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कैसे रची गई एलिस इन वंडरलैंड?

Thu, 04 Jul 2013 12:51 PM IST
रमण कुमार सिंह
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आज ही के दिन यानी चार जुलाई, 1865 को एक ऐसी किताब का प्रकाशन हुआ, जिसने दुनिया भर में धूम मचा दी।
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एलिसेस एडवेंचर इन वंडरलैंड नामक इस पुस्तक (जिसे सामान्यतः एलिस इन वंडरलैंड कहा जाता है) की रचना एक अंग्रेज लेखक चार्ल्स लुटविज डॉगसन ने लेविस कैरोल के छद्मनाम से की थी।

दुनिया भर के लोगों को अपने कथाप्रवाह में बहा ले जाने वाले इस मशहूर उपन्यास में एलिस नाम की एक लड़की की कहानी है, जो खरगोश का पीछा करते-करते उसकी मांद में गिर जाती है और फिर खुद को एक ऐसे आश्चर्य लोक में पाती है, जहां सबकुछ अजीबोगरीब है, जैसे एलिस का अपने ही आंसुओं के तालाब में तैरना, उसकी गर्दन की लंबाई सामान्य से ज्यादा बढ़ जाना, विचित्र किस्म के जंतुओं का अजीब व्यवहार आदि।
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प्रतीकात्मक ढंग से बच्चों के लिए लिखी गई इस पुस्तक का ताना-बाना इतना तर्कपूर्ण है कि बच्चे ही नहीं, बड़े भी इसके कौतुहलपूर्ण रोचक कथारस का आनंद लेने से खुद को रोक नहीं पाते। महारानी विक्टोरिया एवं ऑस्कर वाइल्ड भी इस पुस्तक के प्रशंसकों में रहे हैं। महारानी विक्टोरिया ने लेखक से यह आग्रह भी कर डाला था कि वे जब इस उपन्यास का अगला भाग लिखें, तो उसे उन्हें समर्पित करें।

अपने अनूठे संवाद, विरल कथाप्रवाह एवं अद्भुत काल्पनिकता के कारण यह पुस्तक एक श्रेष्ठ साहित्यिक रचना मानी जाती है। इसे लिखे जाने की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है।

इसके प्रकाशित होने से तीन वर्ष पूर्व चार्ल्स लुटविज डॉगसन अपने साथी राबिन्सन डकवर्थ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वॉयस चांसलर हेनरी लिडेल की तीन बेटियों तेरह वर्षीय लोरिना शॉर्लेट, दस वर्षीय एलिस प्लीजेंस और आठ वर्षीय एडिथ मैरी के साथ नाव में यात्रा कर रहे थे।

यह यात्रा ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के पास फॉली ब्रिज से शुरू हुई थी और पांच मील दूर गोस्तोव गांव में खत्म हुई। सफर को आसान बनाने के लिए डॉगसन ने उन बच्चियों और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के आसपास के इलाको को ही केंद्र में रखकर एक कहानी बुन डाली। कहानी की मुख्य पात्र एलिस एक उदास बच्ची थी, जिसे रोमांच की तलाश थी। यह कहानी उन तीनों बहनों को काफी पसंद आई।

एलिस ने तो बाद में डॉगसन से उसे अपने लिए लिपिबद्ध करने का आग्रह तक कर डाला। अगले ही दिन डॉगसन इसे लिखने में जुट गए। 26 नवंबर, 1864 को उन्होंने इस पुस्तक की हस्तलिखित पांडुलिपि एलिस के हाथों में क्रिसमस के उपहार के तौर पर सौंप दी। इस तरह इस सुप्रसिद्ध कृति का जन्म हुआ।
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यह पुस्तक इतनी लोकप्रिय हुई कि इसके शीर्षक को मुहावरे की तरह प्रयोग में लाया जाता है। इस पुस्तक के आधार पर कई फिल्म एवं धारावाहिक भी बन चुके हैं। दुनिया की करीब सौ से अधिक भाषाओं में इसका अनुवाद हो चुका है।
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