अंग्रेजी के उपन्यासकार चेतन का नवीनतम उपन्यास आया 'हाफ गर्लफ्रेंड'(आधी महिला मित्र)। संक्षेप में किस्सा इस प्रकार है। 'एक बार की बात है। एक था बिहारी लड़का। नाम था माधव। उसे एक लड़की से प्यार हो गया। लड़की का नाम था रिया। माधव, टूटी-फूटी अंग्रेजी बोलता था पर रिया की अंग्रेजी फर्राटेदार थी। माधव उससे रिश्ता कायम करना चाहता था। रिया की उसमें कोई रुचि नहीं थी। रिया सिर्फ दोस्ती चाहती थी। ऐसा अक्सर होता है, लड़के पहली मुलाकात में प्रेम करने लगते हैं। लड़कियां थोड़ा वक्त लेती हैं। इस मामले में भी यही स्थिति थी। माधव दोस्ती को मोहब्बत में बदलना चाहता था। रिया ने एक बीच का रास्ता सुझाया। यह गाथा इसी शैली के छोटे-छोटे वाक्यों से गुथी है। वह उसकी आधी गर्लफ्रेंड बनने का तैयार हो गई। भगत आज के हिंदुस्तान का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने नई पीढ़ी को आवाज और शब्द दिए हैं, एक भयमुक्त पीढ़ी को। उनके पिछले चारों उपन्यासों ने रिकॉर्डतोड़ सफलता हासिल की थी। 'फाइव प्वाइंट समथिंग', 'वन नाइट एट द कॉलसेंटर', 'द थ्री मिस्टेक्स ऑफ माई लाइफ', ‘टू स्टेटस’ और 'रेवोल्यूशन 2020'।
'हाफ गर्लफ्रेंड' एक सीधी-सादी प्रेमकथा है। यही उसकी ताकत है। एक रोचक प्रेमकथा। दो भोले प्रेमी ही इसकी पृष्ठभूमि हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय का विख्यात सेंट स्टीफन कॉलेज। यह अपनी अंग्रेजियत के लिए मशहूर है और उसमें फंस जाता है बिहार से पढ़ने आया हमारा नायक माधव। वह पहली निगाह में रिया से प्रेम करने लगता है। उन दोनों का कोई मेल नहीं था। रिया को बचपन से अंग्रेजी माहौल मिला था। उसके मां-बाप खासे अमीर थे। उनका जमीन-जायदाद का कारोबार था। पर उसे माधव का भोलापन भा गया।
'हाफ गर्लफ्रेंड' पहले पन्ने से ही दिल को छू जाती है। यह जवान पीढ़ी के सपनों की कहानी है। माधव पैसा कमाना चाहता है। इस रास्ते से वह बड़ा आदमी बनना चाहता है। रिया अंग्रेजी गाने गाना चाहती है न्यूयॉर्क के विश्वप्रसिद्ध मेडिसन स्कवायर में। वही मेडिसन स्कवायर जहां खड़े होकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में हॉलीवुड के अभिनेताओं के साथ तसवीरें खिंचाई थीं। इस किताब की कहानी पाठक को अपने सपने पूरे करने की प्रेरणा देती है।
चेतन भगत के उपन्यास की शक्ति उसके संवाद में है। ऐसे संवाद, जो सीधे जिंदगी से उठाए गए हैं। वह जिंदगी उनके प्रतिबद्ध पाठक-पाठिकाएं जीते हैं। एक उदाहरण देखिए-नायक सेंट स्टीफन कॉलेज में दाखिले के लिए इंटरव्यू दे रहा है।
“गुड-मॉर्निंग सर!”
“पर इंटरव्यू लेने वाले तो कई हैं,” एक अध्यापक बोला। (जाहिर है वह माधव को उलझाना चाहता था।)
माधव ने अपनी गलती ठीक करने की कोशिश करते हुए कहा-“गुड मॉर्निंग सर, सर और सर।” इंटरव्यू लेने वाले मुस्कुराए। वह एक व्यंग्यपूर्ण मुस्कान थी। एक उच्च वर्ग की निम्न वर्ग पर लक्षित श्रेष्ठता का दंभ वाली। अंग्रेजी जानने वाले का यह दंभ कि सामने वाला अंग्रेजी में पैदल है। नायक खिसियाकर मुस्कुराने लगा। इंटरव्यू बोर्ड में एक समाजशास्त्र, एक भौतिकी और तीसरा अंग्रेजी पढ़ाता था।
“तो तुम स्पोर्ट्स कोटे के हो? वो यादव कहां है स्पोर्ट्स टीचर।” “मैं यहां हूं, पीछे से आवाज आई।”
“भई 85 प्रतिशत, तो तुम क्या करोगे?”
“क्या खेलते हो?”
“बास्केटबॉल।”
“किस लेवल पर?”
“स्टेट।”
“अंग्रेजी में पूरा वाक्य नहीं बोल सकते?”
पूरे उपन्यास में इसी तरह के चुटीले वाक्यों के सहारे लिखा गया है। सारे पात्र जमीन से जुड़े हैं। हमारी जानी-पहचानी और परखी हुई जमीन। लगता है हमें ऐसे पात्र मिल चुके हैं।
इस उपन्यास में अंग्रेजी भाषा केंद्र में है। अंग्रेजी करोड़ों लोगों की जरूरत भी है और समस्या भी। उन्हें इससे बार-बार टकराना पड़ता है। स्कूलों में, खासकर सरकारी स्कूलों में तो इसे पढ़ने और पढ़ाने वालों का स्तर लचर होता है। जब विद्यार्थी कॉलेज में पहुंचता है, तो उसकी समस्याएं बढ़ जाती हैं। प्राइवेट स्कूलों से आए विद्यार्थी ठीक-ठाक बोल लेते हैं। हालांकि वह सौ प्रतिशत शुद्ध नहीं होते, पर उनका आत्मविश्वास सब कुछ ढक लेता है।
लेखक ने अंग्रेजी की जमीन पर अपनी कथा का विन्यास किया है। उसका आधारस्तंभ एक नायिका है, जिसे अंग्रेजी आती है, वह चाक-चौबंद है और खाते-पीते घर से है। पर वह अच्छे संस्कारों वाली है। वह माधव के भीतर झांककर उसकी सच्चाई और ईमानदारी को भांप लेती है और उसे स्वीकार करती है।