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बाजारवाद: जीवन का उद्देश्य ढूंढें, नहीं तो बिल चुकाते रहेंगे; बाजार की लालची संस्कृति सहजता पर हावी है

जैक निकास Published by: विशांत श्रीवास्तव Updated Sun, 01 Sep 2024 05:16 AM IST

सार

इस समय हमारी जिंदगी पर बाजारवाद हावी है। हमें जीवन का उद्देश्य ढूंढना चाहिए, नहीं तो सारी जिंदगी सिर्फ बिल चुकाने में चली जाएगी। आज के दौर में बाजार की लालची संस्कृति सहजता पर हावी है।
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बाजारवाद (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ANI


अब वह मौत से लड़ रहे हैं। अप्रैल में उन्होंने घोषणा की कि वह ग्रासनली में हुए ट्यूमर की विकिरण चिकित्सा करवाएंगे। पिछले हफ्ते जब मैं उरुग्वे की राजधानी मोंटेवीडियो के बाहरी इलाके में उनसे मिलने गया, तो देखा कि बीमारी ने उन्हें बहुत कमजोर बना दिया है और वह मुश्किल से खा पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि तुम एक विचित्र बूढ़े से बात करने आए हो, आज की दुनिया के लिए मैं बिल्कुल फिट नहीं हूं। मानवता जिस तरह चल रही है, उससे लगता है कि सब नष्ट हो चुका है।


उरुग्वे में 35 लाख लोग रहते हैं, जबकि देश 27 लाख जोड़ी जूते का आयात करता है। हम कचरा पैदा करते हैं और जीवन का कीमती समय इच्छाओं की पूर्ति में बिताते हैं। इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य की इच्छाएं अनंत हैं और बाजार हम पर हावी हो गया है। इसने एक अचेतन संस्कृति पैदा की है, जो हमारी सहज प्रवृत्ति पर हावी है। हम खरीदारी करने और उसका भुगतान करने के लिए जीते और काम करते हैं। फिर भी वह कहते हैं कि इसके बावजूद जीवन सुंदर है। लेकिन हम इसे खो रहे हैं। मनुष्य अपने जीवन का उद्देश्य तलाश सकता है। लेकिन अगर आप जीवन का उद्देश्य नहीं तलाश पाते हैं, तो बाजार आपको जीवन भर बिलों का भुगतान करने के लिए मजबूर करेगा। अगर जीवन के उद्देश्य को पा लेते हैं, तो आपके पास जीने के लिए कुछ होगा। कुछ ऐसा, जो जीवन को खुशियों से भर दे।

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