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सम्मान: सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा...भारतीयता को नई पहचान देती धुन

उमेश चतुर्वेदी
Updated Thu, 23 May 2024 05:01 AM IST

सार

आठ महीने के भीतर दूसरा मौका है, जब व्हाइट हाउस की दीवारें इस गीत की गवाह बनीं। यह अमेरिका में भारतीयों की बढ़ती साख को दर्शाता है।
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भारत, अमेरिका - फोटो : एएनआई (फाइल)


एक दौर में पश्चिमी देश भारत को भिखारियों और सपेरों का देश कहकर हंसी उड़ाते थे। कमोबेश आज भी पश्चिमी देशों का रुख कुछ वैसा ही था। इसे बिडंबना ही कहेंगे कि जिस अंग्रेजी हुकूमत ने हिंदी को खड़ी बोली के रूप में स्थापित किया, उसी के एक अधिकारी मैकाले की शिक्षा नीति के चलते भारतीय भाषाएं अपनी ही धरती पर दोयम दर्जे की बनकर रह गईं। ऐसे में भारतीय भाषाओं को वैश्विक स्तर पर उचित मान मिलना मुश्किल था। अमेरिका हो या ब्रिटेन या फिर दूसरे पश्चिमी देश, मध्यकाल से ही उनकी सोच साम्राज्यवादी रही है, अब स्थितियां बदल रही हैं।


अब अमेरिकी सरकार अपने राष्ट्रपति के भाषणों का हिंदी में अनुवाद कराती है और भारतीयों की भावनाओं की कद्र करने लगी है। इस बदलाव की वजह बना है 21वीं सदी में उभरता भारत, जो दुनिया की चौथी बड़ी सैन्य ताकत बन चुका है और अन्न उत्पादन के पैमाने पर भी दुनिया में चौथे पायदान पर खड़ा है। भारत अब दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। विकसित देशों की तरह अंतरिक्ष तकनीक में भारत की भी साख स्थापित हो चुकी है। भारत के सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की धूम पूरी दुनिया में है। देश की आर्थिक, सैन्य या ज्ञान की क्षमता बढ़ती है, तो दुनिया उसका मान करने लगती है। यही वजह है कि अब अमेरिका के व्हाइट  हाउस में कभी सारे जहां से अच्छा... पूरे तरन्नुम में सुनाया जाता है, तो कभी दीपावली मनाई जाती है। आठ महीने के भीतर यह दूसरा मौका है, जब व्हाइट हाउस की दीवारें सारे जहां से अच्छा... तरन्नुम की गवाह बनी हैं। इस बार यह गीत अमेरिकी भारतीयों के सम्मान में बजाया गया।


अमेरिकी उद्योग, ज्ञान व अर्थव्यवस्था में भारतीयों की उपस्थिति से सकारात्मक बदलाव आए हैं। वहां की स्वास्थ्य सेवा हो या फिर सॉफ्टवेयर उद्योग की भारतीयों के बिना कल्पना बेमानी है। अमेरिकी सैन्य सेवा में भी भारतीय हैं। भारतीयों की बढ़ती हैसियत के चलते ही अंकल सैम के देश में भी भारतीय भाषाओं का मान बढ़ा है। अमेरिकी सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका की आबादी का करीब 1.35 फीसदी भारतीय हैं, जिनकी संख्या तकरीबन पचास लाख है। तैंतीस करोड़ की आबादी वाले देश में यह संख्या बहुत ज्यादा भले न हो, लेकिन आर्थिक, तकनीकी व दूसरी सेवाओं में अपनी उल्लेखनीय उपस्थिति के चलते भारतीयों की यह संख्या सबका ध्यान खींचती है। अमेरिका में भारत के विभिन्न प्रांतों के लोग रह रहे हैं, जिनकी अपनी-अपनी बोली है। लेकिन ज्यादातर की आपसी संपर्क भाषा हिंदी ही है। करीब पांच लाख पाकिस्तानी, करीब सवा दो-दो लाख नेपाली व बांग्लादेशी नागरिकों को जोड़ दें, तो इस बड़ी जनसंख्या के आपसी संवाद का माध्यम हिंदी है। यही वजह है कि अमेरिका में हिंदी के प्रति नया नजरिया विकसित हो रहा है।


अल्लामा इकबाल का लिखा यह तराना न सिर्फ भारतीयता, बल्कि अपनी संस्कृति और सभ्यता का भी गान है। शायद ही कोई भारतीय होगा, जिसके कानों में जब कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी/सदियों रहा है दुश्मन, दौर-ए-जमां हमारा गूंजती है, तो रोमांच न होता हो। जिस आजादी के आंदोलन के दौर में यह गीत लिखा गया था। भारत ने दौर-ए जमां की दुश्मनी से हुए नुकसान को पीछे छोड़ते हुए लंबी यात्रा तय कर ली है। इस यात्रा के साक्षी और भागीदार पश्चिमी दुनिया में अपने हुनर और प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। पश्चिमी दुनिया में वे भारतीय क्षमता के प्रतीक और राजदूत हैं। उन्हीं के जरिये भारत के सम्मान और ताकत को पश्चिम न सिर्फ महसूस करता है, बल्कि देखता भी है। इसी वजह से दुनिया के सबसे ताकतवर शख्सियत के निवास में सारे जहां से अच्छा... की धुन अब सम्मानपूर्वक बजती है और भारतीयता को नई पहचान देती है।

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