अक्तूबर से दिसंबर तक त्योहारों का महीना होता है। इस दौरान लोग खूब खरीदारी करते हैं। ई-कारोबारी और खुदरा विक्रेता का मकसद इस दौरान अधिक मुनाफा कमाना होता है। इस साल भी ई-वाणिज्यिक कंपनियां आकर्षक छूट देने की पेशकश कर रही हैं, तो खुदरा विक्रेता भी अपनी दुकान सजा चुके हैं। ग्राहक भी ऑनलाइन बाजार लगने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। छूट का अधिकतम लाभ लेने के लिए कुछ लोगों ने क्रेडिट कार्ड लिया है, क्योंकि ई-कारोबारी घोषित छूट से अतिरिक्त छूट इन क्रेडिट कार्डों के जरिये अविलंब देते हैं।
ई-वाणिज्यिक कंपनियों से मुकाबला करने के लिए खुदरा विक्रेता भी भारी-भरकम छूट की पेशकश कर रहे हैं। कुछ खुदरा विक्रेता तो ई-कारोबारियों से भी कम कीमत पर अपने उत्पाद बेच रहे हैं। पर ऐसा वही कर रहे हैं, जिनकी पास पूंजी और बिक्री अधिक है। आम तौर पर महासेल की समय-सीमा होती है। ग्राहक ऐसे विज्ञापन देख दबाव में आ जाते हैं और बिना जरूरत के कई सामान खरीद लेते हैं।
कई बार तो ई-कारोबारी उत्पादों की कीमत एमआरपी से ज्यादा दिखाकर उस पर छूट देते हैं, ताकि छूट का प्रतिशत ज्यादा दिखे। महासेल के दौरान कुछ ही वस्तुओं पर छूट दी जाती है और बताया जाता है कि उन उत्पादों का स्टॉक सीमित है। खुदरा विक्रेताओं को थोक विक्रेताओं से बहुत ज्यादा छूट मिलती है, पर वे उसका लाभ ग्राहकों को नहीं देते। एक दशक पहले तक खुदरा विक्रेताओं को 35 प्रतिशत तक की मार्जिन मिलती थी, जो अब बढ़कर 45 से 50 प्रतिशत हो गई है।
अक्सर देखा जाता है कि ई-वाणिज्यिक कंपनियों के पोर्टल पर मोबाइल और दूसरे उत्पाद कुछ सेकंड में बिक जाते हैं, पर उत्पाद बिकने की जो संख्या बताई जाती है, वह गलत होती है। कई बार उत्पादों को लोकप्रिय बनाने के लिए फर्जी सर्वे का सहारा लिया जाता है। कथित लोकप्रिय उत्पादों पर भारी छूट की पेशकश की जाती है। हालांकि छूट देने के बाद भी उत्पाद उनकी वास्तविक कीमत पर ही बेचे जाते हैं। घर पर मुफ्त सामान पहुंचाने का खेल चलता है। खुदरा विक्रेता ऐसी सुविधा तभी देते हैं, जब ग्राहक ज्यादा सामान खरीदता है।
ई-कारोबारी तो मुफ्त डिलीवरी के पैसे भी लेते हैं। वे इसके लिए कूपन जैसे, प्राइम, गोल्ड, सिल्वर आदि बेचते हैं। जो ग्राहक ऐसे कूपन खरीदते हैं, उन्हें ई-कारोबारी ज्यादा छूट देने की पेशकश करते हैं। खुदरा विक्रेता भी छूट की पेशकश करते हैं। पर ग्राहकों के लिए छूट का गणित समझना आसान नहीं होता। खुदरा विक्रेता ग्राहक को सबसे कम कीमत पर उत्पाद बेचने की बात कहता है, हालांकि वह उत्पाद की वास्तविक कीमत होती है।
खुदरा विक्रेता एक उत्पाद खरीदने पर दो मुफ्त या तीन खरीदने पर चार मुफ्त उत्पाद देने की पेशकश करता है। ऐसे मामलों में ग्राहकों को सबसे अधिक कीमत वाले उत्पाद की पूरी कीमत चुकानी होती है। छूट कम कीमत वाले उत्पादों पर दी जाती है।
ऑनलाइन बाजार से खरीदे गए बहुतेरे उत्पाद ई-वाणिज्यिक कंपनियां न बदलती हैं, न वापस लेती हैं। उत्पाद के खराब निकलने पर सर्विस सेंटर में भी उसे वापस नहीं किया जाता। ई-वाणिज्यिक कंपनियों के बहुत सारे नियम-कानून अपारदर्शी होते हैं। उनका कस्टमर केयर सिस्टम प्रभावी नहीं है। कई बार ऑनलाइन दिखाए गए उत्पाद की जगह दूसरे उत्पाद की डिलिवरी कर दी जाती है, जिन्हें ई-कारोबारी वापस नहीं लेते। स्पष्ट कानून न होने की वजह से ग्राहक उपभोक्ता फोरम या अन्य अदालतों की शरण में भी नहीं जा पाते।