कई बार किताबें सेल्फ से उड़ती भी दिखीं। एक समाजशास्त्री के रूप में मेरा काम भूत, परग्रही जीवों, पिरामिड शक्ति और अंधविश्वास जैसी चीजों में लोगों के विश्वास को परखना है। मैं मानता हूं कि असाधारण दावों की पुष्टि के लिए असाधारण सबूतों की आवश्यकता होती है। लोग जब अजीब आवाजें सुनते हैं, चीजों को चलते देखते हैं, गेंदें या रोशनी की किरणें आदि देखते हैं, तो उन्हें लगता है कि उन्होंने भूत देखा है। लेकिन किसी ने भूतों को बूढ़ा होते, खाते, सांस लेते या बाथरूम का इस्तेमाल करते हुए नहीं देखा है। तो क्या भूत किसी खास ऊर्जा से बने होते हैं, जो बिना नष्ट हुए मंडराते और उड़ते रहते हैं? अगर ऐसा है, तो इसका मतलब है कि जब भूत चमकते हैं, चीजों को हिलाते या आवाजें निकालते हैं, तो वे पदार्थों (जो जगह घेरता है और जिसका वजन होता है) की तरह काम कर रहे होंगे। पर अगर वे दीवार के पार हो जाते हैं या गायब हो जाते हैं, तो उन्हें पदार्थ नहीं होना चाहिए।
जब भी भूत-प्रेत का पता लगाने वाला कोई व्यक्ति किसी कथित भुतहा जगह पर जाता है, तो उसे कुछ ऐसी चीजें मिलती हैं, जिसे वह पारलौकिक मान बैठता है। भूतों के व्यक्तिगत अनुभवों की वजह मानवीय इंद्रियों की सीमाएं हो सकती हैं। किराने की दुकान के वीडियो क्लिप की मैंने समीक्षा की। वीडियो में प्रकाश के कई छोटे-छोटे गोले कैद हुए, जो वास्तव में धूल के छोटे कण थे, जो कैमरे के लेंस के करीब तैरते दिखे। शेल्फ पर वजन बढ़ने के कारण ब्रैकेट जब अपनी जगह पर आया, तो झटका लगा और उस पर रखी चीजें गिरने लगीं। जाहिर है कि भूतों की कहानियां आपके मस्तिष्क द्वारा कुछ दृश्यों और ध्वनियों की व्याख्या करने के तरीके से ही पैदा होती हैं।