समाजवादी राजनीति का बुनियादी सिद्धांत अमीरों से धन का दोहन कर गरीबों के पक्ष में खर्च करना और सत्ता अर्जित कर अमीरों में भय पैदा करना है। बीस जुलाई को बैंकों के राष्ट्रीयकरण की पचासवीं वर्षगांठ थी। उम्मीद के मुताबिक ही, इस अफसाने को तार्किक और तीखी आलोचना के साथ याद किया गया। कई लोगों के लिए यह इंदिरा गांधी को खारिज करने का अवसर था, तो दूसरों के लिए इतिहास को दोष देने का।
नीतियों के मूल्यांकन में संदर्भ और परिस्थिति महत्वपूर्ण होती हैं। मेरी पुस्तक एक्सीडेंटल इंडिया के दास कैपिटल अध्याय में एक साथ आने वाले राजनीतिक और आर्थिक संकट के बारे में बताया गया है। बड़े पूंजीपति, जो बैंकों के मालिक भी थे, बचत को हथिया लेते थे और आपस में कर्ज बांट लेते थे, जिससे हरित क्रांति और छोटे उद्योगों के लिए धन मिलना मुश्किल हो जाता था। राजनीतिक धरातल पर इंदिरा गांधी ने एक आर्थिक जरूरत को राजनीतिक गुण में बदल दिया।