फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विद्रोह से मिलती न्याय की आस

Wed, 06 May 2015 08:42 PM IST
सुभाषिनी सहगल अली
विज्ञापन
विज्ञापन
वर्ष 2012 में 16 दिसंबर की रात दिल्ली में एक वीभत्स घटना हुई थी। उस निर्भया बलात्कार कांड के बाद शुरू हुए विरोध-प्रदर्शनों को देखते हुए सरकार ने न्यायमूर्ति जे एस वर्मा की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया। अपनी रिपोर्ट की भूमिका में न्यायाधीश वर्मा ने लिखा है, 'यह बहुत अफसोसनाक है कि सरकार को इस स्थिति की गंभीरता समझाने के लिए कि देश की महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाया जाना और टाला नहीं जा सकता है, 16 दिसंबर, 2012 को एक असुरक्षित नवयुवती के साथ देश की राजधानी में विक्षिप्त पुरुषों के समूह द्वारा क्रूर सामूहिक बलात्कार का होना आवश्यक था। हमें उम्मीद है कि शासन के तीनों अंग... इसके द्वारा दिए जा रहे सुझावों को उनके तार्किक मकसद तक पहुंचाएंगे।' इसके बाद वाले वाक्य में न्यायमूर्ति वर्मा कहते हैं, 'हम कुछ संतोष के साथ यह नोट करते हैं कि इस आयोग के कार्यकाल के दौरान ही, शासन ने सार्वजनिक यातायात प्रणाली में महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति सुधारने के लिए कुछ कदम उठाए हैं' (सरकार ने सड़कों पर सीसीटीवी बढ़ाने, बसों की चेकिंग कराने और पेट्रोल वैन की संख्या बढ़ाने के आदेश पारित किए थे)।
विज्ञापन


पिछले दिनों पंजाब के मोगा में घटी घटना के संदर्भ में न्यायमूर्ति वर्मा का यह संतोष विडंबना ही है। मोगा की घटना, उबर टैक्सी की घटना, हरियाणा के एक बस में घटी घटना, दिल्ली के मेट्रो की घटना, ट्रेनों में घटनाएं- सब बताते हैं कि महिलाओं के लिए सुरक्षित माने जाने वाले सार्वजनिक यातायात द्वारा किया जाने वाला सफर उनके लिए तमाम खतरों का स्थान है। इन जगहों को सुरक्षित बनाने की जिम्मेदारी बार-बार उनके मालिक या उनको चलाने वाली सरकार के कंधों पर डालने की कोशिश भी हर घटना के सुर्खियों में आने के बाद की जाती है।

बहरहाल, जिस बस में निर्भया के साथ बलात्कार किया गया था, उसके मालिक को तिहाड़ जेल में कई महीनों तक बंद रखा गया था। वह तब छूटा, जब उसने सरकारी गवाह बनना स्वीकार किया। उसे अपनी बसों पर काम करने वालों की नियुक्ति और बसों में सुरक्षा संबंधी यंत्रों को लगवाने का काम भी करना पड़ा। इसी तरह, जब उबर टैक्सी में एक महिला के साथ उसके चालक ने बलात्कार किया, तो उबर कंपनी के बड़े अधिकारी को पूछताछ के लिए पुलिस ने बुलाया और कई महीनों तक कंपनी की टैक्सियों का चलना देशभर में बंद कर दिया गया था। कंपनी को चालकों की नियुक्ति में सुधार करने और टैक्सियों में सुरक्षा यंत्र लगाने के बाद ही उबर को अपना काम फिर से शुरू करने की अनुमति मिली। बादल परिवार (पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल की कंपनी ऑर्बिट की बस में यह घटना हुई) के साथ ऐसा करने की हिम्मत पंजाब का शासन-प्रशासन नहीं जुटा पाया है। लेकिन इसके लिए चल रहा जनता का आंदोलन अभी शांत नहीं हुआ है। निर्भया हो या मोगा कांड की पीड़िता- दिल्ली और पंजाब की सरकारों ने उन्हें न्याय से वंचित रखने की ही पूरी कोशिश की। उन्हें न्याय दिलाने की प्रक्रिया तो जनता के आक्रोश का नतीजा थी। इस आक्रोश का सुलगते रहना ही न्याय पाने की संभावना को जिंदा रख सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


-माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य और पूर्व सांसद
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें