बुरे दिनों से तंग आकर तान्या ने अपने पिता अमन से कहा, बहुत कठिन समय है! मैं भीतर-ही-भीतर टूट गई हूं। जब तक हम एक मुसीबत से पार पाते हैं, तब तक नई मुसीबतें सामने खड़ी हो जाती हैं। ऐसा कब तक चलेगा? अमन कहीं रसोइए का काम करते थे। बेटी की बात सुनकर वह उठे और सामने रखे चूल्हे पर तीन बर्तनों में पानी भरकर तेज आंच पर चढ़ा दिया। जब पानी उबलने लगा, तो उन्होंने एक बर्तन में आलू, दूसरे में कंद, और तीसरे में कॉफी के बीज डाल दिए।
कुछ देर बाद अमन ने चूल्हे का बर्नर बंद कर दिया और आलू तथा कंद निकालकर एक तरफ रख दिया और एक कप में कॉफी उड़ेल दी। फिर उन्होंने तान्या से कहा, बताओ कि यह सब क्या है? बेटी ने कहा, आलू, कंद और कॉफी हैं। यह सुनकर अमन ने कहा, इन्हें करीब से और छूकर देखो। बेटी ने आलू को उठाकर देखा, वे नरम हो गए थे। कंद थोड़ा सख्त हो गया था और कॉफी से ताजा महक उठ रही थी। फिर वह अमन की तरफ कौतूहल से देखने लगी।
अमन ने उसे समझाया, मैंने आलू, कंद और कॉफी को एक ही तरह से खौलते पानी में डाला, लेकिन हर एक ने गर्म पानी का अपनी तरह से सामना किया। आलू पहले तो कठोर और मजबूत थे, लेकिन खौलते पानी में वे नरम हो गए। कंद कुछ कमजोर थे, मगर गर्म पानी में वे कठोर हो गए। और कॉफी की बात ही अलग है। उबलते पानी ने उसे बदल ही डाला और उसे एक ऐसी चीज बना दिया, जो खुशनुमा एहसास से सराबोर कर देती है।
अमन ने पूछा, अब तुम मुझे बताओ कि जब मुसीबतें तुम्हारा द्वार खटखटाती हैं, तो तुम क्या जवाब देती हो? तुम इन तीनों में से क्या हो?