हाल ही में सत्ता में आई नरेंद्र मोदी सरकार ने सबके विकास के लिए सबका साथ हासिल करने के क्रम में पूरे भारत में एक 'सुलभ, किफायती और प्रभावी' स्वास्थ्य प्रणाली स्थापित करने की घोषणा की है। स्वस्थ भारत को लेकर नई सरकार का सक्रिय होना निश्चय ही एक बेहतर कदम है, लेकिन इन सबके बीच एक मुद्दा ऐसा भी है, जिस पर नवनिर्वाचित एनडीए सरकार को विशेष ध्यान रखना होगा, और वह है- देश में नियमित टीकाकरण को बढ़ाने के लिए नए सिरे से प्रयास करना।
हमारे नौनिहालों को घातक रोगों से बचाने के लिए जरूरी है कि उन्हें नियमित टीकाकरण की सुविधा मिले। नई सरकार के लिए यह मुद्दा सर्वोच्च प्राथमिकता वाली सूची में होना चाहिए। ऐसा करना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि नई सरकार द्वारा निर्धारित किए गए दृष्टिकोण को साकार करने में भी यह सहायक सिद्ध होगा।
वर्तमान में हर साल करीब 15 लाख बच्चे टीकों से दूर हो सकने वाली बीमारियों से लड़ते हुए मौत का शिकार हो जाते हैं। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि उन्हें टीकाकरण की पूरी सुविधा नहीं मिल पाती। आंकड़े यह भी बताते हैं कि दुनिया भर के हर पांच बच्चों में से एक बुनियादी टीकों का कोर्स पूरा नहीं कर पाता। नतीजतन 26 लाख शिशुओं की एक बड़ी संख्या के साथ भारत टीकाकरण से वंचित बच्चों की सबसे बड़ी संख्या वाला देश बन गया है। इसकी भयावहता का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकत है कि यह आंकड़ा दुनिया में टीकाकरण से वंचित बच्चों की कुल संख्या 68 लाख का लगभग एक तिहाई है।
ऐसे में जरूरी यह है कि टीकाकरण के मामले में सरकार संजीदगी दिखाए, ताकि इसके बिना अकाल मृत्यु का शिकार हो रहे बच्चों को नया जीवन दिया जा सके। उल्लेखनीय है कि टीकाकरण सिर्फ मौत और बीमारी को रोकने के मामले में सबसे बेहतर समाधान ही नहीं है, बल्कि बच्चों की जीवन भर की संभावना के साथ-साथ उनके परिवारों व देश के आर्थिक स्वास्थ्य को भी समृद्ध बनाता है। कहा भी जाता है कि ये नौनिहाल ही देश के भविष्य हैं, तो फिर भविष्य को मजबूत बनाना परोक्ष रूप से देश को मजबूत बनाना है। लिहाजा जल्दी से जल्दी हम नए और अभी तक इस्तेमाल किए जा रहे टीकों के उपयोग में तेजी लाकर गरीब बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य का उपहार दे सकते हैं, ताकि वे स्कूल में अधिक समय बिता सकें और स्वस्थ और उत्पादक जीवन जीने का बेहतर अवसर पा सकें।
इसी कड़ी में गावी एलायंस के सहयोग से इस वर्ष भारत डिप्थीरिया, टिटनेस, काली खांसी, हेपेटाइटिस बी और हेमोफिलस इन्फ्लूएंजा जैसी घातक बीमारियों के खिलाफ '5 इन 1' टीके के अपने राष्ट्रीय मिशन को जारी रखेगा। इतना ही नहीं, यह संगठन तीन साल से अधिक समय तक (वर्ष 2016 तक) देश के कमजोर राज्यों को लक्ष्य बनाकर भारत में स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत बनाने की दिशा में 10.7 करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि भी देगा। इससे निर्विवाद रूप से भारत को राष्ट्रीय स्तर पर अपने नियमित टीकाकरण को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। संभव हो, तो यह देश अपने पोलियो अभियान की सफलता को भी भुना सकता है। लिहाजा यह उम्मीद बेमानी नहीं कि जल्दी ही नई सरकार बच्चों को टीके की पूरी शृंखला का लाभ दिलाना सुनिश्चित करेगी।
(गावी एलायंस के सीईओ और टीकाकरण का समर्थन करने वाले वैश्विक वकील)