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कोविड मरीजों के लिए मददगार ऑक्सीमीटर

डॉ. आर. कुमार
Updated Thu, 03 Sep 2020 01:56 AM IST
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Oximeter

कोरोना संक्रमित कुछ लोगों के रक्त में ऑक्सीजन का स्तर खतरनाक रूप से कम होता है और उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं होता कि उनका जीवन खतरे में है। चूंकि उन्हें सांस लेने में कोई परेशानी नहीं होती, इसलिए उन्हें यह महसूस नहीं होता कि उनकी स्थिति गंभीर हो सकती है।



इस तरह की घटना चिकित्सकों के बीच चिंता पैदा कर रही है, क्योंकि ऐसे मरीजों को बचाने के लिए आपातकालीन चिकित्सीय देखरेख की जरूरत होती है। ऐसा बुखार कम होने पर (सात से नौ दिन के बीच) ज्यादा दिखाई देता है।


ऐसा उन मरीजों में दिखाई देता है, जिनकी कोई सह-रुग्णता की स्थिति नहीं होती। हाइपोक्सिया का समय पर पता लगने से मृत्यु को टाला जा सकता है। ऐसे मरीज कम ऑक्सीजन स्तर के बावजूद जागृत, सतर्क और खुश हो सकते हैं; इसे खुश हाइपोक्सिया या कम ऑक्सीजन संतृप्ति कहा जाता है। एक औसत स्वस्थ युवा व्यक्ति, (पुरुष या महिला) का ऑक्सीजन स्तर 99 से 97 फीसदी तक होगा।


आम तौर पर, हाइपोक्सिया में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ा होता है और व्यक्ति चिड़चिड़ा होता है। लेकिन कोविड मरीजों में हाइपोक्सिया में, फेफड़े का लचीलापन सामान्य होने से कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर सामान्य हो सकता है।


यदि चलने या बात करने पर ऑक्सीजन का स्तर चार से अधिक गिरता है, तो यह हाइपोक्सिया का पहला संकेत है, इसलिए घर पर ही ऑक्सीजन थेरेपी शुरू कर देनी चाहिए। टीएलसी, डीएलसी और ईएसआर जैसे नियमित रक्त परीक्षण से इसके संकेत मिलते हैं।


बढ़ा हुआ ईएसआर, सीआरपी स्तर शरीर में सूजन का संकेत है। ऑक्सीजन संतृप्ति का स्तर महत्वपूर्ण है; ऑक्सीमीटर यह पता लगाने में मदद कर सकता है कि क्या हाइपोक्सिया मौजूद है, जो एक साइलेंट किलर हो सकता है।


ऑक्सीजन की कमी तुरंत स्पष्ट नहीं हो सकती है, क्योंकि वायरस फेफड़ों पर इस तरह से हमला करता है कि रोगी धीरे-धीरे समय के साथ कम से कम ऑक्सीजन प्राप्त करता है। इसकी क्षतिपूर्ति के लिए लोग तेजी से और गहरी सांस लेते हैं, और श्वसन में बदलाव से निमोनिया के कुछ लक्षण दिखाई देते हैं।
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ये तेज, गहरी सांसें वास्तव में फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इन मरीजों पर वायरस का असर और ज्यादा हो सकता है, क्योंकि वे जोर-जोर से सांस लेते हैं। सांस लेने में यह तकलीफ फेफड़ों में सूजन का संकेत है, जो शरीर के अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन से वंचित रखता है।


इन रोगियों में से कुछ को वेंटिलेटर पर रखा जाना चाहिए, जो उन्हें सांस लेने में मदद करता है, क्योंकि उनका शरीर वायरस से लड़ता है। हालांकि, वेंटिलेटर के बावजूद, इनमें से अधिकांश रोगी नहीं बचते हैं।


विशेषज्ञ बताते हैं कि कोविड-19 में फेफड़े शुरू में 'मुलायम' बने रहते हैं, जिसका अर्थ है कि द्रव अभी तक कठोर या भारी नहीं हुआ है, इसलिए वे कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ने में सक्षम होते हैं, हालांकि शरीर को ऑक्सीजन प्रदान करने की उनकी क्षमता क्षीण हो जाती है।


कार्बन डाइऑक्साइड के निर्माण से मरीज सुस्त या बेहोश हो जाते हैं। ऑक्सीजन की कमी का शीघ्र निदान यह है कि मरीज को तुरंत ऑक्सीजन दिया जाए और उसे पेट के बल लिटा दिया जाए, इससे वेंटिलेटर की जरूरत कम हो सकती है।


यदि किसी को कोविड का सामान्य मामला है और वह घर पर ही खुद से उपचार कर रहा है, तो ऑक्सीमीटर ऑक्सीजन की जांच के लिए एक सहायक उपकरण हो सकता है, ताकि कम ऑक्सीजन स्तर का शीघ्र पता चल सके।


यह उपकरण उंगलियों में रक्त में प्रकाश किरणों के जरिये गुजरता है और हीमोग्लोबिन द्वारा प्रकाश अवशोषण के आधार पर ऑक्सीजन संतृप्ति की गणना करता है। यह सलाह दी जाती है कि यदि रीडिंग कम रेंज में हो, तो डॉक्टर की सलाह लें, क्योंकि गलत पॉजिटिव या गलत निगेटिव की गणना भी हो सकती है।


रक्त में ऑक्सीजन की कमी कई स्थितियों में हो सकती है-घुटन, श्वसन मार्ग में अवरोध, संक्रमण जैसे निमोनिया, फेफड़ों का कैंसर, जहरीले रसायनों का सांस के जरिये अवशोषण, हृदयाघात या हर्ट अटैक, एलर्जी की प्रतिक्रियाएं, सामान्य एनिस्थिसिया और सोते हुए श्वास-अवरोध इत्यादि। यह चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है और न ही यह कोविड का निदान कर सकता है। (लेखक वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं।)

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