भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्यक्ष का पदभार संभालने के तुरंत बाद शशांक मनोहर ने जिस अंदाज में बयान दिया, उससे यही लगता है कि जल्दी ही चीजें बदलेंगी। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि बोर्ड की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाई जाएगी और जवाबदेही तय होगी। बोर्ड में एक एथिक्स अफसर नियुक्त किया जाएगा, राज्य संघों के खातों की जांच के लिए स्वतंत्र ऑडिटर रखे जाएंगे, 25 लाख रुपये से अधिक के हर खर्च की जानकारी बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध होगी तथा हितों के टकराव की शिकायतें दूर करने के लिए एक माह के भीतर नए नियम बना दिए जाएंगे।
शशांक मनोहर बोर्ड की राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं और ईमानदार माने जाते हैं। वह पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन के कट्टर विरोधी हैं और कड़े फैसले लेने से नहीं हिचकिचाते। ललित मोदी पर आजीवन प्रतिबंध लगाने का बड़ा निर्णय उनके पहले कार्यकाल में ही हुआ था। आईपीएल में सट्टेबाजी का खुलासा होने पर जब बोर्ड की बैठक में कोई सदस्य तत्कालीन अध्यक्ष श्रीनिवासन के खिलाफ चूं करने का साहस नहीं करता था, तब शशांक ही थे, जिन्होंने उनका इस्तीफा मांगा था। जगमोहन डालमिया के निधन की वजह से बीसीसीआई की राजनीति में सारे समीकरण उलट-पलट गए हैं। महज एक साल पहले दो तिहाई वोट अपनी जेब में रखने वाले श्रीनिवासन अभी अलग-थलग पड़ चुके हैं। बोर्ड अध्यक्ष पद वह पहले ही गंवा चुके थे, अब आईसीसी के अध्यक्ष की कुर्सी भी खतरे में है। फिलहाल बीसीसीआई की तीस इकाइयों में से दो तिहाई से अधिक पर किसी न किसी दल का शिकंजा है। दस से ज्यादा इकाई तो भाजपा के कब्जे में हैं। शशांक मनोहर तभी अध्यक्ष बने, जब भाजपा और एनसीपी ने हाथ मिलाया। नए अध्यक्ष को भले कड़क माना जाता हो, पर राजनीतिक दलों के निर्देशों की उपेक्षा करना उनके लिए संभव नहीं।
बीसीसीआई एक गैर मुनाफे वाली निजी संस्था के तौर पर रजिस्टर्ड है, फिर भी उसके खाते में अरबों रुपये हैं, जिसमें हेरा-फेरी की शिकायत अक्सर सुनने को मिलती है, फिर भी किसी का कुछ नहीं बिगड़ता। अच्छी बात है कि बीसीसीआई के नए अध्यक्ष ने राज्य इकाइयों के खातों का निष्पक्ष ऑडिट कराने का आश्वासन दिया है। बोर्ड के अनेक पदाधिकारियों और नामी खिलाड़ियों के आर्थिक हित आईपीएल टीमों और आयोजन गतिविधियों से जुड़े हैं। ललित मोदी के निकटवर्ती संबंधियों के राजस्थान रॉयल्स और पंजाब की टीम में शेयर होने का खुलासा काफी पहले हो चुका है। कुछ दिन पूर्व ललित मोदी की आईसीसी को भेजी एक मेल लीक हुई थी, जिसमें चेन्नई सुपर किंग के तीन खिलाड़ियों (सुरेश रैना, रविंद्र जड़ेजा, डी ब्रेवो) पर मुंबई के एक व्यापारी से 20-20 करोड़ रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया था। शशांक मनोहर के सामने सबसे बड़ी चुनौती बोर्ड को ऐसे जंजालों से मुक्त कराना है।
अभी तक सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त लोढ़ा समिति की पूरी सिफारिश नहीं आई है। सट्टेबाजी में आईपीएल के सीओओ सुंदर रमन की भूमिका पर निर्णय आना शेष है। गत वर्ष मुद्गल समिति ने 13 संदिग्ध खिलाड़ियों के नाम एक बंद लिफाफे में अदालत को सौंपे थे। शशांक मनोहर को ये नाम सार्वजनिक करने चाहिए। बीसीसीआई की कार्यप्रणाली में सुधार संबंधी सुझाव देने का काम भी लोढा पैनल के जिम्मे है। उम्मीद है, वह रिपोर्ट आने के बाद नए अध्यक्ष उस पर अमल का काम युद्ध स्तर पर करेंगे।