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मैं तो बस मजाक कर रहा था: रिश्तों में हल्की छेड़छाड़ अक्सर घोलती है मिठास, लेकिन ज्यादा तकलीफदेह भी

जैन्सी डन, द न्यूयॉर्क टाइम्स Published by: Devesh Tripathi Updated Sun, 03 May 2026 06:50 AM IST

सार

रिश्तों में हल्की छेड़छाड़ अक्सर मिठास घोलती है, लेकिन जब यही मजाक चुभने लगे, तो कई बार यह कहना काफी नहीं होता कि मैं तो बस मजाक कर रहा था।
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रिश्तों में हंसी मजाक - फोटो : Adobe Stock


यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड में फैमिली साइंस की चेयर, डॉ. स्मिथ-बाइनम ने कहा कि इस तरह की प्यार भरी छेड़छाड़ रिश्तों को मजबूत बना सकती है, पर एक नुकसानदायक छेड़खानी भी होती है, जिससे आपको शर्म या गुस्सा आ सकता है। वह आपकी सुरक्षा व भरोसे की भावना को कमजोर कर सकती है। इसलिए, मैंने विशेषज्ञों से पूछा कि यह कैसे पता चले कि कोई अपनी हद पार कर रहा है और उसे कैसे रोका जाए?


मनोचिकित्सक बिल एडी कहते हैं कि अगर आपकी अंतरात्मा कहती है कि आपके साथ किया जा रहा हंसी-मजाक तकलीफदेह है, तो इस पर ध्यान देना जरूरी है। वैंकूवर आइलैंड यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान के प्रोफेसर कैमरन गॉर्डन कहते हैं कि अक्सर मजाक करने वाले यह कहकर बच निकलते हैं कि वे तो बस मजाक कर रहे थे। पर इससे उस व्यक्ति की तकलीफ कम नहीं होती, जिसका मजाक उड़ाया जा रहा हो। अगर यह लगातार हो रहा है, तो इसके पीछे वजह जरूर पूछें। आप लोगों से पूछ सकते हैं कि ‘क्या आपका इरादा मेरी भावनाओं को ठेस पहुंचाने का था? क्योंकि यह बात मुझे मजाकिया नहीं लग रही।’ एडी ने कहा कि अगर आप किसी को अपने साथ मजाक करने से रोकना चाहते हैं, तो कम शब्दों में सीधे अपनी बात रखें। आप कह सकते हैं कि मुझसे ऐसा मजाक न करें, तो मुझे अच्छा लगेगा। यह बिना किसी टकराव के व्यक्ति को उसकी गलती का एहसास करा देता है।


डॉ. गॉर्डन ने कहा कि अगर सार्वजनिक रूप से कोई आपका मजाक उड़ा रहा है, तो उसे किनारे ले जाकर अकेले में कहें कि तुम्हारी बातें मुझे चुभ रही हैं। हालांकि, डॉ. बाइनम ने कहा कि हल्की-फुल्की छेड़छाड़ में कुछ ऐसे पल भी होते हैं, जिन्हें बाद में याद करने पर मन को एक सुखद एहसास होता है-ठीक वैसे ही, जैसे उनके रिश्तेदारों ने जहाज में मां को खोने पर उनसे मजाक किया था।
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