पाकिस्तान आखिर कब तक कोरोना वायरस से बच सकता है, क्योंकि अफगानिस्तान और ईरान इससे सीधे जुड़े हैं और कई प्रवेश द्वार साझा करते हैं, जहां से अब कोरोना वायरस से मौत की खबरें आ रही हैं। दुनिया भर के कई देशों की तरह पाकिस्तान अपने पड़ोस में सीमाओं और प्रवेश द्वारों को बंद कर रहा है और कोरोना वायरस के कारण चीन से आने वाले विमानों को भी इजाजत नहीं दी जा रही है। देश भर में अट्ठारह प्रवेश बिंदुओं पर सभी यात्रियों की जांच की निगरानी की जा रही है और प्रवेश द्वारों के भीतर आने वाले हर व्यक्ति में लक्षणों का पता लगाने के लिए परीक्षण किया जाता है। ये प्रयास अब तक सफल रहे हैं, कोरोना वायरस के दो मामले ही अब तक सामने आए हैं।
लेकिन दिलचस्प बात है कि भारत के साथ सीमा अब भी खुली हुई है और कुछ हद तक अफगानिस्तान के साथ भी। अगर पाकिस्तान में कोरोना वायरस के आने का खतरा है, तो वह ईरान और अफगानिस्तान से, जिनके साथ पाकिस्तान लंबी और असुरक्षित सीमा साझा करता है।
कोरोना वायरस ने पाकिस्तान को कुछ खास कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। पाकिस्तान और भारत, दो ऐसे देश हैं, जिन्होंने चीन को भारी मात्रा में राहत सामग्री भेजी है। पाकिस्तान सरकार ने वायरस के प्रति सावधानी बरतने के लिए मास्क और अन्य जरूरी वस्तुओं का निर्यात रोक दिया था, लेकिन जब चीन से अनुरोध आया, तो पाकिस्तान ने इन वस्तुओं का निर्यात किया, क्योंकि चीन में इन आवश्यक जीवनरक्षक उपकरणों की कमी महसूस की जा रही थी।
ऐसे समय में जब भारत के साथ कूटनीतिक रिश्ते अपने निचले स्तर पर हैं और दोनों देशों के बीच व्यापार बंद है, अंतरराष्ट्रीय सीमा को खुला रखा गया है, जबकि कई भारतीय कोरोना वायरस से प्रभावित हुए हैं, लेकिन वहां की सरकार ने जल्दी से कदम उठाए और वायरस नहीं फैला। अब तक अफगानिस्तान से एक व्यक्ति के वायरस से प्रभावित होने की खबर आई है, लेकिन किसी की मौत की खबर नहीं है। लेकिन अगर प्रभावित लोगों की संख्या बढ़ती है, तो पाक-अफगान सीमा को भी बंद कर दिया जाएगा।
चूंकि अफगानिस्तान एक गरीब मुल्क है और खासकर ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सहायता तंत्र बेहद कमजोर है, इसलिए बड़ी संख्या में विदेशियों की उपस्थिति, विशेष रूप से अमेरिकियों की, पश्चिमी देशों को इस संकट में मदद करने के लिए मजबूर करेगी, अगर वायरस अफगानिस्तान के कुछ हिस्सों में फैलता है। इस हफ्ते ईरान ने घोषणा की कि उसके कुछ हिस्सों में कोरोना वायरस का पता चला है और कई लोगों की मौत हुई है, उसके बाद पाकिस्तान ने तुरंत ईरान में अपने कई प्रवेश द्वारों को बंद कर दिया और पाकिस्तानियों समेत किसी को भी मुल्क में प्रवेश करने से मना कर दिया। यहां तक कि व्यापारिक ट्रकों को भी रोक दिया गया है, जिससे पाक-अफगान सीमा के दोनों तरफ ट्रक फंसे पड़े हैं।
पाकिस्तान और ईरान 1,000 किलोमीटर की सीमा साझा करते हैं, जो न केवल काफी लंबी है, बल्कि असुरक्षित भी है। चूंकि ये सीमाएं जंगलों में और शहरों से दूर हैं, इसलिए सैकड़ों लोग बिना यात्रा वीजा के सीमा पार करते हैं। पड़ोसी मुल्कों के लिए असली चिंता अब ईरान को लेकर है। इस हफ्ते अफगानिस्तान ने भी ईरान से हवाई यातायात सहित सभी आवाजाही रोक दी।
इस समय ईरान के विभिन्न शहरों में गए कई पाकिस्तानी तीर्थयात्री ताफ्तान सीमा पर फंसे हुए हैं, क्योंकि पाकिस्तान सरकार उन्हें लौटने की इजाजत नहीं दे रही है। यहां तक कि पाकिस्तानी मजदूर, जो रोजाना ईरान काम करने के लिए जाते हैं, वे सीमा पर ईरान की तरफ फंसे हैं।
जिस तरह भारत समेत कई देशों ने चीन के वुहान क्षेत्र में अपने नागरिकों को बचाने के लिए विशेष विमान भेजे, पाकिस्तान ने अब तक ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है। सैकड़ों पाकिस्तानी छात्र वुहान में रहते हैं, जो रोज इमरान खान सरकार को याद दिला रहे हैं कि वे अपने वतन लौटना चाहते हैं, क्योंकि वहां बंद माहौल में रहना मुश्किल हो रहा है। हाल ही में बीजिंग स्थित पाकिस्तानी दूतावास के दो राजनयिकों को वुहान भेजा गया और वे हालात सामान्य होने तक पाकिस्तानी नागरिकों की देखभाल करेंगे।
पाकिस्तान का कहना है कि इन पाकिस्तानियों को वापस लाने के लिए उसके पास मजबूत स्वास्थ्य सहायता तंत्र नहीं है और अगर वे संक्रमित हैं और वायरस लाएंगे, तो यह बहुत मुश्किल होगा। जैसी कि दक्षिण एशिया में आम परंपरा है, उनके आगमन पर मित्र और रिश्तेदार उन्हें घेर लेंगे और ऐसे में आशंका है कि उनमें वायरस का संक्रमण हो सकता है। लेकिन वुहान में रहने वाले छात्रों के अभिभावक इस्लामाबाद हाई कोर्ट पहुंचे और धमकी दी है कि यदि ये छात्र वापस नहीं लौटे, तो वे स्वास्थ्य मंत्रालय का घेराव करेंगे। उन्होंने भारत और अन्य देशों का उदाहरण दिया, जिन्होंने अपने नागरिकों को वहां से वापस लाया। कुछ लोगों का कहना है कि पाक-ईरान सीमा पर फंसे पाकिस्तानी नागरिकों के लिए ईरान सरकार जिम्मेदार नहीं है, इसलिए उन्हें वापस लौटने की इजाजत दी जानी चाहिए।
पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में एक कोरोना वायरस आपातकालीन कोर समूह की स्थापना की है और कोरोना वायरस का सामना करने के लिए व्यापक योजना बनाई है, जिसकी निगरानी राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित प्रधानमंत्री के सहायक कर रहे हैं। फिलहाल पाकिस्तान का कहना है कि कोरोना वायरस से निपटने के लिए सभी संभव कदम उठाए जा रहे हैं और वह इस संबंध में किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। कोरोना वायरस के संभावित मामलों को लेकर अस्पतालों में अलग वार्ड की व्यवस्था की गई है। केंद्र सरकार ने कोरोना वायरस से निपटने के लिए प्रांतों के साथ मिलकर प्रभावी कदम उठाए हैं।
लेकिन सवाल यह उठता है कि जब सिंगापुर जैसा देश, जिसके पास विश्वस्तरीय चिकित्सा तंत्र और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली है, 89 मामलों का सामना कर रहा है, और अपने लोगों को इस संकट के लिए तैयार कर रहा है, तो अफगानिस्तान और पाकिस्तान जैसे आर्थिक रूप से कमजोर देश इस संकट से कैसे निपटेंगे!