा, इसकी दो वजहें दिखती हैं। एक तो आगामी वर्षों में बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में चुनावों के मद्देनजर यात्री किराये में वृद्धि की उम्मीद नहीं है। दूसरे, सस्ते तेल के कारण रेलवे की ईंधन लागत में कमी आई है। लेकिन रेलवे की स्थिति संतोषजनक नहीं है। रेलगाड़ियों की संख्या कम पड़ रही है। रेल में सुविधाओं का भी भारी अभाव है। पिछले दस वर्षों में रेलयात्रियों की संख्या औसतन पांच फीसदी की रफ्तार से बढ़ने के कारण ट्रेनों में भीड़ बढ़ रही है। जबकि रेलयात्रियों की यात्रा सुगम बनाने के लिए रेलवे के पास संसाधनों का अभाव है।
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भारतीय रेलवे एशिया की सबसे बड़ी और दुनिया में अमेरिका के बाद दूसरी बड़ी रेल प्रणाली है। यहां रेल पटरियों पर रोजाना दौड़ने वाली करीब 12 हजार यात्री ट्रेनों में रोजाना लगभग ढाई करोड़ यात्री सफर करते हैं। रेलवे के पास विभिन्न एसी क्लास के उपभोक्ताओं की संख्या करीब दो फीसदी है, जबकि 98 फीसदी भार स्लीपर, जनरल और लोकल ट्रेनों के यात्रियों का है। इनमें आरक्षित श्रेणी के कोचों में रोजाना सिर्फ दस लाख यात्रियों के सफर के लिए बर्थ और सीट उपलब्ध कराने की क्षमता रेलवे के पास है। पिछले एक दशक में रेलयात्री दोगुने हो गए, जबकि रेल कर्मचारियों की संख्या करीब ढाई लाख घट गई। रेलवे में ओवरलोडिंग बढ़ा दी गई, पर पुल और पटरी की मरम्मत पर ध्यान नहीं दिया गया। ऐसे में बढ़ती रेल दुर्घटनाएं मानवीय भूल, रेलवे संसाधनों पर जरूरत से ज्यादा बोझ और नीतिगत खामियों का नतीजा हैं।

रेल मंत्रियों के लोकप्रियतावादी नजरिये के कारण भी रेलवे की आमदनी बढ़ाने से ध्यान हटा है। रेलवे का परिचालन अनुपात बढ़कर 93.5 फीसदी पहुंच गया है, जबकि छह वर्ष पहले यह अनुपात 76 प्रतिशत था। रेलवे की कमाई का 54 फीसदी पैसा कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और पेंशन पर खर्च हो रहा है। ऐसे में, रेल मंत्री के सामने सबसे बड़ी दुविधा यही है कि वह रेलवे की माली हालत को किराया और भाड़ा बढ़ाए बिना कैसे दुरुस्त रखें। पिछले कुछ समय में रेल ने न सिर्फ माल ढुलाई की मात्रा, बल्कि यात्रियों की संख्या भी खोई है।
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रेलवे को पटरी पर लाने के लिए कई चीजें जरूरी हैं। एक, रेलवे द्वारा बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण कार्यक्रम शुरू करना होगा, जिनमें नई पटरियां, हाई स्पीड रेल तथा फ्रेट कॉरिडोर शामिल हों। लंबी दूरी और उपनगरीय नेटवर्क को उससे अलग करना होगा। दूसरा, रेलवे की आर्थिक सेहत को सार्वजनिक निवेश और निजी निवेश के माध्यम से सुधारना होगा। निजी निवेश की सफलता पर ही सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) की सफलता निर्भर करेगी। तीसरा, रेलवे ढांचे को पुनर्गठित किया जाए, जिसमें निवेश आयोजना तथा परियोजना क्रियान्वयन में सुधार के साथ सुरक्षा मजबूत करने पर जोर हो। चौथा, रेलवे की आय बढ़ाने के लिए मालगाड़ियों में वैगनों की भार क्षमता बढ़ाई जाए।
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